हालिया सालों में प्राइवेसी और यूजर डेटा को लेकर फ़ेसबुक की छवि कुछ अच्छी नहीं रही है. और जब से वॉट्सऐप फ़ेसबुक के कंट्रोल में आया है, तो इस पॉपुलर मैसेजिंग सर्विस पर भी शक की सुइयां घूमती रही हैं. ऐपल ऐप स्टोर के प्राइवेसी लेबल वाला अपडेट आने के बाद तो लोगों ने देखा कि फ़ेसबुक मैसेंजर और वॉट्सऐप अपने यूजर का कितना सारा डेटा जमा करते हैं और उन्हें किस तरह से ट्रैक करते हैं.
ऐसा नहीं है कि ये प्लैट्फॉर्म अपनी डेटा कलेक्शन प्रैक्टिस को छिपा रहे थे. इनकी प्राइवेसी पॉलिसी में तो ये हमेशा से ही लिखा था कि ये क्या-क्या डेटा जमा करते हैं, किसके साथ साझा करते हैं और किस तरह से इस्तेमाल करते हैं. मगर सही बताइए कौन इंसान हर ऐप इंस्टॉल करने से पहले उसके 5000 हजार शब्द के लंबे-लंबे ‘टर्म्स ऑफ़ यूज़’ और ‘प्राइवेसी पॉलिसी’ पढ़ता है? क्या है Apple App Store का Privacy Lable?

ऐपल ऐप स्टोर के प्राइवसी लेबल अभी इंडिया में चालू नहीं हुए हैं. (फ़ोटो: Apple)
ऐपल के प्राइवसी लेबल की मदद से कोई भी iOS यूजर ऐप स्टोर पर पड़े किसी भी ऐप की प्राइवसी डीटेल को एक छोटी सी लिस्ट में देख सकता है. बस ऐप स्टोर खोलिए > जिस ऐप के बारे में जानकारी लेनी है उसे सर्च करिए > ऐप के डिस्क्रिप्शन और रिव्यू वाले हिस्से के नीचे जाइए > “ऐप प्राइवेसी” पर टैप करिए और सारी जानकारी आपके सामने. सरल और आसान तरीके से. अभी ये लेबल इंडिया के ऐप स्टोर में चालू नहीं हुए हैं, इसलिए बिना लोकेशन बदले आपको नज़र नहीं आएंगे. ऐपल प्राइवसी लेबल डेटा को तीन कैटेगरी में रखता है:
Data linked to you: यानी वो डेटा जो आपकी आइडेंटिटी से लिंक किया जाता है. मतलब कि इस डेटा से आपकी पहचान जुड़ जाती है. इसे ऐसे समझिए जैसे स्कूल में हेडमास्टर असेंबली में अनाउन्स कर दे कि फलाना-फलाना रोल नंबर का बच्चा पढ़ाई में बहुत कच्चा है.
Data not linked to you: यानी वो डेटा जो ऐप लेता तो है मगर आपकी आइडेंटिटी से लिंक नहीं करता. यानी कि इस डेटा से आपकी पहचान नहीं होती. इस केस में स्कूल का हेडमास्टर बस इतना कहेगा कि हमारे 500 बच्चों में से 50 बच्चे पढ़ाई में फिसड्डी हैं.
Data used to track you: यानी वो डेटा जो जिसकी मदद से ऐप आपकी ऑनलाइन ऐक्टिविटी को ट्रैक कर रहा है. मतलब कि आप किस वेबसाइट पर गए फ़िर कार्ट में क्या डाला. ये वो बात हो गई कि स्कूल का मास्टर आपके बस्ते में एक GPS ट्रैकर डाल दे और आपके बारे में सारी जानकारी निकाल ले कि स्कूल के बाद आप कहां-कहां जाते हैं और क्या-क्या करते हैं. बाकी मैसेजिंग ऐप कितना डेटा लेते हैं? तो बात अब ये है कि क्या सिर्फ वॉट्सऐप और फ़ेसबुक मैसेंजर जो यूजर डेटा ले रहे हैं वो बहुत ज्यादा है? इसका जवाब तो तब ही मिलेगा जब आप इन्हें बाकी के पॉपुलर मैसेजिंग ऐप से कंपेयर करेंगे. हमने ऐपल के प्राइवेसी लेबल का इस्तेमाल करके WhatsApp और Facebook Messenger के साथ-साथ Signal, Wire, Telegram, Hike और Hangouts की डेटा कलेक्शन प्रैक्टिस देखीं. रिजल्ट आपके सामने हैं:

