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कान के वर्चुअल मार्केट में इंडिया से जो फिल्म दिखाई गई, उसकी असली कहानी रोंगटे खड़े कर देती है

कान फिल्म फेस्टिवल. भारत की तरफ से इसमें आधिकारिक एंट्री हुई मराठी फिल्म ‘माई घाट: क्राइम नंबर 103/2005′ की. हिंदी और मराठी सिनेमा के ऐक्टर, राइटर और डायरेक्टर अनंत नारायण महादेवन ने इसे डायरेक्ट किया है. ये फिल्म कान फेस्टिवल के पहले वर्चुअल फिल्म मार्केट में 25 जून को दिखाई गई. ये वर्चुअल मार्केट 22 जून से शुरू हुआ है और 28 जून तक चलेगा. फिल्म केरल की प्रभावती अम्मा की असली कहानी पर बेस्ड है.

फ्रांस में कान फिल्म फेस्टिवल हर साल मई महीने में सजता है. लेकिन कोरोना वायरस की वजह से फेस्टिवल कैंसल हो गया. ऑनलाइन फिल्मों के लिए कान ने Marche’ du Film Online सेक्शन शुरू किया है, जो अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों को सपोर्ट करेगा और ऑनलाइन मार्केट तैयार करेगा.

एक फेसबुक पोस्ट में डायरेक्टर अनंत ने लिखा,

कान में Marche’ du Film सेक्शन के तहत ‘माई घाट: क्राइम नंबर 103/2005’ का प्रीमियर हुआ. नर्वस होकर फीडबैक का इंतज़ार कर रहा हूं. 

अनंत ने मुंबई मिरर को बताया,

कोई फिल्म कंपीटिशन में नहीं हैं और ना ही कोई अवॉर्ड है. मैं फ्रांस में रहूंगा भी नहीं लेकिन कान में प्रीमियर होना और अपनी फिल्म के प्रचार-प्रसार के लिए इस लेबल का इस्तेमाल करना भी प्रिविलेज है.

फिल्म के बारे में

‘माई घाट’ एक असल कहानी पर आधारित है. केरल में 68 साल की प्रभावती अम्मा ने अपने बेटे उदय कुमार को न्याय दिलाने के लिए 13 साल कोर्ट कचहरी के चक्कर काटे. 2005 में 26 साल के उदय कुमार की तिरुवनंतपुरम फोर्ट पुलिस स्टेशन में पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी. 2018 में तिरुवनंतपुरम की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने दो पुलिसकर्मियों को मौत की सज़ा सुनाई थी. इसके अलावा तीन आरोपियों को तीन साल की कैद हुई.

अनंत बताते हैं कि प्रभावती अम्मा ने केरल में पहली बार फिल्म देखी. उन्होंने ये स्वीकार किया कि इसे देखना उनके लिए बहुत तकलीफदेह होगा. वो खुश थीं कि मैंने हिंसा को कैमरे से दूर रखा. ‘माई घाट’ उनके धैर्य और साहस को ट्रिब्यूट है.

फिल्म में प्रभावती अम्मा का किरदार उषा जाधव ने किया है और उन्हें इस फिल्म के लिए सिल्वर पीकॉक बेस्ट ऐक्टर (फीमेल) अवॉर्ड मिल चुका है. इसके अलावा फिल्म में सुहासिनी मुले, गिरीश ओक जैसे कलाकार भी हैं. फिल्म पहले भी दुनियाभर के कई फिल्म फेस्टिवल में जा चुकी है और फिल्म की तारीफ भी हुई है. इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ केरला (IFFK) में फिल्म को स्टैंडिंग ओवेशन मिला. अनंत महादेवन ने रेड अलर्ट (2009), मी सिंधुताई सपकाल (2010), अक्सर (2006), डॉक्टर रखमाबाई (2016) जैसी फिल्में डायरेक्ट की हैं.


क्या है कान फिल्म फेस्टिवल, जिसका हर साल भारत में शोर मचता है

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