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क्रिकेट का वो काला दिन, जब ऑस्ट्रेलिया के चैपल भाइयों ने मैदान पर सबसे गंदी चीटिंग की

ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट टीम की बॉल टेम्परिंग की नई चीटिंग सामने आ गई तो एक पुराना दर्द भी ताजा हो गया. ग्रेग चैपल के भाई ट्रेवर चैपल ने अपना 37 साल पुराना दर्द बाहर निकाला है. 1981 में ट्रेवर ने एक अंडरआर्म गेंद फेंकी थी और वो क्रिकेट इतिहास में खेल भावना की हत्या करने का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया था. दुनिया भर में इससे ऑस्ट्रेलियाई टीम की खूब भद्द पिट्टी थी. हालांकि उस वक्त अंडरआर्म गेंद फेंकना क्रिकेट कानून के खिलाफ नहीं था. मगर उस वक्त ये क्रिकेट में प्रचलित भी नहीं था. दुनिया ने इसे उस वक्त चीटिंग कहा था. ट्रेवर ने अब कहा है कि स्टीव स्मिथ को भी जिंदगी भर वही मानसिक दबाव झेलना पड़ेगा, जो उन्होंने खुद झेला है. ट्रेवर ने कहा है कि इसी के चलते उनकी शादी टूट गई थी और सामाजिक तौर पर भी एक धोखबाज की इमेज बनी रही है. जानिए ऑस्ट्रेलिया की उस चीटिंग के बारे में-

क्रिकेट भद्रजनों का खेल है. समझ आने वाली भाषा में कहा जाए तो जेंटलमैंस गेम. 1 फ़रवरी 1981 का दिन था वो जब इस खेल की मर्यादा तार-तार हुई थी. जब मैदान पर खुलेआम खेल-भावना का क़त्ल किया गया. जब दो भाइयों ने मिलकर मैच जीतने के लिए वो किया जो किसी हाल में सही नहीं था. तीसरा भाई कमेंट्री कर रहा था और अपने भाइयों से नाखुश था.

कोई हैरानी नहीं कि इस दिन को क्रिकेट की दुनिया में काला दिन माना जाता है.

कब हुआ था?

ऑस्ट्रेलिया में बेंसन एंड हेजेस वर्ल्ड कप सीरीज चल रही थी. तीन देशों के बीच. ऑस्ट्रेलिया, इंडिया और न्यूज़ीलैण्ड. ग्रुप स्टेज में हुए संघर्ष के बाद इंडिया बाहर हो गई. न्यूज़ीलैण्ड और ऑस्ट्रेलिया के बीच ‘बेस्ट ऑफ़ फाइव’ फाइनल होने थे. यानी पांच फाइनल मैच में से जो ज़्यादा जीते, ट्रॉफी उसकी. मेलबर्न में तीसरा फाइनल हो रहा था. तारीख थी 1 फ़रवरी 1981. पहले दो मैच में से एक न्यूज़ीलैण्ड और एक ऑस्ट्रेलिया जीत चुकी थी. ये मैच जीतने वाली टीम के ट्रॉफी जीतने के चांस प्रबल होने वाले थे. इस अहम जीत की हवस ने ही ऑस्ट्रेलियन कैप्टन से वो करवाया, जिससे पूरा क्रिकेट शर्मसार हुआ.

उसी सीरीज का एक लम्हा. फोटो: ESPNCRICINFO.COM
उसी सीरीज का एक लम्हा. फोटो: ESPNCRICINFO.COM

किसने किया था?

जिस शख्स के नाम क्रिकेट को कलंकित करने वाली हरकत करने का कारनामा दर्ज हुआ, वो थे ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन कप्तान ग्रेग चैपल. वही ग्रेग चैपल जिनके बारे में कहा जाता है कि भारतीय कोच के रूप में उन्होंने इंडियन टीम को बरबाद करके रख दिया. इरफ़ान पठान जैसे खिलाड़ी को कन्फ्यूजन के मझधार में छोड़ दिया था. भारत की एक बस में दिखाने से बहुत पहले ग्रेग चैपल मेलबर्न में क्रिकेट के खेल को मिडल फिंगर दिखा चुके थे.

जवानी के दिनों के ग्रेग चैपल. फोटो: CricketCountry.com
जवानी के दिनों के ग्रेग चैपल. फोटो: CricketCountry.com

क्या हुआ था उस दिन?

उस दिन ऑस्ट्रेलिया ने पहले बैटिंग करते हुए 235 रन बनाए थे. 4 विकेट खोकर. ग्रेग चैपल और ग्रीम वुड ने पचासे मारे. जवाब में न्यूज़ीलैण्ड की एक वक़्त बहुत स्ट्रांग पोजीशन में थी. एक विकेट पर 117 रन बनाकर. उसके बाद मैच थोड़ा पलटा. ऑस्ट्रेलिया के पाले में गया. लेकिन फिर न्यूज़ीलैण्ड मैच में वापस आई. ऐसे ही मैच झूलता रहा. फिर आया आखिरी ओवर.

