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तालिबान ने क्या वाकई पंजशीर का 'किला' फतह कर लिया है?

15 अगस्त को तालिबान (Taliban) के काबुल के कब्जे के बाद अफगानिस्तान (Afghanistan) का सिर्फ एक इलाका उनके कब्जे से बाहर था. ये इलाका था पंजशीर (Panjshir). पंजशीर में तालिबान के खिलाफ नॉर्दन एलायंस के नेता अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद ने झंडा उठा रखा था. अब खबरें हैं कि अहमद मसूद ने भी तालिबान से बातचीत का प्रस्ताव मंजूर कर लिया है. इधर तालिबान ने दावा किया है कि उसने पंजशीर पर कब्जा कर लिया है और रेजिस्टेंस फोर्स के चीफ कमांडर सालेह मोहम्मद को भी मार गिराया है. हालांकि विद्रोही गुट तालिबान के इस दावे का खंडन कर रहे हैं.

तालिबान बोला, पंजशीर जीत लिया

पंजशीर में तालिबान के खिलाफ नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट ऑफ अफगानिस्तान (NRFA) लड़ रही थी. इसके मुखिया हैं अहमद मसूद. मसूद ने फेसबुक पेज पर तालिबान से बातचीत करके युद्ध खत्म करने के प्रस्ताव की जानकारी दी. इससे पहले तालिबान ने दावा किया था कि उसने पंजशीर राज्य की राजधानी में प्रवेश कर लिया है और आसपास के इलाके जीत लिए हैं. तालिबान के प्रवक्ता बिलाल किरमानी ने 5 सितंबर को कहा कि तालिबान ने राज्य की राजधानी बजारक में घुसकर भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद पर कब्जा कर लिया है. 6 सितंबर की सुबह तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया कि

” दुश्मन सेना के मजबूत गढ़ पंजशीर प्रांत को पूरी तरह से जीत लिया गया है.”

हालांकि अफगान के उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह के करीबी ने आजतक से बातचीत में तालिबान के दावे को झूठा करार दिया है. उनका दावा है कि रेजिस्टेंस फोर्स पहाड़ियों से पंजशीर का रक्षा कर रही है.

इससे पहले, अहमद मसूद ने 5 सितंबर को अपने फेसबुक पेज पर लिखा-

“NRFA सैद्धांतिक तौर पर समस्या को हल करने के लिए राजी है और फौरन युद्ध बंद करके बातचीत को जारी रखेगी. शांति के लिए NRFA युद्ध रोकने को राजी है लेकिन शर्त ये है कि तालिबान भी पंजशीर और अंदरब में चल रहे हमलों को बंद करेगा.”

मसूद ने कहा कि इस बारे में धार्मिक विद्वानों की उलेमा परिषद के साथ सभी पक्षों की एक बड़ी सभा हो सकती है. इससे पहले, अफगान मीडिया में बताया गया कि धार्मिक विद्वानों ने तालिबान से पंजशीर में लड़ाई को खत्म करने के लिए एक समझौता स्वीकार करने का आह्वान किया है. लेकिन उस पर तालिबान की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई.

पंजशीर रेजिस्टेंस के कई बड़े नेता मारे गए

NRFA ने 5 सितंबर को अपने मुख्य प्रवक्ता फहीम दश्ती के मारे जाने की खबर की पुष्टि की थी. दश्ती अहमद मसूद के पिता अहमद शाह मसूद के करीबी थे और 9 सितंबर 2001 में हुए आत्मघाती हमले में बाल-बाल बच गए थे. इस हमले में अहमद शाह मसूद मारे गए थे. अहमद शाह मसूद की हत्या के 2 दिन बाद यानी 11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर आतंकवादी हमले हुए थे. फहीम दश्ती के जरिए ही पंजशीर से सारी जानकारी मीडिया को मिलती थी. फहीम दश्ती के अलावा गुल हैदर खान, मुनीब अमीरी और अहमद शाह मसूद का भतीजा वादूद के भी मारे जाने की खबरें हैं. तालिबान ने ये दावा भी किया है कि उसने रेजिस्टेंस फोर्स के चीफ कमांडर सालेह मोहम्मद को भी मार गिराया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खुद को अफगानिस्तान का कार्यकारी राष्ट्रपति घोषित करने वाले अमरुल्लाह सालेह के घर पर भी बमबारी हुई है. लेकिन वह किसी अज्ञात जगह पर चले गए हैं.

अहमद मसूद ने रेगुलर अफगान सेना और स्पेशल यूनिट्स के साथ-साथ स्थानीय लड़ाकों के साथ एक सेना बनाई है. इसने एक हफ्ते पहले तालिबान के साथ बातचीत के जरिए समझौता करने का आह्वान किया था. हालांकि वार्ता के कई प्रयास हुए, लेकिन कोई भी सफल नहीं रहा. दोनों ही पक्ष एक दूसरे को दोषी ठहरा रहे थे. इसके बाद से रेजिस्टेंस और तालिबान के बीच पंजशीर में तगड़ा युद्ध चल रहा था.

तालिबान को मिला पाकिस्तान का साथ?

तालिबान को पंजशीर के मोर्चे पर पाकिस्तान से भी मदद मिल रही है, ऐसी खबरे हैं. पंजशीर में पाकिस्तानी एयरफोर्स के ड्रोन से हमले किए जाने के भी दावे सामने आए हैं. अफगानिस्तान के सामंगन प्रांत से पूर्व सांसद जिया अरियनजादो ने दावा किया,

“पंजशीर पर पाकिस्तानी वायुसेना ने ड्रोन की मदद से बमबारी की है. इसमें स्मार्ट बमों का इस्तेमाल किया गया है.”

तालिबान और रेजिस्टेंस फ्रंट पंजशीर को लेकर अपने-अपने दावे करते रहे हैं. इससे पहले अफगानिस्तान की अशरफ गनी सरकार में उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने संयुक्त राष्ट्र (UN) को चिट्ठी लिखी थी. इसमें कहा था कि पंजशीर में तालिबान ने जरूरी सामान की सप्लाई रोक दी है, जिससे अमानवीय संकट पैदा हो गया है. उन्होंने पंजशीर में तालिबान के हाथों नरसंहार का खतरा भी जताया था.


वीडियो – दुनियादारी: तालिबान को पंजशीर घाटी में हरा पाएगा नॉर्दन एलायंस?

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