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जंतर मंतर वालों को पसीने आ जाएंगे, इस स्कूल में छात्रों ने ऐसा तगड़ा प्रोटेस्ट किया

यूपी के फतेहपुर के सर्वोदय इंटर कॉलेज में छात्रों ने बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. जांच में शिकायतें सही मिलने पर प्रशासन ने पंखे, आरओ, बेंच और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का लिखित आश्वासन दिया.

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छात्रों के प्रदर्शन ने स्कूल प्रशासन को झुका दिया. (फोटो- India Today)

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  • फतेहपुर के सर्वोदय इंटर कॉलेज के छात्रों ने स्कूल के खराब सुविधाओं के खिलाफ प्रदर्शन किया और अपनी कई मांगें प्रशासन के सामने रखीं, जिसमें पंखे, सही पानी और बेंच शामिल थीं।
  • छात्रों द्वारा स्कूल में साफ पानी, पर्याप्त बेंच, पंखे और साफ-सफाई की मांगें बार-बार माननीय शिक्षकों द्वारा अनसुनी की गईं, जिससे छात्र अपनी समस्या को लेकर आंदोलन पर मजबूर हुए।
  • प्रदर्शन के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक ने अधिकांश मांगें मानते हुए पंखे, वाटर कूलर, मिड-डे मील सुधार और बेंच व्यवस्था करने का आश्वासन दिया, लेकिन साइंस लैब की मांग अभी अधूरी है।

हाथों में बैनर-पोस्टर. बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की तस्वीर. हवा में गूंज रहे ‘हमारी मांगें पूरी करो’, ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम’ के नारे. ये जंतर-मंतर का सीन नहीं है. फतेहपुर के एक स्कूल का है. जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन और उनकी ‘जीत’ के बाद देश में जैसे आंदोलन की बयार ही चल पड़ी है. नई पीढ़ी अपने अधिकारों को लेकर अचानक से जाग सी गई है. उसे अपनी एकजुटता की ताकत पता चल गई. यूपी के एक छोटे से जिले के एक स्कूल से आई तस्वीरें ये गवाही तो देती हैं.

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फतेहपुर में सर्वोदय इंटर कॉलेज है. सरकारी स्कूल है. यहां के छात्रों ने एक दिन अपनी पढ़ाई स्थगित कर दी और विरोध प्रदर्शन करने के लिए तख्तियां उठा लीं. किसी सरकार के खिलाफ नहीं. अपने ही स्कूल के मैनेजमेंट के खिलाफ. प्रधानाचार्य के खिलाफ और एक उस ‘सर’ के खिलाफ, जिनके पास एक लड़की अपनी समस्या लेकर गई तो वह बोले कि तुम्हारी जैसी लड़कियों पर ‘थूकना भी पसंद नहीं करूंगा’. उन सारे शिक्षकों के खिलाफ जिन्हें छात्रों को भविष्य की राह दिखानी थी और वो शिकायत पर बोले कि ‘ज्यादा नेता न बनो’. 

अब खबर पर आते हैं. इंडिया टुडे से जुड़े नितेश श्रीवास्तव की रिपोर्ट के अनुसार, फतेहपुर के किशनपुर कस्बे में ये सर्वोदय इंटर कॉलेज है. यहां करीब 1800 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं. यहां छात्रों ने स्कूल गेट के बाहर जुटकर एक ताकतवर विरोध प्रदर्शन को अंजाम दिया. प्रदर्शन करने वाले सारे लड़के-लड़कियां स्कूल यूनीफॉर्म में थे. सब के सब इसी स्कूल के छात्र हैं. उनकी मांगें भी ‘चांद-तारों’ की डिमांड नहीं है. जो है वो जानेंगे तो चौंक जाएंगे. क्या आज के समय में भी इनके लिए आंदोलन करने की जरूरत हो सकती है? 

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छात्र बता रहे हैं कि क्लास में बच्चों के बैठने के लिए बेंच नहीं है. स्कूल में पीने का साफ पानी नहीं मिलता. टंकी से जो पानी आता है, उसके साथ हरी-हरी काई भी चली आती है. कौन पिएगा ये पानी? टॉयलेट इतना गंदा है कि छात्राएं वहां जाती ही नहीं. भीषण गर्मी में जब बात हर घर में एसी होने तक आ पहुंची है, तब स्टूडेंट्स से भरे क्लास में एक पंखा भी नहीं है. पसीने से तरबतर कौन सी पढ़ाई स्टूडेंट्स कर पाएंगे? गिने-चुने कमरे में जो एकाध पंखे लगे भी हैं, उनसे करेंट आता है. 

