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सनातन संस्था के वैभव राउत के पास से ATS को 8 बम मिले हैं

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मुंबई के एंटी टेरर स्क्वॉड ने सनातन संस्था से जुड़े हुए वैभव राउत को गिरफ्तार किया है. एटीएस के मुताबिक 9 अगस्त की रात को वैभव राउत के घर और दुकान पर छापेमारी के दौरान एटीएस को 8 देसी बम मिले हैं. इसके अलावा वैभव राउत की दुकान से गन पाउडर भी बरामद हुआ है, जिससे 20 से ज्यादा बम बनाए जा सकते हैं. एटीएस का दावा है कि वैभव राउत की दुकान से बम को ब्लास्ट करने वाले डेटोनेटर भी मिले हैं.

एटीएस के मुताबिक एटीएस को वैभव पर पिछले कई दिनों से शक था. इस वजह से एटीएस लगातार उसे ट्रैक कर रही थी. 9 अगस्त की शाम को जब वैभव नालासोपारा इलाके में अपने घर में मौजूद था, तो एटीएस डॉग स्क्वॉड और फरेंसिक टीम के साथ वैभव के घर छापा मारने के लिए पहुंच गई. वहां पर एटीएस को 8 बम मिले. घर से सटी दुकान पर छापेमारी के दौरान गन पाउडर और डेटोनेटर मिले, जिसके बाद वैभव को एटीएस ने गिरफ्तार कर लिया. लेकिन ये पहली बार नहीं है, जब सनातन संस्था या उससे जुड़े लोगों पर पुलिस ने कार्रवाई की है.


वहीं वैभव राउत के वकील संजीव पुनालेकर ने कहा है कि अभी तक एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड ने उन्हें वैभव की गिरफ्तारी के बारे में नहीं बताया है.

संस्था तय नहीं कर पा रही, वैभव राउत उनके साथ है या नहीं

वैभव राउत की गिरफ्तारी के बाद सनातन संस्था ये तय ही नहीं कर पा रही है कि वैभव राउत संस्था के साथ है या नहीं. सनात संस्था की हिन्दू जनजागृति समिति, महाराष्ट्र के राज्य संगठक सुनील घनवट ने कहा है-

‘वैभव राउत गोरक्षा करनेवाले संगठन हिन्दू गोवंश रक्षा समिति में थे. वो हिन्दू जनजागृति समिति के सर्व हिन्दू संगठनों की ओर से मिलकर किए जानेवाले हिन्दू संगठनों के आंदोलनों में शामिल होने थे. लेकिन पिछले कुछ महीनों से वो किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं हो रहे थे.’

हालांकि इस बयान के जरिए हिंदू जनजागृति समिति ने माना है कि वैभव राउत सनातन संस्था से जुड़ा हुआ था. हालांकि संस्था ने गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि ये साजिश भी हो सकती है.

1999 में बनी थी सनातन संस्था

सनातन संस्था की शुरुआत 1999 में गोवा में हुई थी.
सनातन संस्था की शुरुआत 1999 में गोवा में हुई थी.

सनातन संस्था की शुरुआत 1999 में गोवा में हुई थी. इस संस्था का हेडक्वॉर्टर गोवा की राजधानी पणजी से 28 किलोमीटर दूर पोंडा में है. इसकी शुरुआत करने वाले थे जयंत बालाजी अठावले. उन्होंने भक्तराज महाराज के साथ मिलकर हिंदुओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आध्यात्मिक बनाने के लिए इस संस्था की शुरुआत की थी. जयंत बालाजी अठावले खुद को हिप्नोथिरेपिस्ट यानी सम्मोहन कला के विशेषज्ञ कहते थे. धीरे-धीरे इस समूह की पूरे देश में कई शाखाएं हो गईं. लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए इस संस्था की ओर से हिंदी, मराठी, कन्नड़, गुजराती और अंग्रेजी में करीब 65 लाख किताबें छपवाई गईं और लोगों में बांटी गई. इस संस्था की ओर से सनातन प्रभात नाम का अखबार भी निकाला जाता है, जो हिंदी, मराठी, कन्नड़, गुजराती और अंग्रेजी में छपता है. इसके अलावा इस संस्था की ओर से 2008 में श्री शंकरा नाम का एक चैनल भी शुरू किया गया है, जिसपर धर्मसत्संग व धर्मशिक्षणवर्ग नाम के दो कार्यक्रम चलाए जाते हैं.

