ये कुछ ऐसे शब्द हैं जो ज़हन में आते ही एक थ्रिलर पिक्चर आंखों के सामने चलने लगती है. वो दिन याद आ जाता है, जब वैसा क्रिकेट मैच हुआ था, जिसमें रोंगटे खड़े हो जाने का दस्तूर है. वो मैच जिसके दूसरे दिन एक लीडिंग अखबार की हेडलाइन थी,
"डेढ़ अरब लोगों की थमी रहीं सांसें"और ख़बर स्पोर्ट्स सेक्शन में न होकर फ्रंट पेज पर थी.
भारत की क्रिकेट टीम करीब 14 साल बाद पाकिस्तान का दौरा कर रही थी. दोनों देशों में ज़बरदस्त उत्साह था. उनमें भी जिनकी क्रिकेट में कोई दिलचस्पी नहीं थी. कई लोग तो मैच के बहाने उस मुल्क की सैर करने गए, जो कभी हमारा ही हिस्सा हुआ करता था. वापस लौटकर भावुक ब्लॉग लिखे कि कैसे पाकिस्तान ने उनपर जी भर के प्यार लुटाया. इतना हाइप पा चुकी उस सीरीज का आगाज़ भी उतना ही शानदार हुआ था.
वो मैच जब लोगों का पल्स रेट सौ पार कर गया था
खचाखच भरे नेशनल स्टेडियम में जब सौरव गांगुली और इंज़माम उल हक़ टॉस के लिए उतरे, तो जनता के शोर में उनकी आवाज़ सुनना मुश्किल हो गया था. टॉस इंज़माम ने जीता और फील्डिंग करने का फैसला किया.
दादा और इंज़ी.
अगर भारत की तरफ से सचिन और सहवाग की विध्वंसक जोड़ी मैदान पर उतरी थी, तो उधर से दुनिया का सबसे तेज़ गेंदबाज़ बॉल संभाले था. शोएब अख्तर. ऐसा मुकाबला जिसे देखने के लिए आदमी अपनी किडनी बेच दे. भारत ने सधी शुरुआत की. रफ़्तार के चक्कर में शोएब अख्तर कई बार लाइन से भटके. 2 वाइड और 2 नो बॉल फेंकी. बहरहाल, वो ट्वेंटी-ट्वेंटी से पहले का ज़माना था. भारत ने 9 ओवर में बिना विकेट खोए 69 रन बनाकर शानदार शुरुआत की थी. तभी शोएब-सचिन की लड़ाई में शोएब जीत गए. 28 रन पर सचिन आउट हो गए. कारवां फिर भी चलता रहा. सचिन गए तो गांगुली आए, गांगुली गए तो द्रविड़ आए. रन बनते ही रहे.
11 बॉल का ओवर और द्रविड़ की बदनसीबी
भारत की पारी का 11वां ओवर. राणा नवेद-उल-हसन फर्स्ट चेंज के तौर पर बोलिंग कर रहे थे. सामने थे सहवाग, जो फुल फॉर्म में थे. इसे सहवाग का खौफ कह लो या कुछ और लेकिन राणा भयानक तौर से लाइन भटक गए. पहली नो बॉल उसपर चौका. फिर नो बॉल उसपर चौका. फिर एक नो बॉल. उस ओवर में उन्होंने पांच नो बॉल फेंकी. उस ओवर से सहवाग ने 24 रन लूट लिए.
द्रविड़ को अख्तर ने बोल्ड किया.
ये मैच राहुल द्रविड़ की बदकिस्मती के लिए भी याद किया जाता है. द्रविड़ इस मैच में तब आउट हुए जब शतक से सिर्फ एक रन दूर थे. एक बार फिर गेंदबाज़ का नाम शोएब अख्तर था. भारत ने 50 ओवर में 349 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया. हालांकि और रन बन सकते थे. आखिर के पांच ओवर में भारत ने लय खो दी थी. इन ओवर्स में सिर्फ 25 रन बने, जबकि हाथ में छह विकेट थे. यहां कम बनाए रन बहुत महंगे पड़ते अगर इंडिया के पास आशीष नेहरा न होते.
