Telegram पर NEET re-examination के दौरान बैन लगने से सबसे ज्यादा फायदा किसे हुआ होगा? क्या सवाल है WhatsApp को और किसे. नहीं भाई. तो फिर पक्का सिग्नल ऐप को. नहीं भाई नहीं. तो फिर इंस्टाग्राम ने मौज काटी होगी. नहीं भाई. सबसे ज्यादा फायदा हुआ है VPN ऐप्स को (Telegram ban sparks rush to VPN). वही VPN ऐप्स जिनको कोई आम दिनों में पूछता नहीं, टेलीग्राम बैन से उनकी 'चांदी' हो गई. क्योंकि बैन के दौरान VPN ऐप्स के डाउनलोड लाखों में पहुंच गए.
Telegram बैन का सबसे ज्यादा फायदा इन ऐप्स को हुआ, WhatsApp या इंस्टाग्राम मत सोचिए
16 जून को सरकार द्वारा अस्थायी बैन लगाने के बाद, 17 जून को भारत में टॉप 100 VPN ऐप्स के डाउनलोड 9,19,000 तक पहुंच गए. यह संख्या 9-15 जून के औसत से 76 फीसदी और 1-15 जून की बेसलाइन से 63 फीसदी ज़्यादा थी.


- 16 जून को सरकार द्वारा अस्थायी बैन लगाने के बाद, 17 जून को भारत में टॉप 100 VPN ऐप्स के डाउनलोड 9,19,000 तक पहुंच गए. यह संख्या 9-15 जून के औसत से 76 फीसदी और 1-15 जून की बेसलाइन से 63 फीसदी ज़्यादा थी.
- 16 जून को ही डाउनलोड बढ़कर 6,45,000 हो गए थे, जिससे 17 जून को भारत में VPN ऐप्स के लिए कम से कम 2025 की शुरुआत के बाद से सबसे अच्छा दिन बन गया.
- ऐप इंटेलिजेंस फर्म 'ऐप फिगर्स' के डेटा के अनुसार, टेलीग्राम पर पाबंदी की वजह से इस साल देश में VPN डाउनलोड में सबसे बड़ी बढ़ोतरी हुई. यूज़र्स ने मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल जारी रखने के तरीके खोजे और दूसरे ऐप्स का रुख किया.
VPN (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) इंटरनेट की दुनिया की वो चाबी है जिससे आप कई सारे ऐप्स और ऐप का ताला खोल सकते हैं. वेबसाइट्स और ऐप पर दिखने वाला कॉन्टेन्ट लोकेशन के हिसाब से होता है. जैसे NetFlix पर आपको कई सारी फिल्में और वेब सीरीज इंडिया में नहीं दिखतीं. मगर VPN लगाकर आपके डिवाइस की लोकेशन अमेरिका करते ही सब दिखने लगेगा. इसकी मदद से आप TheLallantop.com को दुनिया जहान में कहीं भी बैठकर देख सकते हैं, भले वो सिर्फ इंडिया में ही देखने के लिए बना हो.

VPN को आप एक ऐसी टेक्नोलॉजी कह लीजिए, जो पब्लिक नेटवर्क, जैसे इंटरनेट और प्राइवेट नेटवर्क, जैसे आपके घर के वाई-फाई, के जरिए सर्वर से सुरक्षित कनेक्शन जोड़ता है. इसके ज़रिए यूजर दुनिया में कहीं से भी संबंधित कंप्यूटर या उसके डेटा को एक्सेस कर सकता है.
आसान भाषा में इसे ऐसे समझिए. मान लीजिए आप ऑफिस से दूर हैं. कुछ डेटा आपके ऑफिस के सर्वर में पड़ा हुआ है. आपको वो चाहिए. तो एक ऐसा नेटवर्क बनाया जाता है, जो इंटरनेट के जरिए आपके सिस्टम को ऑफिस के सर्वर से जोड़ता है.
VPN (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) इंटरनेट ट्रैफ़िक को एन्क्रिप्ट करते हैं और इसे दूसरी जगहों पर मौजूद सर्वर के ज़रिए भेजते हैं, जिससे यूज़र्स अपने IP एड्रेस छिपा सकते हैं और कुछ नेटवर्क पाबंदियों से बच सकते हैं. इनका इस्तेमाल आम तौर पर प्राइवेसी और सिक्योरिटी के लिए ज्यादा किया जाता है. मार्केट में मुफ़्त और पेड, दोनों तरह के ऐप्स मिलते हैं. मुफ़्त वाले में कुछ लोकेशन का जुगाड़ होता है तो पेड वाले से सारी दुनिया आपकी मुट्ठी में होती है.

अगर आपको ऐसा लगता है तो आप एकदम गलत सोच रहे. ठीक वैसे ही जैसे कि आपने इनकॉगनिटो मोड पर कोई काम कर लिया और आप दुनिया जहान की आंखों से बच गए तो आप मुगालते में हैं. इनकॉगनिटो मोड पर जब आप काम करते हैं तो आपकी हिस्ट्री और कुकीज भले आपके ब्राउजर पर रिकॉर्ड नहीं होते. लेकिन इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर या इंटरनेट कंपनी जरूरत पड़ने पर इसको बड़े आराम से देख सकती है.
इसी तरह VPN का रिकॉर्ड भी सरकारी एजेंसियां खंगाल सकती हैं. जून 2022 से भारत में VPN सेवा देने वाली कंपनियों को यूजर के सभी रिकॉर्ड पांच साल के लिए रखने ही पड़ते हैं. पता नहीं VPN से टेलीग्राम चलाने वाले कितने लोगों को ये पता होगा.
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