ये सब प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बताया है. 

एक छात्र कहता है कि क्लास में पंखा नहीं चलता. सारे ‘सर लोग’ कूलर में बैठे रहते हैं. हम लोग गर्मी में मरा करते हैं.

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अंकुश नाम के एक छात्र बताते हैं, 

यहां हम लोगों को शुद्ध पानी नहीं मिलता है. पंखे से करंट आ रहा है. बच्चों को करंट मार रहा है और शौचालय में कोई साफ-सफाई नहीं है. बच्चों को खाना (मिड-डे मील) तो मिलता ही नहीं और जब हम सब लोग मिलकर धरना दिए तो कोई सर (टीचर) आगे नहीं आने दे रहे थे. हमको रोक रहे थे. हम सबके ऊपर दबाव बना रहे थे. 

स्कूल की स्टूडेंट अमृता सिंह बताती हैं कि स्कूल की हालत बहुत ज्यादा बिगड़ी हुई है. पानी से काई निकलती है. अच्छा पानी नहीं आता है. सारी छात्राएं यही पानी पीती हैं. पानी की टंकी महीने में एक बार कभी साफ हो जाती है. बाथरूम से इतनी स्मेल आती है कि उसमें जाने से लड़कियां डरती हैं. जाती ही नहीं हैं.

इतनी सारी दिक्कते हैं तो पहले स्कूल के टीचरों को क्यों नहीं बताया? सीधे प्रोटेस्ट? 

11वीं में पढ़ने वाली अमृता इसका जवाब देती हैं, ‘टीचर लोग सुनवाई नहीं करते हैं. बातें नहीं सुनते. डांट देते हैं. बोलते हैं ज्यादा नेता न बनो.’

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प्रोटेस्ट का अंजाम क्या हुआ?

अंजाम बताने की जरूरत क्या है? ‘जेन-जी’ इन दिनों फॉर्म में है. उनकी जायज मांगों के पार कोई नहीं जा सकता. यहां भी यही हुआ. सारे छात्रों ने ऐसी एकजुटता दिखाई कि स्कूल प्रशासन को झुकना पड़ा. इस स्टूडेंट प्रोटेस्ट के बारे में जैसे ही जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को पता चला, वो भागे-भागे स्कूल पहुंचे. पूरे परिसर का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान उन्होंने बच्चों की शिकायत सही पाई. छात्रों के प्रदर्शन के आगे झुकते हुए उन्होंने एक मांग को छोड़कर उनकी सारी मांगें मान लीं.

स्कूल से ही राकेश कुमार ने घोषणा की, 

बच्चों ने जो लिखित मांगे की थीं, उन्हें मान लिया गया है. स्कूल के हर कमरे में चार पंखे लगवाए जाएंगे. आज से लेकर कल तक ये पंखे कमरे में लग जाएंगे. वायरिंग भी दुरुस्त करने को कह दिया गया है. मिड-डे मील का मेनू और मात्रा दोनों ही ठीक कराया जा रहा है. 6, 7 और 8वीं क्लास के बच्चों के लिए बेंच नहीं है. उसकी भी व्यवस्था एक महीने के अंदर की जा रही है. पीने के पानी लिए एक आरओ और वाटर कूलर की व्यवस्था कराई जा रही है. 

उन्होंने खेल के मैदान की साफ-सफाई का भी निर्देश दिया. ये सारे वादे लिखित में छात्रों को दिए गए हैं. राकेश कुमार ने कहा कि जो काम जितना जल्दी हो सकता है, उसको उतनी तेजी से कराया जाएगा. छात्रों को किसी तरह की असुविधा नहीं होने दी जाएगी. 

छात्रों की सिर्फ एक मांग पूरी नहीं हो पाई.

साइंस की पढ़ाई के लिए लैब आदि की डिमांड पर प्रशासनिक अधिकारी ने अपनी मजबूरी गिना दी. उन्होंने कहा कि छात्रों की केवल एक मांग पूरी करना पॉसिबल नहीं है. साइंस क्लास की. इसके लिए बोर्ड से मान्यता लेनी होती है. इसके लिए लैब चाहिए. लैब के बगैर मान्यता और बिना मान्यता के साइंस की क्लास नहीं चलवा सकते. इसके अलावा छात्रों की सारी बातें मान ली गई हैं. 

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