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PF क्लेम सेटलमेंट के लिए ऑनलाइन घूस ली, अब 3 साल कटेंगे जेल में

सरकार ने पीएम का पैसा ऑनलाइन निकालने की सुविधा दी है, ताकि लोगों को भटकना न पड़े. हालांकि, एक शख्स ने ऑनलाइन पीएफ क्लेम सेटलमेंट के बदले रिश्वत ली. अब 3 साल की जेल के साथ एक लाख का जुर्माना भी लगा है.

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यह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 8 के तहत अन्य मामलों से अलग है जहां कैश में घूस ली जाती है (Aaj Tak)

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  • बेंगलुरु की सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने EFPO के सीनियर असिस्टेंट एस प्रसन्ना को छह पीएफ खाताधारकों से ऑनलाइन रिश्वत लेने के आरोप में तीन साल की जेल और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
  • साल 2021-2022 के बीच, प्रसन्ना ने पेंडिंग पीएफ क्लेम्स को निपटाने के लिए PhonePe के माध्यम से 500 से 2000 रुपये तक रिश्वत की मांग की और इसे वसूला, जिससे मामला भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं के तहत आया।
  • सजा के बाद EFPO कर्मचारियों के भ्रष्टाचार की जांच में वृद्धि और डिजिटल भुगतान के जरिए रिश्वतखोरी की पहचान व रोकथाम को लेकर कदम उठाए जाने की संभावना बढ़ी है।

बेंगलुरु की सीबीआई मामलों की स्पेशल कोर्ट ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EFPO) के सीनियर सोशल सिक्योरिटी असिस्टेंट एस प्रसन्ना को तीन साल के जेल टर्म की सजा सुनाई है. साथ ही,  1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गा है. कोर्ट  ने पाया कि प्रसन्ना ने पीएफ क्लेम्स के सेटलमेंट के बदले 6 पीएफ खाताधारकों से ऑनलाइन घूस ली. 

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इन पीएफ खाताधारकों ने अपना पीएफ ऑनलाइन निकलवाने के लिए आवेदन किया था लेकिन मामला अटका पड़ा था. पेडिंग पड़े पीएफ को क्लियर कराने के बदले प्रसन्ना ने फोनपे (PhonePe) के जरिये घूस ली.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने बिना किसी संदेह के ये साबित कर दिया कि ईपीएफओ के कर्मचारी एस प्रसन्ना को घूस की रकम फोनपे के जरिये भेजी गई. सीबीआई के जज सतीश जे बाली ने कहा कि यह मामला PhonePe खाते के माध्यम से रिश्वत के ट्रांसफर का है.  यह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 8 के तहत अन्य मामलों से अलग है जहां कैश में घूस ली जाती है.

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क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट के मुताबिक साल 2021 और 2022 के बीच, प्रसन्ना ने पेडिंग पड़े पीएफ क्लेम्स को निपटाने के लिए कथित तौर पर 500 से 2,000 रुपये तक की रिश्वत की मांग की. जैसे ही पीएफ खाताधारकों के अकाउंट में पैसा पहुंचा उन्होंने तय रिश्वत की रकम प्रसन्ना के PhonePe UPI ID से जुड़े सरकारी बैंक खाते में भेज दी. 

अदालत ने माना कि फोनपे के जरिये 6 लाभार्थियों द्वारा किया गया लेनदेन रिश्वतखोरी थी. जज ने आगे कहा कि अवैध रिश्वत की राशि मुख्य मुद्दा नहीं थी. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रसन्ना की सैलरी मामूली थी. इसके बावजूद अदालत ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि वह नियमित रूप से रिश्वत लेता था.

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