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असली कैंडिडेट की जगह NEET एग्जाम देने पहुंचे, BHU की छात्रा सहित 24 अरेस्ट

RE-NEET Exam racket: 21 जून को हुए दोबारा NEET एग्जाम में कुछ असली छात्रों की जगह पर नकली छात्र एग्जाम देने पहुंचे. बिहार पुलिस ने इस मामले में अब तक कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया है. अब सवाल ये है कि इतनी तगड़ी सिक्योरिटी के बावजूद ये चूक कैसे हो गई?

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मयंक (लेफ्ट) की गिरफ्तारी के बाद पूरा नेटवर्क खुला जिसका मास्टरमाइंड अर्पित राज (राइट) है. (फोटो- इंडिया टुडे)

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  • NEET-UG के दोबारा आयोजित परीक्षा में 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें कुछ मेडिकल और नर्सिंग कॉलेज के छात्र तथा बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारी शामिल हैं।
  • NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी, लेकिन प्रॉक्सी एवं सॉल्वर गैंग जांच में पकड़ में आए, जिससे अनियमितताओं का पता चला।
  • पुलिस ने गिरफ्तार 24 लोगों से पूछताछ जारी रखी है और जांच में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान के लिए जगह-जगह छापेमारी भी की जा रही है।

NEET-UG Exam पेपर लीक के बाद 21 जून को दोबारा NEET-UG का पेपर कराया गया. लेकिन इस बार भी NTA एक सफल परीक्षा कराने से चूक गई है. एग्जाम के दौरान कुछ अनियमितताएं सामने आई हैं. इस बार ‘सॉल्वर गैंग’ और ‘प्रॉक्सी’ एक्टिव हो गए और एग्जाम सेंटर के अंदर पहुंच गए. हालांकि पुलिस ने समय रहते एक्शन ले लिया है. ये पूरी कहानी कैसे खुली ये समझते हैं.  

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इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार शशि भूषण कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के लखीसराय में NEET Re-Exam के दौरान एक बड़े सॉल्वर गैंग से पर्दा हटा है. और इस मामले में अब तक 24 लोगों को गिरफ़्तार भी कर लिया गया है. इनमें कुछ मेडिकल छात्र हैं. जबकि अन्य इस एग्जाम प्रोसेस से जुडी बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारी हैं. पुलिस का आरोप है कि कुछ ‘ओरिजिनल कैंडिडेट’ की जगह पर कुछ ‘डुप्लीकेट कैंडिडेट’ एग्जाम देने सेंटर पहुंच गए थे.  

कैसे खुला नेटवर्क? 

पुलिस के मुताबिक़ ‘अर्पित राज’ इस पूरे नेटवर्क का सरगना माना जा रहा है. अर्पित, ‘गया’ के अन्नपूर्णा नारायण मगध मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (ANMMCH – मेडिकल कॉलेज) का छात्र है. ये वही अर्पित राज है जिससे 2024 के NEET Paper Leak मामले में CBI पहले भी पूछताछ कर चुकी है. 

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बता दें, NEET पेपर लीक के बाद सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे. जैसे क्वेश्चन पेपर एयर फोर्स के ज़रिए पहुंचाए गए, एग्ज़ाम सेंटर्स पर AI के ज़रिए निगरानी रखी गई, नेटवर्क सिग्नल रोकने के लिए जैमर्स लगाए गए, देशभर में 2 लाख से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए और 6,669 ऑब्ज़र्वर्स और 674 सिटी कोऑर्डिनेटर्स की ड्यूटी लगाई गई थी. लेकिन इतनी तगड़ी सिक्योरिटी को भी कुछ लोगों ने भेद लिया. 

पुलिस के मुताबिक़, पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश तब हुआ, जब पटना मेडिकल कॉलेज का थर्ड ईयर MBBS छात्र ‘मयंक कश्यप’ पकड़ा गया. मयंक इस एग्जाम में सर्विसेज देने वाली बायोमेट्रिक कंपनी का फ़र्ज़ी कर्मचारी बना, और फिर हसनपुर हाई स्कूल एग्जाम सेंटर के अंदर पहुंच गया. जांच के दौरान सबसे पहले उसी पर शक़ हुआ, तो उसे पकड़ लिया गया. फिर हुई पूछताछ. जिसमें उसने कई और नाम लिए, और ठिकानों की जानकारी दे दी.

कितने लोग गिरफ्तार हुए? 

इसके बाद KRK Higher Secondary School और केंद्रीय विद्यालय लखीसराय में छापेमारी हुई. वहां से 7 और कैंडिडेट सहित कई लोगों को पकड़ा गया. जांच में पता चला कि इस नेटवर्क में बड़े मेडिकल और नर्सिंग कॉलेज के छात्र भी शामिल हैं. BHU की छात्रा पूनम कुमारी को दूसरे कैंडिडेट के नाम पर एग्जाम देते हुए पकड़ा गया. 

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इसके अलावा AIIMS रायबरेली के छात्र ‘सौरभ झा’, दिल्ली के शाहदरा मेडिकल कॉलेज के इंटर्न ‘अमन अग्रवाल’ और NMCH Nursing के छात्र ‘संजीत’ और उसके भाई को भी अरेस्ट किया गया है. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक़, जिन 24 लोगों की गिरफ्तारी हुई है उनमें, 9 लोग असल कैंडिडेट की जगह एग्जाम दे रहे थे.

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पुलिस ने क्या बताया? 

इस पूरे मामले की जांच खुद DM ‘शैलेन्द्र कुमार’ और SP ‘प्रेरणा कुमार’ कर रहे हैं. SDM ‘प्रभाकर कुमार’ और SDPO ‘शिवम कुमार’ की अगुवाई में पूछताछ चल रही है. SP प्रेरणा कुमार ने बताया, 

‘मैं और मेरी टीम जगह-जगह छापेमारी कर रहे हैं. अभी एक सेंटर से एक प्रॉक्सी पकड़ा गया है. बाकी हम इसके लिंक की जांच कर रहे हैं.’ 

रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि कई मामलों में फोटो और फिंगरप्रिंट मैच नहीं हुए, जिसके चलते शक हुआ. फिर कार्रवाई की गई. ऐसे में ‘Verification’ में ही गड़बड़ी का पकड़ा जाना तो ठीक है, लेकिन असल सवाल है कि आखिर ये लोग एग्जाम सेंटर तक पहुंचे कैसे?

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