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टीम इंडिया की कप्तानी क्यों छोड़ी? विराट कोहली ने बताई इनसाइड स्टोरी

Virat Kohli ने 2016 से 2019 तक टेस्ट में शानदार प्रदर्शन किया. लेकिन 2021-22 में उनकी फॉर्म गिर गई. इस मुश्किल समय में पूर्व कोच राहुल द्रविड़ और बैटिंग कोच विक्रम राठौर ने उन्हें बहुत सपोर्ट किया.

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कप्तानी छोड़ने के बाद कोहली बैटिंग पर फोकस कर पाए. उन्होंने कहा कि लीडरशिप और परफॉर्मेंस दोनों का दबाव बहुत था. (फोटो- PTI)

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  • विराट कोहली ने RCB इनोवेशन लैब की इंडियन स्पोर्ट्स समिट में बताया कि उन्होंने कप्तानी तनाव के कारण सितंबर 2021 में T20 और जनवरी 2022 में टेस्ट कप्तानी छोड़ दी।
  • कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों का दबाव और लगातार परफॉर्म करने की जिम्मेदारी कोहली के लिए मानसिक और शारीरिक थकान का कारण बनी।
  • कप्तानी छोड़ने के बाद कोहली ने अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित किया और 2023 में 8 टेस्ट मैचों में 671 रन बनाए, जिससे उनकी वापसी हुई।

इंडिया टीम के स्टार बैटर और पूर्व कप्तान विराट कोहली ने हाल ही में एक कार्यक्रम में बताया कि उन्होंने टीम की कप्तानी क्यों छोड़ी थी? RCB इनोवेशन लैब की इंडियन स्पोर्ट्स समिट में कोहली ने कहा कि कप्तानी का बोझ उनके लिए बहुत भारी हो गया था. उन्होंने ये माना कि वो पूरी तरह से थक चुके थे, और उनके पास टीम को कुछ और देने को बचा ही नहीं था.

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कोहली 37 साल के हैं. उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में भारत के सबसे सफल कप्तान के रूप में 68 मैचों में 40 मैच जीते. व्हाइट बॉल क्रिकेट में भी टीम को लगातार नॉकआउट स्टेज तक पहुंचाया. टीम उनकी कप्तानी में 2017 चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल और 2019 वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल खेली. इसके बावजूद सितंबर 2021 में T20 और जनवरी 2022 में टेस्ट कप्तानी उन्होंने छोड़ दी.

कोहली ने बताया,

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“मैं बैटिंग यूनिट का फोकल पॉइंट बन गया था और साथ ही लीडरशिप का भी. दोनों चीजों का लोड मेरी रोजमर्रा की जिंदगी पर कितना पड़ेगा, ये मुझे पहले नहीं पता चला. मैं भारतीय क्रिकेट को टॉप पर रखने के लिए इतना प्रेरित था कि इस बोझ पर ध्यान ही नहीं दिया. जब मैंने कप्तानी छोड़ी तो पूरी तरह थक चुका था. टैंक में कुछ बचा ही नहीं था. ये बहुत कठिन और भयानक अनुभव था.”

उन्होंने आगे कहा कि रोज-रोज परफॉर्म करने का दबाव बहुत था. विराट ने बताया,

“अगर टीम जीत जाए लेकिन मैं रन न बना पाऊं तो मेरी परफॉर्मेंस पर सवाल उठते. अगर मैं रन बना दूं लेकिन टीम हार जाए तो रिजल्ट पर सवाल. इन दोनों के बीच हमेशा बैलेंस करना पड़ता था.”

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द्रविड़ और विक्रम राठौर ने सपोर्ट किया

कोहली ने बताया कि ये बैलेंस बनाना उनके लिए मुश्किल हो गया था. कोहली ने 2016 से 2019 तक टेस्ट में शानदार प्रदर्शन किया. लेकिन 2021-22 में उनकी फॉर्म गिर गई. उनका एवरेज 28 और 26.5 के आसपास रहा. इस मुश्किल समय में पूर्व कोच राहुल द्रविड़ और बैटिंग कोच विक्रम राठौर ने उन्हें बहुत सहारा दिया. 2023 में कोहली ने फिर कमाल किया. 8 टेस्ट में 671 रन बनाए, औसत 55.91 का. कोहली ने कहा,

“राहुल भाई और विक्रम राठौर को मैं दिल से शुक्रिया कहता हूं. उन्होंने मुझे इतना केयर किया कि मैं उनके लिए खेलना चाहता था, मेहनत करना चाहता था. वो मेरी मेंटल हेल्थ को समझते थे, क्योंकि उन्होंने खुद उस लेवल पर क्रिकेट खेला है. उन्होंने मुझे फिर से मोटिवेट किया और मेरी पुरानी उपलब्धियों की याद दिलाई.”

कोहली ने बताया कि युवा प्लेयर्स उन्हें देखते हैं, इसलिए नेट्स में भी अपना स्टैंडर्ड बनाए रखना जरूरी है. वो बोले,

“20 साल खेलने के बाद भी अगर नेट्स में खराब बैटिंग हो तो लोग सोचेंगे कि ये तो विराट कोहली है.”

कोहली ने बताया कि वो इस जिम्मेदारी को अच्छे से समझते हैं.

कप्तानी छोड़ने के बाद कोहली बैटिंग पर फोकस कर पाए. उन्होंने कहा कि लीडरशिप और परफॉर्मेंस दोनों का दबाव बहुत था. अब वो क्रिकेट का मजा ले रहे हैं.

इसके अलावा कोहली ने अपने रोल मॉडल्स के बारे में भी बात की. टेनिस स्टार रोजर फेडरर को वो स्किल और फिनेस के लिए पसंद करते हैं. फुटबॉल स्टार क्रिस्टियानो रोनाल्डो को मेहनत और डिसिप्लिन के लिए. उन्होंने बताया,

“रोनाल्डो इस उम्र में भी मेंटल लेवल पर कितने कमिटेड हैं, ये मुझे बहुत मोटिवेट करता है.”

कोहली की इन बातों से पता चलता है कि बड़े प्लेयर्स भी मेंटल लेवल पर स्ट्रगल करते हैं. कप्तानी सिर्फ मैदान की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि रोजमर्रा का भारी बोझ होती है. कोहली अब सिर्फ अपनी फिटनेस और अपनी बैटिंग पर ध्यान देते हैं, जो इस IPL भी दिखा है.

वीडियो: विराट कोहली ने KKR के खिलाफ सेंचुरी जड़ दिया, RCB पॉइंट्स टेबल में सबसे आगे

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