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CBSE के बाद अब UP ने भी परीक्षाएं रद्द कर दीं, NIOS बोर्ड अपने छात्रों की ये मांग क्यों नहीं सुन रहा?

कोरोना के खतरे को देखते हुए ने CBSE हाल ही में 12वीं के बोर्ड एग्जाम कैंसिल कर चुका है. 1 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में ये फैसला लिया गया था. CBSE जिस रास्ते चलता है, उसी ओर दूसरे बोर्ड भी चलते हैं. CBSE का फैसला आने के बाद CISCE ने एग्जाम रद्द कर दिए.

गुरुवार 3 जून को यूपी बोर्ड ने भी 12वीं की परीक्षाएं कैंसल कर दीं. तय हुआ कि यूपी बोर्ड के 12वीं के छात्रों को प्री-बोर्ड परीक्षा और 11वीं के मार्क्स के आधार पर प्रमोशन दिया जाएगा. अगर प्री-बोर्ड नहीं दिया होगा तो 11वीं और 10वीं के मार्क्स के आधार पर सामान्य प्रमोशन होगा. स्टूडेंट चाहे तो अगले साल एग्जाम दे सकेगा. राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, हरियाणा आदि राज्यों पहले ही अपने यहां की परीक्षाएं रद्द कर चुके हैं. कई और  राज्य इसकी तैयारी में है.

लेकिन इतना सब होने के बाद सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड अब भी चल रहा है-  #CancelAllBoardExams.

अब परीक्षा रद्द करने की मांग कौन कर रहा?

दरअसल, ट्विटर पर ये हैशटैग चलाने वाले लोग NIOS यानी राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय संस्थान के छात्र हैं. जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है NIOS ओपन लर्निंग का माध्यम है. यानी कि यहां वो छात्र पढ़ते हैं, जो रेगुलर स्कूल नहीं जा सकते. प्राइवेट मोड में पढ़ाई करना चाहते हैं. NIOS की परीक्षा पास करके छात्र बाकी बोर्ड्स के छात्रों की ही तरह आगे की पढ़ाई कर सकते हैं. हायर एजुकेशन में एडमिशन ले सकते हैं.

इस साल NIOS की परीक्षा जून में होने वाली थी. कोरोना की स्थिति को देखते हुए इसे स्थगित कर दिया गया है. परीक्षाओं की अगली तारीख के बारे में कहा गया कि स्थिति की समीक्षा करके बताया जाएगा.

अब जब CBSE और दूसरे बोर्ड्स परीक्षा कैंसिल कर चुके हैं, तब NIOS के छात्र भी ऐसी ही मांग कर रहे हैं. अक्षत भी इन्हीं छात्रों में से एक हैं. अक्षत एक बार CBSE से 12वीं की परीक्षा पास कर चुके हैं. इसके बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए बाहर चले गए थे. लेकिन कोरोना की वजह से वापस लौटना पड़ा. अक्षत ने स्ट्रीम चेंज करने का फैसला किया, और NIOS में एडमिशन लिया. दी लल्लनटॉप से बात करते हुए अक्षत कहते हैं,

अप्रैल में एग्जाम होना था लेकिन टल गया. अब आगे क्या होगा, नहीं पता. पूछने पर कहते हैं कि जब तक ऑफिशियल डिसिजन नहीं आ जाता, तब तक वेट करो. CBSE और दूसरे बोर्ड्स में एग्जाम देने वाले एक ही एज ग्रुप के होते हैं. लेकिन NIOS की बात अलग है. यहां परीक्षा देने वालों में बच्चे भी होते हैं, बड़े भी होते हैं. काफी सारे बुजुर्ग भी होते हैं. ऐसे लोग जिनकी पढ़ाई छूट गई थी, या जो पहले नहीं पढ़ पाए थे लेकिन अब पढ़ना चाहते हैं, वो भी इसका हिस्सा हैं. इसलिए मुझे लगता है कि NIOS को ज्यादा जिम्मेदार होना चाहिए.

