केंद्र सरकार अगले साल तक चार पब्लिक सेक्टर बैंकों, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक में अपनी शेयरहोल्डिंग 75% तक घटाने पर विचार कर रही है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक स्टॉक मार्केट रेगुलेटर सेबी की मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग की ज़रूरत को पूरा करने के लिए सरकार यह कदम उठा रही है.
IDBI के बाद सरकार किन चार बैंकों में अपनी हिस्सेदारी 75% तक घटाने का सोच रही?
केंद्र सरकार PSU बैंकों के विलय और एकीकरण को लेकर बड़ी योजना बना रही है. उसकी मंशा है कि देश में सिर्फ तीन या चार बड़े सरकारी बैंक रहें. खबर है कि नीति आयोग ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक को प्राइवेटाइजेशन के लिए शॉर्ट लिस्ट भी किया था.

एक अधिकारी ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया, “अगले एक साल में चारों लेंडर्स में पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाना है.” अधिकारी ने कहा कि सरकार मार्केट की स्थितियों के आधार पर ऑफर फॉर सेल (OFS) रूट से अपनी हिस्सेदारी बेचेगी.
रिपोर्ट में इस मामले से जुड़े लोगों के हवाले से कहा गया है कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अगले चरण के विलय और एकीकरण की योजना पर भी काम कर रही है. इसके तहत सरकार आईडीबीआई बैंक के बाद अब दो और सरकारी बैंकों को निजी हाथों में सौंप सकती है.
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रिपोर्ट में छपे आंकड़ों के मुताबिक, सरकार की अभी इंडियन ओवरसीज बैंक में 92.44%, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 81.19%, यूको बैंक में 90.95% और पंजाब एंड सिंध बैंक में 93.85% हिस्सेदारी है. सरकार की हिस्सेदारी 75% तक कम करने के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के मुकाबले इंडियन ओवरसीज़ बैंक, यूको बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक में ज्यादा हिस्सेदारी घटाने की जरूरत होगी.
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन समेत सरकारी कंपनियों को अगस्त 2026 तक 25% की मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग की जरूरत को पूरा करने से छूट दी थी. आगे और एक्सटेंशन के बारे में नोटिफाई किए जाने की उम्मीद है.
प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री से इन बैंकों में आम शेयर धारकों की हिस्सेदारी बढ़ेगी और वे मार्केट रेगुलेटर के तय नियमों के दायरे में आ जाएंगे.
कुछ बैंकों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी?सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय और एकीकरण की व्यापक रणनीति पर भी काम कर रही है. इसका दीर्घकालिक लक्ष्य तीन या चार बड़े सरकारी बैंकों को बनाए रखना है. खबर है कि नीति आयोग ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक को प्राइवेटाइजेशन के लिए शॉर्ट लिस्ट किया था. हालांकि, रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि किसी भी लेंडर को प्राइवेटाइज करने का कोई आखिरी फैसला लिया गया है.
प्राइवेटाइजेशन के लिए मौजूदा कानून में बदलाव करने होंगे. वित्त वर्ष 2021-22 के यूनियन बजट में सरकार ने IDBI बैंक के अलावा दो पब्लिक सेक्टर बैंकों और एक जनरल इंश्योरेंस कंपनी के निजीकरण की योजना की घोषणा की थी.
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