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तालिबान के काबिज होने के बाद US प्रेसिडेंट बाइडेन ने दोटूक जवाब दे दिया है

काबुल (Kabul) पर तालिबान के कब्जे से कुछ महीने पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden ) ने ऐसी संभावना को नकार दिया था कि तालिबान की अफगानिस्तान में वापसी होगी. लेकिन पिछले कुछ ही दिनों में दुनिया भर ने देखा कि किस तरह से तालिबान ने पूरे देश पर कब्जा कर लिया. और अशरफ गनी सरकार ताश के पत्तों की तरह ढह गई.

अमेरिकी ने पिछले साल ही घोषणा कर दी थी कि 20 साल बाद अब वो अमेरिका के सभी सैनिकों को अफगानिस्तान से वापस बुलाएगा. अमेरिकी वाइस प्रेसिडेंट कमला हैरिस ने भी फैसले का समर्थन किया.

तालिबान के कब्जे पर क्या बोले अमेरिकी प्रेसिडेंट?

तालिबान के अफगानिस्तान पर काबिज होने के बाद पहली बार अमेरिकी प्रेसिडेंट जो बाइडेन लोगों के सामने आए. उन्होंने अपनी 15 मिनट की स्पीच में अफगानिस्तान से सैनिकों को वापस बुलाने के फैसले को सही ठहराया. उन्होंने कहा कि

“मैं अमेरिका का राष्ट्रपति हूं और सब मेरी ही जिम्मेदारी है.”

उनके भाषण की प्रमुख बातें कुछ ये रहीं-

‘मैं अपने फैसले पर अडिग हूं’

पूरी दुनिया में भले ही अफगानिस्तान के हालात को लेकर अमेरिका की निंदा हो रही हो, लेकिन अमेरिकी प्रेसिडेंट ने कहा कि वह 20 साल से युद्धरत देश से अपनी सेना को वापस बुलाने के फैसले पर अडिग हैं. बाइडेन ने कहा कि उन्हें दो विकल्पों में से एक को चुनना था. पहला ये कि वो पिछली सरकार के एग्रीमेंट के अनुसार अमेरिकी सेना को वापस बुला लें. और दूसरा ये कि अफगानिस्तान में युद्ध के तीसरे दशक को चालू रखने के लिए और अमेरिकी सैनिक भेजें. उन्होंने कहा कि उन्हें डोनाल्ड ट्रंप की तालिबान के साथ हुई विरासत में डील मिली है. इसके अनुसार 1 मई के बाद अमेरिकी सेना के साथ युद्धविराम या सुरक्षा को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं किया गया है. बाइडेन ने कहा कि मैं वर्तमान में हो रही आलोचना को लेना बेहतर समझूंगा, बनिस्बत इस फैसले को अगले राष्ट्रपति पर टालने के.

‘ये सही है कि सब कुछ बहुत जल्दी हुआ’

अपने भाषण में जो बाइडेन ने माना कि अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा बहुत तेजी से हुआ है. उन्होंने कहा कि

“मैंने अमेरिकी जनता से वादा किया है कि मैं उनसे साफ-साफ बात करूंगा. सच ये है कि ये सब हमारे अंदाजे से बहुत तेजी से हुआ. हालांकि हमने हर तरह की आपात स्थिति की तैयारी कर रखी थी. पिछले 20 साल में मैंने सीखा है कि अमेरिकी सेनाओं को वापस बुलाने का सही समय कभी भी नहीं आएगा. कई साल अफगानिस्तान में बिताने से भी कोई फर्क नहीं पड़ा है. अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान का खामियाजा भुगत रही थी “

‘अमेरिकी सेना को युद्ध में नहीं मरना चाहिए’

तालिबान के इतनी जल्दी अफगानिस्तान पर काबिज होने पर प्रतिक्रिया देते हुए जो बाइडेन ने कहा कि