2008 में गिरफ्तार हुए थे तीन लोग और विवादों में आ गई संस्था

2007 में एक नाटक ‘आम्ही पचपुते’ के विरोध में मुंबई के उपनगरों में देसी बम रखने के आरोप में महाराष्ट्र एटीएस ने सनातन संस्था के छह लोगों पर केस दर्ज किया था. 2008 में एटीएस ने छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया. इन लोगों पर आरोप था कि इन्होंने थाणे और वासी के ऑडिटोरियम के साथ ही पनवेल के एक थियेटर में फिल्म जोधा अकबर दिखाने के विरोध में देसी बम रखे थे. इसके बाद से ही ये संस्था विवादों में आ गई थी. जब अदालत में ये केस चला, तो अदालत ने दो लोगों रमेश गडकरी और विक्रम भावे को बम रखने का दोषी पाया और दोनों को 10-10 साल की सजा दी. हालांकि कोर्ट ने रमेश गडकरी और विक्रम भावे को Unlawful Activities (Prevention) Act से बरी कर दिया गया था. महाराष्ट्र सरकार की ओर से इसके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की गई, जो अब भी लंबित है. इसके बाद इस संस्था पर बैन लगाने की मांग होने लगी, लेकिन 2 दिसंबर 2015 को गृह राज्य मंत्री किरन रिजीजू ने राज्यसभा में कहा था कि सनातन संस्था पर बैन लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है. वहीं हाई कोर्ट से 2 मई 2013 को रमेश गडकरी और विक्रम भावे को जमानत मिल गई थी.

2009 में गोवा धमाके में मर गए थे दो लोग

गोवा में हुए बम धमाके में सनातन संस्था के दो लोगों की मौत हो गई थी.
गोवा में हुए बम धमाके में सनातन संस्था के दो लोगों की मौत हो गई थी.

2009 में गोवा के मडगांव में दीपावली से एक दिन पहले नरक चतुर्दशी के मौके पर निकलने वाली नरकासुर यात्रा में एक स्कूटर बम धमाके में दो सवारों की मौत हो गई. इस धमाके में तीन गाड़ियां जल गई थीं. पुलिस ने कहा था कि मालगोंडा पाटिल और योगेश नाइक स्कूटर पर बम लगाने वाले थे लेकिन वह अचानक फट पड़ा और दोनों मारे गए. एनआईए ने इस मामले में 11 लोगों के खिलाफ 4000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी. इनमें से एनआईए ने धनंजय अष्टेकर, दिलीप मंगांवकर, विनायक पाटिल और विनय तालेकर को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि पांच लोग फरार थे. इनमें संदीप अरोलकर और रुद्रा पाटिल के नाम थे.रुद्रा पाटिल के खिलाफ एनआईए ने रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया था. वहीं चार्जशीट में मरने वाले मालगोंडा पाटिल और योगेश नाइक के भी नाम शामिल थे.

नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में भी सामने आया नाम

सीबीआई ने वीरेंद्र सिंह तावड़े को नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया था.

पुणे में अंधविश्वासों के खिलाफ लगातार लिखने वाले नरेंद्र दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में भी सनातन संस्था का नाम सामने आया था. जून 2016 में सीबीआई ने वीरेंद्र सिंह तावड़े को इस हत्याकांड में गिरफ्तार किया था. वीरेंद्र सिंह तावड़े हिंदू जनजागृति समिति से जुड़ा हुआ था. हिंदू जनजागृति समिति सनातन संस्था का ही एक अंग है. सीबीआई अब भी इस हत्याकांड की जांच कर रही है.

पानसारे हत्याकांड में भी सनात संस्था की भूमिका

गोविंद पानसारे की हत्या में भी गठित एसआईटी ने सनातन संस्था का नाम लिया था.

मुंबई के सीपीआई नेता गोविंद पानसारे को 16 जनवरी 2015 को गोली मारी गई थी. इलाज के दौरान 20 जनवरी 2015 को उनकी मौत हो गई थी. इस मामले में भी गठित एसआईटी ने सनातन संस्था पर शक जताया था और संस्था के एक कार्यकर्ता समीर विष्णु गायकवाड़ को गिरफ्तार किया था. समीर गायकवाड़ सनातन संस्था की ओर से छापी गई किताबों को बांटता था.

कलबुर्गी और गौरी लंकेश हत्याकांड

गौरी लंकेश और कलबुर्गी की हत्या में भी सनातन संस्था का ही नाम सामने आया था.
गौरी लंकेश और कलबुर्गी की हत्या में भी सनातन संस्था का ही नाम सामने आया था.

कन्नड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और हिंदू धर्म में फैले अंधविश्वासों के खिलाफ खुलकर लिखने वाले एमएम कलबुर्गी की 30 अगस्त 2015 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में भी सनातन संस्था का नाम सामने आया था. वहीं पांच सितंबर 2016 को पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के मामले में भी सनातन संस्था के पांच लोगों का नाम सामने आया था. इनमें से भी चार वो लोग थे, जिनका नाम गोवा में हुए धमाके में शामिल था और उनके खिलाफ एनआईए ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था.


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