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दिल्ली विधानसभा भवन के अंदर मिली अंग्रेजों के जमाने की सुरंग, इस काम में होता था इस्तेमाल

दिल्ली विधानसभा के भीतर एक सुरंग मिली है. कर्मचारियों को एक चैंबर सा बना हुआ दिखा था. उसका ढक्कन खोला गया तो भीतर एक लंबी सुरंग थी. बताया जा रहा है कि इसका दूसरा सिरा लाल किले पर निकलता है. इस सुरंग का इस्तेमाल अंग्रेज़ों के समय भी होता था. दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष राम निवास गोयल ने इसके बारे में जानकारियां दी हैं.

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने कहा –

“ये गुफा विधानसभा और लाल किले को जोड़ती है. इसके इतिहास पर अभी पूरी तरह स्पष्टता नहीं है लेकिन इस सुरंग का इस्तेमाल अंग्रेज़ों द्वारा किया जाता था. इसके ज़रिये वो स्वतंत्रता सेनानियों को एक से दूसरी जगह ले जाते थे, ताकि उन्हें किसी रुकावट या कार्रवाई का सामना न करना पड़े.”

उन्होंने कहा कि अनुमान है कि या तो अंग्रेजों ने ही ये सुरंग बनवाई होगी या उनसे भी पहले किसी शासक ने. मुमकिन है कि इस गुफा को आगे चलकर आम जनता के लिए भी खोला जाए. इस संबंध में राम निवास गोयल ने कहा –

“हमने गुफा का एक सिरा खोल लिया है, लेकिन फिलहाल इसे और अधिक खोदा नहीं जाएगा. हम जल्द ही इसकी मरम्मत कराएंगे और इसे जनता के लिए खोलेंगे. उम्मीद है कि ये काम अगली 15 अगस्त तक हो जाएगा.”

सुरंग को और ज़्यादा न खोदने की वजह के बारे में उन्होंने बताया कि इसका काफी हिस्सा मेट्रो प्रोजेक्ट्स और सीवर कार्यों की वजह से पहले ही डैमेज हो चुका है इसलिए और खोदना ठीक नहीं होगा.

अभी क्यों खोली गई सुरंग?

विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि सुरंग के बारे में वह 1993 से सुनते आए हैं, जब वो विधायक बनकर इस विधानसभा में आए थे. उस वक्त उन्होंने इसका इतिहास खंगालने की कोशिश की थी, लेकिन कुछ ठोस नहीं मिला था. अब जब आज़ादी के 75 बरस पूरे हुए हैं तो उन्होंने इसे खुलवाने के बारे में सोचा.

Delhi Tunnel

सुरंग की भीतर की तस्वीर. इसका अधिकतर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है.

अंग्रेज़ों के समय यहां क्या था?

जहां ये सुरंग मिली है, उसकी जगह पर दिल्ली का मौजूदा विधानसभा भवन है. लेकिन जब अंग्रेज़ों का शासन था, तब यहां क्या था? इसका जवाब भी राम निवास गोयल ने दिया. कहा –

“1912 में जब देश की राजधानी को कोलकाता से दिल्ली शिफ्ट किया गया था तो इस जगह का इस्तेमाल केंद्रीय विधानसभा के तौर पर होता था. भारतीय नेता यहां बैठते थे. कुल 58 लोग यहां बैठते थे, जिनमें अधिकतर ब्रिटिश थे. 1926 में अंग्रेज़ों ने इसका न्यायालय के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. सुरंग के जरिये क्रांतिकारियों को लाल किले से न्यायालय तक लाया जाता था.”

Delhi Assembly
दिल्ली का विधानसभा भवन, जिसके अंदर सुरंग मिली है.

ऊपर हमने केंद्रीय विधानसभा शब्द का इस्तेमाल किया है. आसान शब्दों में इसे उस वक्त का निम्न सदन यानी उस वक्त की लोकसभा कह सकते हैं. अंग्रेज़ों के देश से जाने के बाद इसे भंग कर दिया गया और फिर संसद का वो स्वरूप सामने आया, जो आज हम देखते हैं. यानी लोकसभा और राज्यसभा.

राम निवास गोयल ने ये भी बताया कि दिल्ली विधानसभा परिसर में ही एक कमरा है, जिसके बारे में कहा जाता रहा है कि ये अंग्रेज़ों के समय फांसी घर हुआ करता था. अब इसे ‘क्रांतिकारियों के मंदिर’ के तौर पर विकसित किया जाएगा. आगे का काम PWD संभालेगी.

पाकिस्तान में भी मिली थी सुरंग

अक्टूबर 2020 में पाकिस्तान में भी एक ऐसी ही सुरंग मिली थी. वहां के प्रांत ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में अयूबिया नेशनल पार्क में, जो काफी आश्चर्य का केंद्र रही थी. जांच-परख़ के बाद पता चला था कि वो सुरंग भी अंग्रेज़ों के समय की थी, जो अब तक दबी हुई थी. सुरंग करीब 129 साल पुरानी बताई गई थी, जब अविभाजित भारत पर अंग्रेज़ों का शासन था.


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