Submit your post

रोजाना लल्लनटॉप न्यूज चिट्ठी पाने के लिए अपना ईमेल आईडी बताएं !

Follow Us

MP पुलिस की मदद मांगने से पहले सौ बार सोचिएगा, कहीं आपका हाल शांतनु जैसा न हो

1.14 K
शेयर्स

दिल्ली की एक फर्म में इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी के पेटेंट का काम देख चुके शांतनु पिछले 3-4 महीने से अनूपपुर में रह रहे हैं. वो अपने परिवार के साथ सीतापुर गांव में रहते हैं. उनके घर के पीछे कुछ दूरी पर सोन नदी बहती है. पिछले कई हफ्तों से इस नदी से रेत का अवैध खनन किया जा रहा है. रेत ले जाने वाले ट्रक रात में करीब एक-डेढ़ बजे आते हैं और सुबह उजाला होने से कुछ पहले तक खनन जारी रहता है.

शांतनु के घर के पीछे सोन नदी का वो इलाका, जहां से खनन होता है.
शांतनु के घर के पीछे सोन नदी का वो इलाका, जहां से खनन होता है.

ये सारे ट्रक शांतनु के घर के सामने से निकलते हैं. उनके घर के सामने जो कच्चा रास्ता है, वो सोन नदी तक जाता है और ये ज़मीन शांतनु के पट्टे की है. वैधानिक तौर पर ये उनकी ज़मीन है, जिसे गांववाले सड़क की तरह इस्तेमाल करते हैं. लोगों की सुविधा का ख्याल रखते हुए शांतनु और उनके परिवार ने कभी किसी की आवाजाही पर आपत्ति नहीं जताई. लेकिन, अवैध खनन के लिए अपनी ज़मीन के इस्तेमाल का उन्होंने विरोध किया और बदले में उन्हें मारपीट करने की फर्ज़ी शिकायत और पुलिस की बदसलूकी का सामना करना पड़ा.

शांतनु के घर के सामने की वो सड़क, जो उनकी ज़मीन पर बनी है.
शांतनु के घर के सामने की वो सड़क, जो उनकी ज़मीन पर बनी है.

शांतनु ने क्या किया

2-3 मई की रात जब एक ट्रक खनन के लिए शांतनु के घर के सामने से निकला, तो उन्होंने उसे रोक लिया. शांतनु ने ट्रक के ड्राइवर से कहा, ‘मुझे पता है आप लोग यहां रेत की चोरी करते हैं. आपको जो करना है, करिए, लेकिन इस अवैध काम के लिए मेरी ज़मीन का इस्तेमाल मत कीजिए. ये सड़क मेरी ही ज़मीन पर है. इस पर कौन चलेगा और कौन नहीं, इसका फैसला मैं कर सकता हूं. आप कहीं और से जाकर खनन कीजिए, लेकिन यहां से मत निकलिए.’

वो ड्राइवर उस समय कोई जवाब दिए बिना वहां से चला गया. शांतनु को जवाब मिला 4 मई की रात. उन्होंने सड़क के उस पार की अपनी ज़मीन की जो फेंसिंग करा रखी थी, उसे तोड़ दिया गया. कंक्रीट के खंभों और कंटीले तारों की इस फेंसिंग का हाल देखकर पता चलता है कि इसके साथ क्या किया गया है.

अवैध खनन के लिए जा रहा ट्रक रोकने पर शांतनु की ज़मीन पर बनी फेंसिंग का ये हाल किया गया.
अवैध खनन के लिए जा रहा ट्रक रोकने पर शांतनु की ज़मीन पर बनी फेंसिंग का ये हाल किया गया.

किसी की प्रॉपर्टी को अगर डैमेज किया जाएगा, तो वो क्या करेगा? पुलिस के पास जाएगा. शांतनु ने भी यही किया. वो 4 मई की सुबह ही अनूपपुर थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे. शांतनु बताते हैं कि थाने में उनकी बात अब्दुल नाम के सिपाही से हुई थी. अब्दुल ने मदद की. उन्होंने सुझाव दिया कि शिकायत के साथ डैमेज हुई प्रॉपर्टी की फोटो वगैरह भी लगा दीजिए, ताकि जल्द एक्शन लिया जाए. शांतनु दोषियों को नहीं जानते थे, तो उन्होंने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. शिकायत दर्ज की गई और शांतनु को रिसीप्ट भी दी गई.

शांतनु की शिकायत की कॉपी.
शांतनु की शिकायत की कॉपी.

इसका कोई फायदा हुआ?

