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बसपा से निकाले गए विधायक अखिलेश यादव से मिले, जानिए यूपी में क्या खेल होने जा रहा

यूपी विधानसभा चुनाव अब बहुत दूर नहीं है. सभी प्रमुख पार्टियां अपनी ओर से हर दांव आजमाना शुरू कर चुकी हैं. अखिलेश यादव ने 15 जून को दिए अपने इंटरव्यू में कहा था कि उनकी पार्टी यूपी विधानसभा चुनाव में बसपा या कांग्रेस किसी से गठबंधन नहीं करेगी, और थोड़ी देर में बसपा से नेता सपा के पाले में आते दिखाई देने लगे. ख़बरों की मानें तो मायावती की पार्टी यानी बसपा से निष्कासित 11 में से 6 विधायकों ने समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात कर ली है. कयास लगाए जा रहे हैं कि सभी निष्कासित विधायक जल्द ही सपा का हाथ थाम सकते हैं.

दैनिक भास्कर की ख़बर के मुताबिक़, 15 जून को जिन 6 विधायकों ने लखनऊ में मौजूद सपा ऑफिस में अखिलेश यादव से मुलाकात की वो हैं असलम राइनी (भिनगा), असलम अली चौधरी (ढोलाना), मुजतबा सिद्दीकी (प्रतापपुर), हाकिम लाल बिंद (हांडिया), हरगोविंद भार्गव (सिधौली) और सुषमा पटेल (मुंगरा). ये विधायक मुलाक़ात के बाद पीछे के गेट से बाहर निकले. इसके अलावा निष्कासित विधायकों में, वंदना सिंह (सगड़ी), रामवीर उपाध्याय (सादाबाद), अनिल सिंह (उन्नाव) और हाल ही में बाहर किए गए लालजी वर्मा (कटेहरी) व रामअचल राजभर (अकबरपुर) शामिल हैं.

इससे पहले अखिलेश यादव साफ कह चुके हैं कि उन्हें बसपा या कांग्रेस जैसी पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फ़ायदा नहीं हुआ, लिहाज़ा छोटी पार्टियों के साथ मोर्चा बनाकर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया. उन्होंने जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोकदल और महान दल जैसी पार्टियों का उदाहरण देते हुए कहा था कि सपा अब कांग्रेस या बसपा के बजाय ऐसी पार्टियों को अपने साथ जोड़ेगी. गौरतलब है कि सपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा के साथ गठबंधन किया था और उससे पहले 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के साथ हाथ मिलाया था.

ऐसा माना जा रहा है कि 2021 में फरवरी-मार्च के महीने में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं. साल 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में 403 में से 312 सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी. सपा के खाते में 47, BSP के हिस्से 19 और कांग्रेस के पास 7 सीटें गई थीं. बसपा के 19 में से 11 निष्कासित हो गए, तो बचे कुल 7.

अब निकाले गए विधायक दलबदल कानून के डर से अभी तक किसी और पार्टी का हिस्सा नहीं बने हैं. लेकिन इन पार्टी के नेताओं के पास सपा का हाथ थामने का एक और बाईपास तरीक़ा भी है. और उस बाईपास का हिंट असलम राईनी ने दैनिक जागरण से बातचीत में दे दिया है. उन्होंने कहा है कि सभी 11 निष्कासित विधायक लालजी वर्मा के नेतृत्व में नयी पार्टी का गठन करेंगे. ऐसे में 11 विधायक दलबदल क़ानून के तहत अयोग्य भी नहीं करार दिए जा सकते. और जैसा लखनऊ के पत्रकार बताते हैं कि इस नयी पार्टी के पैंतरे के बाद निष्कासित विधायकों का सपा से गठबंधन करना आसान हो जाएगा.


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