आखिरी ओवर में न्यूज़ीलैण्ड को जीतने के लिए 15 रन चाहिए थे. कप्तान ग्रेग चैपल ने गेंद अपने भाई ट्रेवर चैपल को थमाई. रिचर्ड हैडली ने पहली गेंद पर चौका मारा लेकिन दूसरी गेंद पर आउट हो गए. 4 गेंदों में 11 रन चाहिए थे. अगली दो गेंदों में चार रन आए. अब दो गेंदों में 7 रन चाहिए थे, तभी बल्लेबाज़ स्मिथ को ट्रेवर ने बोल्ड कर दिया. अब एक गेंद बाक़ी थी और जीत के लिए 7 रन चाहिए थे. बल्लेबाज़ छक्का भी मारता, तो भी मैच टाई ही होता. न्यूज़ीलैण्ड कभी जीत नहीं पाती. लेकिन ग्रेग चैपल डर गए. उस बैट्समैन से डर गए जिसने अपने 14 मैच के वन डे करियर में सिर्फ 54 रन बनाए थे. ब्रायन मैकेक्नी अव्वल तो छक्का मार ही नहीं पाते और मार भी देते तब भी ऑस्ट्रेलिया मैच हारता नहीं. इसके बावजूद मैच हर हाल में जीतने की हवस ने ग्रेग चैपल से क्रिकेटीय कुकर्म करवाया.

उस मैच में ब्रायन मैकेक्नी.

उन्होंने अपने भाई से कहा कि वो अंडरआर्म बॉल फेंके. अंडरआर्म बॉल यानी सुर्री बॉल. जो ज़मीन से घिसटती हुई जाए और जिस पर छक्का मारना नामुमकिन हो. नियमों के मुताबिक़ इसमें कुछ गैरकानूनी नहीं था लेकिन ये हरकत खेल-भावना के सरासर खिलाफ थी. ये अगली टीम को बॉल फेंकने से भी पहले मुकाबले से बाहर करती थी. किसी को संघर्ष का मौक़ा दिए बगैर हराने जैसा था ये. ट्रेवर की गेंद को मैकेक्नी ने रोका और फ्रस्ट्रेशन में बल्ला फेंक दिया. क्रिकेट की रिकॉर्ड बुक बताती है कि उस मैच को ऑस्ट्रेलिया ने 6 रन से जीता था. हकीकत में ऑस्ट्रेलिया और क्रिकेट हारा था उस दिन.

तीसरा भाई जो सहमत नहीं था

जब ये घटना मैदान में घट रही थी तब ग्रेग और ट्रेवर के भाई इयान चैपल कमेंट्री कर रहे थे. अपने भाई ग्रेग की इस हरकत से वो कतई संतुष्ट नहीं थे. उनके द्वारा लाइव कमेंट्री में बेहद हताशा से कहा गया ये वाक्य लंबे समय तक याद किया जाता रहा,

“नो, ग्रेग, नो, यू कांट डू दैट.” (नहीं, ग्रेग, नहीं, तुम ऐसा नहीं कर सकते.)

मैच के कुछ दिनों बाद एक अखबार में इयान चैपल का एक आर्टिकल भी छापा जिसमें उन्होंने ग्रेग की इस हरकत की भरपूर आलोचना की थी.

वो पूरा आखिरी ओवर इस वीडियो में देखिए:

उसके बाद क्या हुआ?

इस घटना ने क्रिकेट की दुनिया में भूचाल ला दिया. तमाम क्रिकेट पंडितों, नए-पुराने क्रिकेटरों और क्रिकेट प्रेमियों ने एक सुर में इसकी मजम्मत की. मामला इतना बढ़ा कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को बयान जारी करना पड़ा. न्यूज़ीलैण्ड के प्रधानमंत्री रॉबर्ट मल्डून ने इसे ‘कायराना हरकत’ करार दिया. उन्होंने कहा, “मेरी याददाश्त में क्रिकेट के इतिहास की ये सबसे घिनौनी घटना है.” ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री माल्कम फ्रेज़र ने भी बयान दिया कि ये खेल की परंपराओं के विपरीत था.

ICC ने उसके बाद लिमिटेड ओवर्स में अंडरआर्म गेंदबाज़ी को तत्काल प्रभाव से बैन कर दिया. आगे चलकर ग्रेग चैपल ने भी अपनी ग़लती मानी और कहा कि वो माहौल की गर्मी में लिया गया ग़लत निर्णय था. ट्रेवर चैपल को हमेशा इस बात का मलाल रहा कि उन्होंने अपने भाई की बात मानकर अपना नाम हमेशा के लिए एक काले अध्याय से जोड़ लिया.


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