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जिस AAP MLA की गिरफ्तारी पर केजरीवाल ने PM पर 'इमरजेंसी' लगाने के आरोप लगाए थे, वो बरी हुए

दिल्ली के संगम विहार इलाके के विधायक हैं दिनेश मोहनिया. आम आदमी पार्टी (AAP) के हैं. साल 2016 में यौन शोषण और उत्पीड़न का आरोप लगा था. चार साल बाद अब दिल्ली के एक कोर्ट ने दिनेश को इस मामले से बरी कर दिया. कोर्ट ने मोहनिया को बेनेफिट ऑफ डाउट देते हुए बरी किया है. 16 मार्च (सोमवार) को एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिट्रन मजिस्ट्रेट विशाल पहुजा ने फैसला सुनाया. 20,000 रुपए के बेल बॉन्ड पर बरी किया.

मोहनिया वही विधायक हैं, जिनकी गिरफ्तारी के बाद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने पीएम नरेंद्र मोदी के ऊपर दिल्ली में ‘इमरजेंसी’ लगाने के आरोप लगाए थे. दरअसल, मोहनिया को पुलिस ने बीच प्रेस कॉन्फ्रेंस से गिरफ्तार किया था.

अब वापस कोर्ट के फैसले पर आते हैं. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा,

‘इस केस में मुख्य गवाहों के बयानों में तथ्यात्मक विसंगतियां और विरोधाभास देखने को मिला. इसके अलावा शिकायतकर्ता की शिकायत को किसी भी स्वतंत्र पब्लिक विटनेस ने सपोर्ट नहीं किया, जिससे संदेह पैदा हुआ. इसलिए आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ सफलतापूर्वक केस नहीं बन सका. ऐसे में सभी आरोपी व्यक्ति संदेह का लाभ दिए जाने के हकदार हैं.’

इस केस में दिनेश मोहनिया के साथ दो अन्य व्यक्ति सतीश और सुभाष शुक्ला पर भी आरोप लगे थे, इन्हीं भी कोर्ट ने बरी कर दिया.

क्या हुआ था चार साल पहले?

23 जून, 2016 के दिन दिनेश मोहनिया के खिलाफ कुछ महिलाओं ने यौन शोषण और उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करवाई थी. मोहनिया उस वक्त दिल्ली जल बोर्ड के वाइस-चेयरमैन थे. महिलाओं ने शिकायत में कहा था कि बीती शाम वो इलाके में चल रही पानी की दिक्कत को लेकर मोहनिया के ऑफिस गई थीं, जहां आप विधायक और समर्थकों ने उनका उत्पीड़न किया.

पुलिस ने IPC की धारा 323 (जानबूझकर नुकसान पहुंचाना), 506 (आपराधिक धमकी), 509 (किसी शब्द, किसी हरकत या बर्ताव से किसी महिला का अपमान करना), 354 (महिला के साथ मारपीट या आपराधिक बल का प्रयोग कर उसे अपमानित करना), 354-ए (यौन शोषण) और 354-बी (हमला करने के इरादे से महिला के ऊपर आपराधिक बल का प्रयोग करना) के तहत मोहनिया के खिलाफ केस दर्ज किया था.

Aap Mla Dinesh Mohaniya
दिनेश मोहनिया को गिरफ्तार करती पुलिस. तस्वीर जून 2016 की है. फोटो- ट्विटर.

केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने मोहनिया को नोटिस भेजा था, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया, जिसके बाद पुलिस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बीच से मोहनिया को गिरफ्तार किया था.

25 जून, 2016 की दोपहर मोहनिया अपने ऑफिस में रिपोर्टर्स से बात कर रहे थे, उसी बीच पुलिस वहां पहुंची और आप विधायक को गिरफ्तार करके ले गई. काफी ड्रामा हुआ था उस वक्त. तस्वीरें सामने आई थीं, जिनमें पुलिस मोहनिया को जबरन पकड़कर ले जाते दिख रही थी. हालांकि, गिरफ्तारी के चार दिन बाद उन्हें ज़मानत भी मिल गई थी.


वीडियो देखें: NRC NPR पर अरविंद केजरीवाल ने बड़ा सवाल किया तो अखिलेश यादव ने किया बड़ा दावा

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