“अफगान राजनेता हार मानकर देश छोड़कर भाग गए. सेना कुछ जगहों पर बिना लड़े ही ध्वस्त हो गई. हमने अरबों डॉलर खर्च गिए. हमने अफगानिस्तान को हर मौका दिया. लेकिन हम उन्हें अपने भविष्य के लिए लड़ने की इच्छाशक्ति नहीं दे सके. अमेरिकी सेना वो लड़ाई लड़ते हुए नहीं मर सकती जिसे अफगान सैनिक लड़ने को ही तैयार नहीं हैं. अमेरिकी बेटों और बेटियों की और कितनी पीढ़ियां अनिश्चित युद्ध में अपनी जान गंवाएंगी?”

‘देश को गृहयुद्ध के लिए तैयार करने में विफल रहे गनी’

जो बाइडेन ने अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी पर आरोप लगाया कि वो अफगानिस्तान को गृह युद्ध के लिए तैयार करने में असफल रहे हैं. उन्होंने कहा कि

“जब मैं गनी से जून में मिला और जुलाई में उनसे फोन पर बात की तो माहौल काफी अच्छा था. हमने अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना के बाहर आने के बाद गृहयुद्ध के हालात में पैदा हुई स्थिति पर भी बात की. हमने सरकार में करप्शन खत्म करने और अफगान नेताओं के साथ आने पर भी चर्चा की थी. लेकिन वो ऐसा करने में असफल रहे.”

बाइडेन ने कहा कि अशरफ गनी तालिबान से राजनीतिक समझौते करने में असफल रहे हैं.

‘पुरानी गलती नहीं दोहराएंगे’

अमेरिकी प्रेसिडेंट बाइडेन ने पुरानी गलतियां न दोहराने की बात भी कही है. उन्होंने कहा कि

“हम लगातार युद्ध में फंसे रहने की पुरानी गलतियों को नहीं दोहराएंगे. हमारे प्रतिस्पर्धी चीन और रूस चाहते हैं कि हम अरबों डॉलर के संसाधन अफगानिस्तान में झोकते रहें.”

इसके अलावा अमेरिकी प्रेसिडेंट बाइडेन ने दो टूक कहा कि अमेरिका का लक्ष्य कभी भी राष्ट्र निर्माण या अफगानिस्तान में लोकतंत्र की स्थापना का नहीं था. इसका सिर्फ एक ही उद्देश्य था कि कैसे अमेरिकी धरती पर होने वाले हमले को रोका जाए. अगर तालिबान फिर से किसी अमेरिकी पर अटैक करता है तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा.

कमला हैरिस ने भी किया समर्थन

अमेरिकी राष्ट्रपति ही नहीं, वाइस प्रेसिडेंट कमला हैरिस ने भी सैनिकों को अफगानिस्तान से बुलाने के फैसले को सही ठहराया. उन्होंने ट्वीट किया कि

“दो दशकों से हमारे बहादुर सैनिक अफगानिस्तान में अपनी जिंदगी दांव पर लगाते रहे हैं. हमें उन पर गर्व है और हम इसके लिए उनके आभारी रहेंगे. अफगानिस्तान से अमेरिकी सेनाओं को वापस बुलाने का फैसला पूरी तरह से सही है.”

बता दें कि आज से 20 साल पहले जब अमेरिका पर आतंकवादी हमला हुआ था तो हमलों के लिए जिम्मेदार अल-कायदा चीफ ओसामा बिन लादेन की खोज शुरू हुई थी. इसके बाद बरसों तक अमेरिका ने अल-कायदा नेटवर्क को खत्म करने के लिए अफगानिस्तान और दूसरे देशों में ऑपरेशन किए. अफगानिस्तान की सेना को ट्रेनिंग और हथियार दिए. पिछली अमेरिकी सरकार के मुखिया डॉनल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने का फैसला लिया, जिसे बाइडेन ने लागू किया.


वीडियो – अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के आने से भारत को क्या बड़े नुकसान, क्या कर रही है भारत सरकार?

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