इस पूरे प्रकरण का नतीजा ये हुआ कि दो-तीन दिनों तक कोई ट्रक खनन के लिए नहीं आया. लेकिन 8-9 मई कि दरमियानी रात फिर वही ट्रक खनन के लिए आया. शांतनु ने इस बार भी उसे रोका. ड्राइवर से फिर वही बातें कहीं, जो 2 मई को कही थीं. ड्राइवर ट्रक से उतरा, लेकिन उसने शांतनु को कोई जवाब नहीं दिया. तभी पीछे से उस ट्रक का मालिक संतदास यादव (40) बाइक पर आया और बेहूदगी भरे लहज़े में शांतनु से कहने लगा,

‘कौन है बे तू… तू मेरी गाड़ी रोकने वाला कौन होता है.’

जब शांतनु ने संतदास से कहा कि वो एक संदिग्ध काम के लिए उनकी ज़मीन यूज़ नहीं कर सकता, तो संतदास ने कहा कि वो खनन के लिए नहीं, बल्कि अपने खेत में जा रहा है. शांतनु के मुताबिक पूरा गांव ये जानता है कि संतदास अवैध खनन का काम करता है. घर के बाहर शांतनु से बकझक होने पर संतदास उनके घर में घुसा और उनके चचेरे भाई से बात करने लगा, जिनके साथ साझे में वो ट्रक चलवाता है. कुछ देर उनसे बात करके वो अपनी बाइक शांतनु के घर के सामने ही छोड़कर चला गया और ड्राइवर ट्रक लेकर चला गया.

संतदास, जिस पर अवैध खनन कराने का आरोप है.
संतदास, जिस पर अवैध खनन कराने का आरोप है.

और फिर पुलिस की असल सूरत सामने आई

संतदास के जाने के करीब 15-20 मिनट बाद शांतनु के घर पुलिस आई और उनके खिलाफ मारपीट और बाइक चोरी की शिकायत के आधार पर उन्हें थाने ले गई. आधी रात को शांतनु अपने ड्राइवर के साथ थाने पहुंचे. कुछ देर बाद TI वीरेंद्र वेंकट तांडिया थाने पहुंचे और शांतनु के मुताबिक उन्हें पहले शब्द थे,

‘कौन है बे तू… क्या नाम है तेरा? तू किसी की गाड़ी रोकने वाला कौन होता है? चल अपना पता लिखा और बता क्या करता है?’

थोड़ी देर बाद संतदास अपना छिला घुटना लेकर थाने पहुंचा. उसने शिकायत दर्ज कराई थी कि शांतनु ने उसके साथ मारपीट की और बाइक छीन ली. जब शांतनु ने थाने में पुलिस के सामने उससे पूछा, ‘क्या मैंने तुम्हारे साथ मारपीट की?’ तो संतदास ने कहा, ‘हां, तुमने मुझे मारा है’.

शांतनु TI को समझाते रहे कि उन्होंने मारपीट नहीं की है. घर के सामने की सड़क की ज़मीन भी उनकी है, जिस पर फैसला लेने का हक उन्हें है. उन्होंने 4 मई को दर्ज कराई शिकायत के आधार पर पूरा मामला भी बताया. इस पर TI का जवाब आया, ‘ये क्या कागज़ ले आया है बे!’

उस ट्रक का नंबर, जो खनन के लिए आया था.
उस ट्रक का नंबर, जो खनन के लिए आया था.

शांतनु बताते हैं कि थाने में TI के बगल में रखी कुर्सी पर ज्ञानेंद्र सिंह नाम का एक शख्स बैठा था. वो इलाके में ज़मीन की दलाली का काम करता है. उसका इस पूरे प्रकरण से कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन वो थाने में बार-बार शांतनु पर FIR दर्ज करने के लिए कह रहा था. वो TI के सामने कह रहा था, ‘वो सड़क प्राइवेट नहीं है, शासकीय है. तू कैसे किसी को रोक सकता है.’

कुछ देर बातचीत के बाद TI का पारा चढ़ गया और वो गुस्से में चिल्लाकर बोला, ‘इसे बंद करो अंदर, कल इसे कोर्ट में पेश करेंगे.’

ये सुनकर शांतनु ने अपने ड्राइवर गुड्डू से कहा कि वो घर जाकर सबको थाने में हुई घटना बताए. इस पर TI ने उसे भी रोक लिया. पूछा कि वो शांतनु के साथ क्यों आया है और कहा कि वो कहीं नहीं जाएगा. TI का गुस्सा कम होने पर अंदर करने वाली बात आई-गई हो गई, लेकिन वो बार-बार कहता रहा, ‘तू गाड़ी रोकने वाला कौन होता है!’ थाने में करीब डेढ़ घंटे तक चले इस तमाशे के बाद TI ने शांतनु को ये इंस्ट्रक्शन देकर छोड़ा कि उन्हें अपनी ज़मीन पर किसी की गाड़ी रोकने का कोई अधिकार नहीं है.

खनन अवैध है, इसका क्या सबूत है

शांतनु बताते हैं कि उनके घर से सवा किमी दूर कलेक्ट्रेट है. नियमत: कलेक्ट्रेट से 5 किमी के दायरे में कोई खनन नहीं होता है. इसलिए उनके घर के पीछे होने वाला खनन अवैध है. एक और बात ये भी कि अगर खनन वैध होता है, तो दिन में होता. दिन में वहां कोई ट्रक नहीं आता है, लेकिन आधी रात में ट्रक आते हैं और चोरों की तरह काम किया जाता है. इसका क्या ही मतलब हो सकता है!