इंडिया सामने हो तो पाकिस्तान भी जोश में होता है
जवाब देने उतरी पाकिस्तानी टीम ने उस दिन अद्भुत फाइटिंग स्पिरिट दिखाई थी. आठवें ओवर में 34 रन पर दोनों ओपनर खोने के बाद बहुत से लोगों ने उन्हें मुकाबले से खारिज कर दिया था. पर पाकिस्तान तो पाकिस्तान है. इंडिया के खिलाफ उनके खेल का स्तर ही अलग होता है. मुहम्मद युसूफ और कप्तान इंज़माम ने कमर कस ली कि ऐसे थोड़े ही जाने देंगे. अमूमन ज़मीनी शॉट खेलने वाले युसूफ ने भी उस दिन चार छक्के मारे थे. उनके 73 रन बनाकर आउट होने के बाद युनुस ख़ान ने इंज़माम को जॉइन किया. उन्होंने भी तेज़ी से 46 रन बनाए. इंज़माम जब 122 रनों की शानदार पारी खेलकर आउट हुए, पाकिस्तान को 47 गेंदों में 72 रन चाहिए थे. टफ था थोड़ा.
इंज़माम की पारी बेकार गई.
लेकिन पाकिस्तान ने हार नहीं मानी. अब्दुल रज्ज़ाक ने आड़ा-तिरछा बल्ला चलाकर तेज़ी से रन बटोरे. दोनों टीमों में जद्दोजहद चलती रही. शोएब मलिक ख़तरा बन सकते थे, उन्हें कैफ ने एक शानदार कैच लेकर चलता किया. उस वक़्त जब पाकिस्तान जीत की दहलीज़ पर पहुंच गया था. उसे आठ गेंदों में दस रन चाहिए थे. अब पाकिस्तान की आख़िरी उम्मीद थे विकेट-कीपर मोईन ख़ान. आख़िरी ओवर में उसे जीत के लिए सिर्फ नौ रन चाहिए थे.
नेहरा जी का वो आखिरी ओवर
एक ओवर में नौ रन इतना मुश्किल हरगिज़ नहीं था. शुरू में पाकिस्तान को ख़ारिज कर रहे लोग, अब पाकिस्तान को फेवरेट मान कर चल रहे थे. ऐसे में आशीष नेहरा ने अपने जीवन का शायद सबसे शानदार ओवर फेंका. एक हाई-टेंशन मैच के फाइनल ओवर में सिर्फ 3 रन देकर मैच जिताना अद्भुत गेंदबाज़ी है. नेहरा ने राणा नवेद और मोईन ख़ान को बिलकुल रूम ही नहीं दिया हाथ खोलने का. आज भी वो सीन याद आता है जब जावेद मियांदाद बाहर से इशारा कह कर के कह रहे थे कि 'ऑफ साइड में मारो'.
मियांदाद के इशारे.
दो डॉट गेंदें और तीन सिंगल के साथ इक्वेशन एक गेंद में छह रन पर आकर टिक गया.
अब तक बैट्समैन की पहुंच से गेंद बाहर रख रहे नेहरा ने इस बार लो फुल टॉस फेंकी. मोईन ख़ान शायद सरप्राइज्ड हो गए जो गेंद पर तगड़ा प्रहार न कर सके. गेंद सीधे हवा में गई, जिसे ज़हीर ख़ान ने आसानी से कैच कर लिया. सारे खिलाड़ी आशीष नेहरा पर चढ़ गए.

नेहरा को युवराज ने गोद में उठा लिया.
इस मैच से हासिल हुआ जोश इंडिया ने आगे भी कैरी किया. वन डे सीरीज 3-2 से और टेस्ट सीरीज 2-1 से जीती. बहरहाल, हम भारतीयों के लिए उस दिन आशीष नेहरा ने अपने नाम के आगे लगने वाला 'जी' कमाया था.
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