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पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़प के बीच बेचारा JCB ऑपरेटर फंसकर मारा गया

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कुछ लोगों का मानना है कि दो पक्षों की लड़ाई में तीसरे पक्ष को किनारे रहना चाहिए.

कुछ का मानना है कि तीसरा पक्ष ज़रूरी है. लड़ाई शांत करने में काम आता है.

लेकिन उन हालातों का क्या जब कोई तीसरा पक्ष न हो, और उसे दो पक्षों की लड़ाई का शिकार होना पड़े. अपना काम करने की क़ीमत जान देकर चुकानी पड़े? राजस्थान के नागौर में ऐसा ही हुआ है जहां पुलिस और ग्रामीणों के आपसी विवाद में JCB ड्राइवर की मौत हो गई.

# मामला-

25 अगस्त को राजस्थान के नागौर जिले की पुलिस हाई कोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने पहुंची थी. सदर थाने के तहत आने वाले ताऊसर गांव में. इस गांव की सार्वजनिक भूमि पर बंजारा समुदाय का अवैध क़ब्जा था. क़रीब 15-20 साल पहले बंजारा समुदाय यहां रहने लगा था. पहले कच्चे मक़ान थे. फिर  धीरे-धीरे गांव की सार्वजनिक भूमि पर इन्होंने पक्के मकान बना लिए.

ताऊसर के ग्रामीणों को इस बात से ऐतराज़ था. जब मामला हाई कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने आदेश दिया कि ये अवैध कब्ज़ा हटाया जाए. 25 अगस्त को दोपहर क़रीब 12 बजे पुलिस ने कार्रवाई शुरू की. पुलिस अपने साथ ‘बैक हो’ मशीन, जिसे आमतौर पर JCB मशीन कहते हैं, लाई थी. जैसे ही JCB ने मक़ान ढहाना शुरू किए, बंजारा बस्ती के बाशिंदों ने पुलिस पर पत्थरों की बौछार करनी शुरू कर दी.

कार्रवाई करता प्रशासन.
कार्रवाई करता प्रशासन.

पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने थे. लेकिन बीच में फंस गया JCB का ड्राइवर. जब पत्थरबाजी हुई तो पुलिस पीछे हटी. लेकिन JCB ड्राइवर प्रदर्शनकारियों के बीच ही फंसा रह गया. बंजारा समुदाय की नाराज़गी की एक और बड़ी वजह बनी बस्ती में बना माता का मंदिर, जिसे ढहा दिया गया. इसी के बाद भीड़ ज्यादा उग्र हुई थी.

JCB ड्राइवर गंभीर रूप से ज़ख़्मी हो गया. बाद में उसे JLN अस्पताल ले जाया गया लेकिन JCB ड्राइवर की जान न बचाई जा सकी.

पूरी कार्रवाई में सिर्फ पुलिस पक्ष का ही नुकसान नहीं हुआ है. बंजारा समुदाय की भी एक बुजुर्ग महिला की मौत हुई बताई जा रही है और इसका कारण घबराहट कहा जा रहा है.

# प्रशासन का पक्ष-

प्रशासन के अनुसार ये पूरी कार्रवाई हाई कोर्ट के दोबारा आदेश के बाद हुई है. नागौर के कलेक्टर दिनेश कुमार यादव ने कहा-

हाई कोर्ट ने कार्रवाई पूरी करने के लिए 15 अगस्त की तारीख़ तय की थी. अगर प्रशासन कार्रवाई नहीं करता तो जिला प्रशासन पर अवमानना का मुकदमा चलता. और ऐसा ही हुआ. 19 अगस्त को जिला प्रशासन हाई कोर्ट के सामने पेश हुआ. जहां कोर्ट ने फटकार लगाई. और जल्दी से जल्दी बस्ती हटाने के निर्देश दिए.

नागौर के कलेक्टर दिनेश कुमार यादव.
नागौर के कलेक्टर दिनेश कुमार यादव.

इससे पहले ताऊसर गांव के लोग बंजारा बस्ती को हटाने के लिए हाई कोर्ट गए थे. उनके पक्ष में ही हाई कोर्ट का फैसला आया था. इसके ख़िलाफ़ बंजारा समुदाय ने भी हाई कोर्ट में अपील की थी. कहा था कि वो खुद इस जगह को ख़ाली कर देंगे. बस, उन्हें रहने के लिए कहीं और जगह मुहैया करवा दी जाए. लेकिन हाई कोर्ट ने बंजारा समुदाय की याचिका ख़ारिज कर दी. बंजारा समुदाय सुप्रीम कोर्ट गया. वहां भी नतीजा सिफर ही रहा. नतीजतन, 25 अगस्त को प्रशासन बंजारा बस्ती को ढहाने के लिए पहुंचा था.

# और फिर राजनीति हुई-

बस्ती ढहाने के विरोध में भाजपा की सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के दो विधायक मौके पर पहुंच गए. कुछ घंटों बाद नागौर के सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के मुखिया हनुमान बेनीवाल भी पहुंच गए. काफी देर तक वहां मौजूद रहे. बाद में JLN अस्पताल पहुंचे और घायलों का हालचाल जाना. फिर प्रशासन पर अनैतिक कार्रवाई करने का आरोप लगाया. हनुमान बेनीवाल ने कहा है कि वो अपने समर्थकों के साथ 26 अगस्त को कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन करेंगे.

वहीं कलेक्टर दिनेश कुमार यादव ने कहा कि राजनीति करने वाले कुछ तत्वों ने बंजारा समुदाय को भड़काया है. जब बंजारा बस्ती के लोगों ने पुलिस पर पथराव किया तो उसकी चपेट में JCB ऑपरेटर आ गया. हम तो कोशिश कर रहे थे कि वहां रह रहे लोगों को कम से कम नुकसान हो और कोर्ट के आदेश का भी पालन हो जाए. लेकिन कुछ राजनीतिक तत्वों की वजह से ये अनावश्यक स्थिति पैदा हो गई.

हाथ में मूर्ति पकड़े खड़े सांसद हनुमान बेनीवाल.
हाथ में मूर्ति पकड़े खड़े सांसद हनुमान बेनीवाल.

कुल मिलाकर इस मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है. विपक्षी भाजपा और साथी पार्टियां अशोक गहलोत सरकार को घेरने में लगी हुई हैं. अब गहलोत सरकार कैसे तनाव को कम करती है, ये देखना होगा?


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