पुलिस का इस पर क्या कहना है

दी लल्लनटॉप ने जब TI वीरेंद्र वेंकट तांडिया से बात करने की कोशिश की, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया. अनूपपुर के अडिशनल SP वैष्णव शर्मा ने इस मामले में बात करने से इनकार कर दिया. आखिर में प्रभारी SP हितेष चौधरी ने इस मामले पर बात की. उन्होंने कहा कि 9 मई की दोपहर में उन्हें इस मामले की जानकारी मिली, जिसे वो ऊपर अधिकारियों तक पहुंचाएंगे और अगर TI तांडिया के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो उनके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा.

बलराज साहनी की याद दिलाता है ये मामला

अनूपपुर पुलिस का ये मामला हमें भारतीय सिनेमा के विद्वान एक्टर बलराज साहनी की याद दिलाता है. 1972 में JNU के दीक्षांत समारोह में दिए अपने भाषण में उन्होंने पुलिस का ज़िक्र करते हुए कहा था,

‘मुझे यकीन है कि इस देश में कुछ पुलिस अफसर ऐसे भी होंगे, जो अपने दिल में लोगों के दोस्त बनना चाहते होंगे, न कि दुश्मन. उन्हें मालूम होगा कि इंग्लैंड में जनता के प्रति पुलिस का रवैया नर्म है. लेकिन अंग्रेज़ों ने यहां की पुलिस को वैसी ट्रेनिंग नहीं दी. उन्होंने जिन देशों को गुलाम बनाकर रखा, वहां अलग ही कहानी थी. हिंदुस्तान की पुलिस को जो ट्रेनिंग मिली है, उसके आगे वो मजबूर हैं. ये अंग्रेज़ों का ही सिखाया हुआ है, जिसकी वजह से पुलिसवाले अपने दफ्तर में घुसने वाले लोगों के अंदर अपना आतंक भर देते हैं. वो जितना हो सके, उतना काम रोकने की कोशिश करते हैं. जितना हो सके, उतना गैर-मददगार होने की जुगत लगाते हैं.’


ये भी देखिए:

बालू और मौरंग की धंधे में क्यों मारे जा रहे ईमानदार अफसर!

 

लल्लनटॉप न्यूज चिट्ठी पाने के लिए अपना ईमेल आईडी बताएं !

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें
Anuppur police misbehaved with Shantanu who tried to expose illegal mining in Son river of Madhya Pradesh

टॉप खबर

उड़ी से भी बड़ा आतंकी हमला, CRPF के काफिले के 42 जवान शहीद

कश्मीर के पुलवामा में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने किया हमला.

अमित शाह को कितना परेशान करेगा यूपी में प्रियंका का पहला दांव

कौन हैं केशव मौर्य जो सबसे पहले प्रियंका के खेमे में आए हैं

क्या अरुण जेटली ने राफेल पर देश से झूठ बोला?

राफेल पर क्या कहती है CAG की रिपोर्ट?

भारत रत्न लेने पर बंटा भूपेन हजारिका का परिवार, वजह मोदी सरकार का ये बिल है

बेटा भारत रत्न नहीं लेना चाहता,बाकी परिवार चाहता है सम्मान मिले.

रफाएल पर 'द हिंदू' का एक और खुलासा, लेकिन क्या इसमें जानकर कुछ छिपाया गया?

'द हिंदू' के मुताबिक सरकार ने रफाएल से एंटी-करप्शन क्लॉज़ हटाया...

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा, जिसे ममता-मोदी दोनों तरफ के लोग अपनी जीत मान रहे हैं

CBI और कोलकाता पुलिस की लड़ाई असल में ममता और मोदी की लड़ाई मानी जा रही है...

सीबीआई को लेकर मोदी सरकार से क्यों टकरा रही हैं ममता बनर्जी

जानिए कोलकाता से लेकर दिल्ली तक क्यों बरपा है हंगामा, क्या-क्या हुआ अब तक?

CBI पहुंची थी कोलकाता कमिश्नर के घर, पुलिस ने टीम को ही हिरासत में ले लिया

मोदी बनाम ममता की लड़ाई अब पुलिस बनाम सीबीआई, ममता बनर्जी धरने पर.

'5 लाख तक टैक्स नहीं' ये सुनने के बाद कन्फ्यूजन क्यों फैला?

अंतरिम बजट आ गया है. आपके लिए क्या निकलकर आया, वो जानो.

इन्कम टैक्स पर मोदी सरकार का सबसे बड़ा ऐलान

गाइए - 'जिसका मुझे था इंतज़ार, वो घड़ी आ गई.'