नेटवेस्ट फाइनल की कहानी:
इंग्लैंड से मिले 326 रनों के स्कोर का पीछा करते हुए टीम इंडिया मोमेंटम खो चुकी थी. 146 के स्कोर तक सौरव, वीरू, द्रविड, सचिन सब आउट हो गए थे. क्रीज़ पर दो ऐसे खिलाड़ी थे, जिन्होंने इससे पहले कभी भी इतना बड़ा फाइनल नहीं जिताया था. युवराज ने फिर भी कुछ पारियां खेली थीं. लेकिन कैफ ने उसी साल इंडिया के लिए डेब्यू किया था और ज़िम्बॉब्वे को छोड़कर और कोई बड़ी पारी नहीं खेली थी.
धीरे-धीरे दोनों स्कोर की दूरी कम किए जा रहे थे. साझेदारी बढ़ रही थी और लॉर्ड्स की बालकनी में इंडियन टीम की उम्मीदें भी. गांगुली बार-बार 12वें खिलाड़ी के हाथ मैसेज भेज रहे थे. युवराज एकदम बढ़िया टच में दिख रहे थे. पारी का 38वां ओवर आया और युवराज ने फ्लिटॉफ की लगातार तीन गेंदों पर तीन चौके जड़ दिए. अब इंडिया को जीतने के लिए 100 से कम रनों की ज़रूरत थी.
इस ओवर के बाद उन्होंने फिर से पानी पिलाने के बहाने 12वें खिलाड़ी के हाथ मैसेज भेजा. वो बार-बार बालकनी से कैफ को एक उंगली दिखाकर इशारा कर रहे थे कि सिंगल लेकर स्ट्राइक बदल लें.

2002 नेटवेस्ट फाइनल जीत के बाद गांगुली और कैफ. फोटो: Mohammad Kaif FB
इस पूरी घटना को याद करते हुए कैफ ने बताया,
''मुझे याद है कि दादा चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे थे कि सिंगल लो और युवराज को स्ट्राइक दो.''इसके बाद अगले ओवर के बारे में बात करते हुए युवराज ने कैफ से पूछा फिर आपने दादा की इस बात पर क्या किया. तो कैफ ने कहा,
''मुझे शॉर्ट बॉल मिली और मैंने पुल शॉट लगाया और हमें छक्का मिल गया.''लेकिन असली कहानी छक्का लगाने के बाद की है. जब कैफ ने छक्का लगाया और युवराज के पास आकर ग्लव्स टकराए और कहा,
''हम भी खेलने आए हैं.''कैफ ने इस बातचीत में बताया कि उस ओवर में कैफ का वो छक्का देखने के बाद सौरव गांगुली शांत होकर ड्रेसिंग रूम में बैठ गए. इसके बाद फिर कोई भी मैदान पर मैसेज लेकर नहीं आया.
मोहम्मद कैफ ने उस मैच में 87 रनों की इतनी शानदार पारी खेली कि फिर वो मैच जिताकर ही लौटे. कैफ ने उस मैच में 75 गेंद पर 87 रनों की नॉटआउट पारी खेली थी. इस पारी में कैफ ने छह चौकों के साथ दो छक्के भी लगाए.
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