चूंकि NIOS में पढ़ाई के लिए रेगुलर स्कूल नहीं जाना पड़ता, इसलिए इसमें काफी सारे ऐसे लोग भी एडमिशन लेते हैं जो रोज स्कूल नहीं जा सकते. अगर हाल फिलहाल एग्जाम होते हैं तो कोरोना काल में स्टूडेंट्स परीक्षा कैसे देंगे, ये एक बड़ा सवाल है. दी लल्लनटॉप से बात करते हुए ऐसे ही एक बच्चे की अभिभावक सुमिता दत्ता कहती हैं,

इस समय ओवरऑल यूनिफॉर्म डिसिजन की जरूरत है. बच्चे चाहे CBSE के हों या दूसरे बोर्ड के, खतरा सबके लिए है. कोरोना की दूसरी लहर में हमने देखा है कि किस तरह अच्छे खासे स्वस्थ युवा भी इसके शिकार हुए हैं.

मेरा जो बच्चा है, उसे स्पेशल नीड्स है. उसे एग्जाम के लिए एक राइटर की जरूरत होती है. जो इस समय अवेलबल है नहीं. मास्क वो इतनी देर तक पहन नहीं सकता. ये उसके लिए काफी खतरनाक है.अभी एग्जाम को लेकर काफी कन्फ्यूजन है. इसकी वजह से बच्चे को भी काफी एन्जाइटी हो रही है. NIOS अभी कुछ बता नहीं रहा है.

NIOS में दूर-दराज के इलाकों से स्टूडेंट ज्यादा आते हैं. चाहे वो कभी स्कूल गए हों या न गए हों, लेकिन उन्हें पढ़ाई करनी है. इसी तरह से काफी संख्या में दिव्यांग बच्चे भी होते हैं. कोई उनके बारे में सोच ही नहीं रहा है.

एक तरफ जहां दूसरे बोर्ड परीक्षा कराने या न कराने को लेकर फैसले कर रहे हैं, वहीं NIOS की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. जिसकी वजह से छात्रों में नाराजगी भी है. क्योंकि फैसला लेने में जितनी देरी होगी, छात्रों के लिए उतनी ही दिक्कत बढ़ेगी. अक्षत कहते हैं,

अभी CBSE ने एग्जाम कैंसिल कर दिए हैं. लेकिन अगर वो एग्जाम करवाता तो उसके एग्जाम खत्म होने के एक-डेढ़ महीने बाद हमारे एग्जाम शुरू होते. यानी कि हम एक-डेढ़ महीने पीछे चले जाते. जब तक हमारे एग्जाम होते हैं, यूनिवर्सिटी-कॉलेज में एडमिशन प्रोसेस भी खत्म हो जाता है. हम चाहते हैं कि CBSE की तरह NIOS भी जल्दी फैसला ले, ताकि आगे की पढ़ाई के लिए स्टूडेंट्स को एडमिशन लेने में आसानी हो. 

सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका

परीक्षाओं को रद्द करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई है. यह याचिका चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट अनुभा श्रीवास्तव और 7 अन्य लोगों ने 47 छात्रों की ओर से दायर की है. याचिका में राज्य बोर्ड और NIOS की 12वीं कक्षा की ऑफलाइन परीक्षाओं को रद्द करने की मांग की गई है. रिजल्ट तैयार करने पर निर्णय लेने के लिए एक समिति के गठन की मांग भी की गई है. कहा गया है कि पिछले साल की तरह यूजीसी को छात्रों के मूल्यांकन का फॉर्मूला तय करने के लिए समिति गठित करने का निर्देश दिया जाए.

परीक्षा कराने या न कराने को लेकर NIOS का क्या प्लान है, ये जानने के लिए हमने उनसे संपर्क करने की कोशिश की. उन तक अपने सवाल भी पहुंचाए. लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी. उनकी तरफ से जवाब आने पर हम आप तक जरूर पहुंचाएंगे.


रंगरूट. दी लल्लनटॉप की एक नई पहल. जहां पर बात होगी नौजवानों की. उनकी पढ़ाई लिखाई और कॉलेज यूनिवर्सिटी कैंपस से जुड़े मुद्दों की. हम बात करेंगे नौकरियों, प्लेसमेंट और करियर की. अगर आपके पास भी ऐसा कोई मुद्दा है तो उसे भेजिए हमारे पास. हमारा पता है rangroot@lallantop.com.


 वीडियो: बोर्ड परीक्षा रद्द होने के बाद इस तरह होगा विश्वविद्यालयों में एडमिशन

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