एक लड़की जिसे बचपन में ही पोलियो हो गया. 18 साल की उम्र में शादी हुई तो लगातार घरेलू हिंसा का शिकार होती रही. पति दारू पीता, ड्रग्स लेता और घर आकर उसे मारता. कभी इसलिए कि वह दहेज नहीं लाई. तो कभी इसलिए कि उसने बेटा नहीं दो बेटियों को जन्म दिया. मायके वालों ने कहा कि एडजस्ट करो. 8 साल बाद उस लड़की को नंगा करके उसकी बेटियों के साथ सड़क पर फेंक दिया गया. इसके बाद क्या होता?
'शराबी पति रातभर पीटता था', गोल्ड मेडल जीतने वाली शर्मिला की कहानी
40 साल की शर्मिला के लिए उनकी जिंदगी का सबसे खास पल है. उन्हें अपने दूसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल हासिल हुआ. साल 2022 में बर्मिंघम में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में वह चौथे स्थान पर रही थीX. इस बार उन्होंने कोई गलती नहीं की. 9.81 मीटर के थ्रो के साथ उन्होंने गोल्ड मेडल जीता.

इतनी हिंसा और परेशानियों ने उस लड़की को अवसाद में डूबा दिया. वह भी इस हद तक कि उसने आत्महत्या तक करने का फैसला कर लिया. लेकिन वह रुक गई. और शुकर है कि वह रुक गई. क्योंकि अगर ऐसा न होता तो भारत को न तो एक ऐतिहासिक मेडल मिलता और न ही ऐसी मिसाल. लड़की का नाम शर्मिला धनकड़. जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में F57 शॉटपुट इवेंट में गोल्ड मेडल जीता. यह भारत का पैरा शॉटपुट में पहला मेडल है.
40 साल की शर्मिला के लिए ये उनकी जिंदगी का सबसे खास पल है. उन्हें अपने दूसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल हासिल हुआ. साल 2022 में बर्मिंघम में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में वह चौथे स्थान पर रही थीं. इस बार उन्होंने कोई गलती नहीं की. 9.81 मीटर के थ्रो के साथ उन्होंने मेडल जीता. उनका यह मेडल उनकी बेटियों के लिए बड़ी प्रेरणा है जिन्होंने अपनी मां को जीवन में बहुत कुछ सहते हुए देखा. वह मां जो कभी पुलिस अफसर बनना चाहती थी.
शर्मिला ने स्पोर्ट्स स्टार को बताया कि उनकी मां को प्रेग्नेंसी के समय सही मेडिकल केयर नहीं मिली. इसी वजह से शर्मिला पैदा हुईं तो उनपर भी असर हुआ. महज दो साल की उम्र में उन्हें पोलियो हुआ जिस वजह से उनका बायां पैर काम नहीं करता था. शर्मिला ने इसी तरह जीना सीख लिया. उन्हें स्कूल जाना बहुत पसंद था. वह पढ़ाई में बहुत अच्छी थीं. उन्हें खेलने में भी उतना ही मजा आता था. लेकिन फिर घरवालों ने उनकी शादी करा दी.
शादी उनके लिए जंजाल बन गया. सालों तक घरेलू हिंसा का शिकार होने के बाद वह अपने घर लौट आईं. इस बार शर्मिला ने फैसला किया कि वह कुछ न कुछ काम करेंगी. उन्होंने अलग-अलग तरह की जॉब की. कभी मेड का काम किया. कभी किसी के घर की सफाई की. तो कभी किसी गार्ड की नौकरी की. उन्हें कम पैसे मिलते थे. लेकिन व्यस्त रहने की वजह से वह डिप्रेशन से बाहर आने लगीं.
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तभी घरवालों ने उनकी दूसरी शादी कराने का फैसला किया. शर्मिला अपने पहले अनुभव के कारण इसके लिए तैयार नहीं थीं. लेकिन बेटियों के लिए मान गईं. इस बार उन्हें शादी से वह सब मिला जो कोई भी शख्स चाहता है. उनके पति अजीत सिंह ने शर्मिला और उनकी बेटियों को दिल से अपनाया. वह उन्हें लेकर रेवारी आ गए जहां वह इलेक्ट्रिशियन का काम करते थे.
अजीत भी स्पोर्ट्सपर्सन बनना चाहते थे, लेकिन ऐसा कर नहीं पाए. अखबारों में उन्होंने पैरा एथलेटिक्स के बारे में पढ़ा और शर्मिला को ट्राई करने को कहा. शुरुआत में शर्मिला तैयार नहीं थीं. लेकिन पति की जिद के कारण वह मान गईं. रेवारी में टेक चंद के साथ ट्रेनिंग करना शुरू कर दिया.
ट्रेनिंग करना आसान नहीं था. काफी पैसों की जरूरत होती थी. लेकिन अजीत ने अपनी पत्नी की ट्रेनिंग में कोई कमी नहीं छोड़ी. उन्होंने पैसे के लिए घर तक बेच दिया. अब उनका परिवार किराए के घर पर रहता है. लेकिन किसी को कोई शिकायत नहीं है. शर्मिला की मां ने भी अपनी जमीन बेचकर पैसा दिया. उनकी बेटियों ने घर की पूरी जिम्मेदारी उठा ली ताकि मां की ट्रेनिंग में कई कमी न आए. हर किसी ने अपने-अपने हिस्से का त्याग किया, अपने-अपने हिस्से की मेहनत की और आज शर्मिला को गोल्ड मेडलिस्ट बना दिया.
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