ऐपल ऐप स्टोर पर Facebook Messenger की ऐप प्राइवेसी.
Facebook Messenger: फ़ेसबुक मैसेंजर आपकी जानकारी का इसका इस्तेमाल थर्ड-पार्टी ऐड्वर्टाइज़िंग, मार्केटिंग, एनालिटिक्स, प्रोडक्ट पर्सनलाइज़ेशन, ऐप फंक्शनैलिटी और बाकी दूसरे कामों के लिए करता है. नीचे लिखी हुई चीज़ों को फ़ेसबुक मैसेंजर आपकी आइडेंटिटी से लिंक करता है, इनमें शामिल हैं:
Purchase History Financial Info Coarse Location Precise Location Physical Address Email Address Name Phone Number Other User Contact Info Contacts Photos or Videos Gameplay Content Other User Content Search History Browsing History User ID Device ID Product Interaction Advertising Data Other Usage Data Crash Data Performance Data Other Diagnostic Data Other Data Types Health Fitness Payment Info Photos or Videos Audio Data Gameplay Content Customer Support Other User Content Search History Sensitive Info iMessage/Message Phone number Search history

ऐपल ऐप स्टोर पर WhatsApp की ऐप प्राइवेसी.
WhatsApp: वॉट्सऐप मैसेंजर से कम जानकारी लेता है मगर फिर भी इसकी लिस्ट बहुत लंबी है. और ये सारा का सारा डेटा आपसे लिंक होता है. इसमें शामिल है:
Device ID User ID Advertising Data Purchase History Payment Info Coarse Location Phone Number Email Address Contacts Product Interaction Crash Data Performance Data Other Diagnostic Data Customer Support Product Interaction Other User Content

ऐपल ऐप स्टोर पर Hike की ऐप प्राइवेसी.
Hike: हाइक एक टाइम पर काफ़ी पॉपुलर था पर इस वक़्त इसे बहुत ही कम लोग इस्तेमाल करते हैं. हाइक की चैट बैकअप पर तो एन्क्रिप्शन है मगर इनकी चैट एंड-टु-इन्क्रिप्टेड नहीं हैं. मतलब कि इनकी चैट इतनी सिक्योर नहीं है इसलिए ये वॉट्सऐप से भी बुरी पोजीशन में है. ये भी अच्छा खासा डेटा यूजर से लिंक करता है, इसमें शामिल है:
Precise Location Phone Number Name Contacts Customer Support Identifiers User ID Device ID Product Interaction Diagnostics Crash Data Other Diagnostic Data Photos or Videos Audio Data
Telegram: वॉट्सऐप, फ़ेसबुक मैसेंजर और हाइक के सामने टेलीग्राम तो समझिए कुछ जानकारी ही नहीं लेता. फ़िर भी ये चार चीज़ों को आपसे लिंक करता है:
Name Phone Number Contacts User ID
Wire: वायर भी टेलीग्राम की ही तरह बस नाम की चीजें यूजर से लिंक करता है. इनमें शामिल हैं:
Email Address Name Phone Number User ID

ऐपल ऐप स्टोर पर Signal की ऐप प्राइवेसी.
Signal: टेक जगत में बड़े लंबे टाइम से सिग्नल की काफ़ी इज़्ज़त रही है. वजह है इसकी प्राइवेसी पॉलिसी. और वॉट्सऐप की नई पॉलिसी के बाद से तो सिग्नल स्टार बन चुका है
. ये ऐसा कोई भी डेटा नहीं लेता जो अपसे लिंक करे. ले दे के बस आपका मोबाइल नंबर लेता है जिससे आपका अकाउंट बनता है और उसे भी ये आपकी आइडेंटिटी से नहीं जोड़ता.
Google Hangouts: फ़ेसबुक और वॉट्सऐप ने ऐप के प्राइवेसी लेबल चालू करने पर जमकर विरोध किया था. न्यूजपेपर में इसके खिलाफ़ बड़े-बड़े ऐड दिए थे. मगर फ़िर भी इन्होंने अपनी ऐप के अपडेट के साथ प्राइवेसी से जुड़ी जानकारी मुहैया कराई थीं. मगर गूगल ने तब से लेकर अब तक अपनी किसी भी ऐप को ऐप स्टोर पर अपडेट नहीं किया है. इसलिए अभी हैंगआउट्स की डेटा कलेक्शन की जानकारी ऐप स्टोर पर नहीं है. इसे सुनकर CID वाले ACP प्रदयुम्न का रिएक्शन कुछ ऐसा होताः

गूगल के ऐप अपडेट रोकने के बाद हमारे मन में भी यही विचार है.
अगर इन सब के बीच आप स्नैपचैट और इंस्टाग्राम के डायरेक्ट मैसेज फीचर के बारे में सोच रहे हैं तो ध्यान रखिए कि ये सिर्फ़ मैसेजिंग ऐप नहीं बल्कि पूरे के पूरे सोशल मीडिया प्लैट्फॉर्म हैं और ये वॉट्सऐप से कहीं ज्यादा डेटा लेते हैं.
























