केरल में एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल को सस्पेंड कर दिया गया. आरोप है कि प्रिंसिपल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट्स किए थे. पोस्ट में उन्होंने मुख्यमंत्री की एक एडिटेड फोटो भी शेयर की थी. नियम कहता है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी राजनीतिक विषयों पर आपत्तिजनक कॉमेंट नहीं कर सकता. न ही किसी पार्टी के लिए प्रचार-प्रसार कर सकता है. ऐसा करना सरकारी सेवा नियमों के खिलाफ माना जाता है.
सीएम का 'मजाक' उड़ाया, केरल में रिटायरमेंट से 3 दिन पहले प्रिंसिपल सस्पेंड
जावद के मुख्यमंत्री के खिलाफ पोस्ट करने की वजह से उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया. इस कार्रवाई के लिए एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (इंटेलिजेंस) ने शिक्षा विभाग से शिकायत की थी. इसके बाद विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से प्रिंसिपल जावद को सस्पेंड कर दिया.


मुख्यमंत्री के खिलाफ पोस्ट करने वाले जावद एस तिरुवनंतपुरम जिले में सरकारी मॉडल बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल में प्रिंसिपल थे. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जावद आने वाले 31 मई 2026 को रिटायर होने वाले थे, लेकिन इसके तीन दिन पहले ही उनके सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से ये कार्रवाई हो गई.
ADGP (इंटेलिजेंस) की शिकायत पर कार्रवाईजावद के मुख्यमंत्री के खिलाफ पोस्ट करने की वजह से उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया. इस कार्रवाई के लिए एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (इंटेलिजेंस) ने शिक्षा विभाग से शिकायत की थी. इसके बाद विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से प्रिंसिपल जावद को सस्पेंड कर दिया. मामले से जुड़े अधिकारियों ने अखबार को जानकारी दी कि ये सस्पेंशन की कार्रवाई प्रिंसिपल के रिटायर होने के ठीक तीन दिन पहले की गई.
जावद पर आरोप है कि उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर मुख्यमंत्री के लिए अपमानजनक और मजाक बनाने वाले पोस्ट किए थे. इससे मुख्यमंत्री के लिए जनता के बीच में भ्रामक और गलत धारणा बनी. कार्रवाई के ऑर्डर में यह भी बताया गया कि ऐसे पोस्ट्स आम जनता को गुमराह कर सकते हैं. साथ ही छात्रों और शिक्षकों के बीच में राजनीतिक विरोधाभास भी पैदा हो सकते है. ऑर्डर में प्रिंसिपल पर आरोप लगाते हुए कहा गया कि बतौर सरकारी कर्मचारी, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस तरह के पोस्ट शेयर करना, जिससे किसी व्यक्ति या सरकार की बदनामी हो, सरकारी सेवा नियमों का घोर उल्लंघन माना जाता है.
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