BCCI ने ज़रूरी कर रखा है ये टेस्ट
पिछले होम सीज़न के बाद से ही BCCI ने 'यो यो टेस्ट' अनिवार्य कर रखा है. इसे वो खिलाड़ियों की फुर्ती और लचीलापन परखने के लिए इस्तेमाल करता है. अगर आप इस टेस्ट में फेल होते हो तो आपका टीम में सिलेक्शन नहीं हो सकता है. कुछ बड़े खिलाड़ियों के फेल कर जाने पर उन्हें बाहर बिठाने की घटनाएं भी हुई हैं. BCCI की देखा देखी अब आईपीएल की टीमें भी इसे अनिवार्य करने जा रही हैं. चार टीमों ने तो इसे लागू कर भी दिया है. ये टीमें हैं मुंबई इंडियंस, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर, किंग्स इलेवन पंजाब और राजस्थान रॉयल्स.जब इस टेस्ट में फेल होना युवराज सिंह और सुरेश रैना को भारी पड़ गया था
पिछले साल युवराज और रैना जैसे बड़े खिलाड़ियों ने इस टेस्ट का प्रकोप झेला था. इन दोनों के इस टेस्ट में फेल होने पर उन्हें टीम में लेने से परहेज़ किया गया था. उनके ना सिलेक्ट होने पर काफी बवाल भी हुआ था और लोगों ने BCCI सिलेक्शन कमिटी को कोसा भी था. जिसके बाद BCCI ने एक बयान जारी करके स्पष्ट किया था कि इन खिलाड़ियों को इस टेस्ट में फेल होने पर बाहर रखा गया है.
क्या बला है ये 'यो-यो टेस्ट'?
यो यो टेस्ट एक हाई लेवल का फिटनेस टेस्ट है. यूं समझ लीजिए खिलाड़ी में कितना दमखम है ये पता लगाने का तरीका है. इसमें बेसिकली आपको अपनी तेज़ी और लचीलापन दिखाना होता है. देखा जाए तो सिर्फ दौड़ना ही है लेकिन एक सेट पैटर्न को फॉलो करते हुए. इस टेस्ट में दो निर्धारित पॉइंट्स होते हैं. वहां या तो दो कोन्स रखे जाते हैं या कोई लकीर खींच दी जाती है. इनके बीच 20 मीटर की तयशुदा दूरी होती है. खिलाड़ी एक रेखा के पीछे पांव रखकर शुरुआत करता है. निर्देश मिलते ही दौड़ना शुरू करता है. एक पॉइंट से दूसरे पॉइंट पर पहुंच कर फिर से वापस आना होता है. दौड़ने की स्पीड धीरे-धीरे बढ़ानी होती है. ऐसे कई चक्कर लगाने होते हैं. दूसरी बीप बजने से पहले आपने मुड़ना होता है. तीसरी बीप तक वापस स्टार्टिंग पॉइंट पर आना पड़ता है. इस प्रक्रिया को एक शटल कहते हैं.
इसमें अलग-अलग लेवल होते हैं. खिलाड़ी लेवल पांच से शुरू करते हैं. इसमें सिर्फ एक शटल होता है. अगला चरण लेवल नाइन होता है. इसमें भी एक शटल होता है. उससे अगला लेवल 11, जिसमें दो शटल होते हैं. इसी तरह लेवल 12 में तीन और लेवल 13 में चार शटल होते हैं. लेवल 14 से आगे हर एक में आठ शटल होते हैं. लेवल 23 हाईएस्ट लेवल है, जिसे आज तक कोई भी छू नहीं पाया है. हर लेवल 40 मीटर की दूरी कवर करता है. खिलाड़ियों को दो शटल के बीच में 10 सेकंड का विराम भी मिलता है. अगर पहले राउंड में पिछड़ गए हो तो और तेज़ी से दौड़कर कवर करना पड़ता है. अगर खिलाड़ी दो छोरों पर अपेक्षित तेज़ी नहीं हासिल कर पाता, तो उसका टेस्ट रद्द कर दिया जाता है. यह पूरी प्रक्रिया सॉफ्टवेयर पर आधारित है, जिसमें नतीजे रिकॉर्ड किए जाते हैं. बाद में ये जांचा जाता है कि किस खिलाड़ी ने कितनी स्पीड निकाली. एक तयशुदा लेवल से नीचे परफॉर्म करने वालों को फेल करार दिया जाता है. BCCI के मुताबिक़ कम से कम 19.5 या इससे ज़्यादा अंक हासिल करना ज़रूरी है.
कहां-कहां क्या स्टैंडर्ड्स हैं?
अलग-अलग मुल्कों ने अलग-अलग स्पीड लेवल तय कर रखे हैं. इंडिया ने 16:1 का लेवल सेट कर रखा है. इसका मतलब है खिलाड़ियों को अपना पहला शटल 16 के लेवल पर ख़त्म करना होगा. जिसमें 1120 मीटर की दूरी तय होगी. पाकिस्तान का मिनिमम लेबल 17:4 है, वेस्ट इंडीज का 19. सबसे ज़्यादा न्यूज़ीलैण्ड का है. 20:1.
कहते हैं कि टीम इंडिया में विराट कोहली, अजिंक्य रहाणे और रविंद्र जडेजा ही बेहतर परफॉर्म कर पाते हैं. बाकियों की परफॉरमेंस एवरेज है. दुनिया में ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैण्ड के खिलाड़ी इसमें बेहतरीन रिज़ल्ट्स देते हैं. आसान भाषा में अगर इस टेस्ट को समझना है तो बस इतना जान लीजिए. आपको आठ मिनट में दो किलोमीटर भागना है. सिंपल.
क्या गेल, युवराज के लिए दरवाज़े बंद होंगे?
किंग्स इलेवन पंजाब ने ये टेस्ट मैन्डेटरी कर दिया है. ऐसे में युवराज सिंह और क्रिस गेल जैसे स्टार खिलाड़ियों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं. युवराज सिंह पहले भी फेल हो चुके हैं. गेल का भी यही हाल है. ऐसे में देखना दिलचस्प रहेगा कि पंजाब वाले इन खिलाड़ियों के लिए नियम लचीले करते हैं, या सख्ती अपनाते हैं.ये भी पढ़ें: ऑस्ट्रेलिया आराम से मैच जीत रहा था, फिर सचिन ने बोला अपन बॉलिंग करेगा चीटिंग पर लेक्चर देने वाले स्टीव वॉ ने जब खुद ये चीटिंग की थी राजस्थान रॉयल्स में स्मिथ की जगह आएगा वो खिलाड़ी, जिसने चहल-कुलदीप के परखच्चे उड़ा दिए थे क्रिकेट का वो काला दिन, जब ऑस्ट्रेलिया के चैपल भाइयों ने मैदान पर सबसे गंदी चीटिंग की वीडियो: जब नज़फगढ़ का सहवाग 309 रन बनाकर मुल्तान का सुल्तान बन गया

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