The Lallantop

ईरान की तरह चीन भी बना रहा अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी, सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा

ये ठिकाने कई तरह के स्ट्रेटेजिक कामों में सपोर्ट की तरह काम आ सकते हैं. इन ठिकानों पर मोबाइल मिसाइल लॉन्चर्स, एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और कमांड-एंड-कंट्रोल जैसी फैसिलिटीज होने की संभावना है.

Advertisement
post-main-image
ईरान की तरह ही चीन भी अडरग्राउंड सिटी तैयार कर रहा है (PHOTO- Vantor, Getty)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • अमेरिका-ईरान संघर्ष में ईरान की 'अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी' ने अमेरिका के हमलों को बायपास कर उसे नुकसान पहुंचाया, जबकि अमेरिका की मिसाइल क्षमता खत्म करने के दावे सही साबित नहीं हुए।
  • ईरान की अंडरग्राउंड मिसाइल सुविधा के कारण अमेरिका के सैटेलाइट इमेजरी और हमले मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाने में असफल रहे, जिससे चीन ने भी इसी रणनीति को अपनाने का निर्णय लिया।
  • चीन ने शिनजियांग और गांसु में अंडरग्राउंड मिलिट्री फैसिलिटी बनाई है, जिससे उसकी सेकेंड स्ट्राइक क्षमता मजबूती पाई है और यह अमेरिका के लिए नई रणनीतिक चुनौती बन रही है।

अमेरिका-ईरान की जंग में ईरानी मिसाइलों ने अमेरिका को खूब नुकसान पहुंचाया. डॉनल्ड ट्रम्प ने तमाम दावे किए कि उन्होंने ईरान की मिसाइल क्षमता को खत्म कर दिया है लेकिन जमीनी हकीकत ऐसी ही नहीं थी. ईरान लगातार उन्हें निशाना बनाता रहा लेकिन क्या वजह है कि सटीक और घातक हथियारों से लैस अमेरिका ईरान के मिसाइल ठिकानों को ढूंढ नहीं पा रहा था. इसका जवाब है ईरान की 'अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी'. अब खबरें हैं कि चीन भी इसी तरह की अंडरग्राउंड फैसिलिटी तैयार कर रहा है ताकि अगर उस पर B-2 बॉम्बर से बंकर बस्टर बम भी गिराए जाएं तो भी उसके हथियार सुरक्षित रहें और समय आने पर जवाबी हमला कर सकें.

Advertisement
Second Strike के लिए तैयार चीन

चीन में बनाई गई अंडरग्राउंड फैसिलिटी पर रॉयटर्स ने एक विस्तृत रिपोर्ट छापी है. रिपोर्ट की मुताबिक चीन, शिनजियांग और गांसु प्रांत में अंडरग्राउंड मिलिट्री फैसिलिटी बना रहा है. यहां चीन की सबसे लंबी दूरी की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का ठिकाना भी है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन ने जमीन की नीचे न सिर्फ मिसाइल, बल्कि अपने न्यूक्लियर हथियार भी रखे हैं. उसने ऐसा इसलिए किया है ताकि 'सेकेंड स्ट्राइक' की क्षमता पर असर न पड़े. मिलिट्री में सेकेंड स्ट्राइक तब की जाती है जब दुश्मन के पहले हमले में सब तबाह हो गया हो. उद्देश्य ये होता है कि जवाबी हमला इतना घातक हो कि दुश्मन वापस से हमला न कर सके.

इस मसले पर फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के न्यूक्लियर इन्फॉर्मेशन प्रोजेक्ट के डायरेक्टर हंस क्रिस्टेंसन ने कहा,

Advertisement

मैंने पहले कभी भी ऐसा कुछ नहीं देखा. यह असाधारण है.

Chinese build up
चीन की बनाई हुई अंडरग्राउंड फैसिलिटी (PHOTO-Vantor)
मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और कमांड; सब जमीन के नीचे

सैटेलाइट इमेजरी के मुताबिक चीन ने शिनजियांग में हामी न्यूक्लियर साइलो फील्ड के पास 80 से ज्यादा कंक्रीट के लॉन्च पैड और ऑक्टागन आकार के तीन बड़े मिलिट्री ठिकाने बनाए हैं. जानकारों का कहना है कि ये ठिकाने कई तरह के स्ट्रेटेजिक कामों में सपोर्ट की तरह काम आ सकते हैं. इन ठिकानों पर मोबाइल मिसाइल लॉन्चर्स, एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और कमांड-एंड-कंट्रोल जैसी फैसिलिटीज होने की संभावना है.

पूरी फैसिलिटी को देखें तो ये हजारों किलोमीटर में फैली हुई है. चूंकि ये रेगिस्तानी इलाका है. इस वजह से यहां आम लोगों की रिहायश भी न के बराबर है. यही वजह है कि चीन इस इलाके को एक बड़े और आधुनिक मिलिट्री कमांड सेंटर में बदल रहा है. इस फैसिलिटी को अमेरिका के लिए सीधी चुनौती माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका और चीन में हथियारों का कंपटीशन बढ़ता जा रहा है. 

Advertisement

वीडियो: दुश्मन के अंडरग्राउंड ठिकानों को खत्म करेगी अग्नि-5, बंकर-बस्टर मिसाइल पर भारत की तैयारी

Advertisement