भारतीय ओलंपिक मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता. इस इवेंट का गोल्ड मेडल श्रीलंका के रुमेश पथिरागे के नाम रहा. इस इवेंट के बाद एक बार फिर इन दोनों का खिलाड़ियों का सामना होगा. नीरज चोपड़ा लुसाने में होने वाली डायमंड लीग में हिस्सा लेंगे. लेकिन क्या इस समय नीरज चोपड़ा का इस इवेंट में हिस्सा लेना सही फैसला है? इसकी वजह हम बताते हैं.
नीरज चोपड़ा डायमंड लीग में हिस्सा लेकर ले रहे हैं रिस्क?
नीरज चोपड़ा ने चोट के साथ पिछले साल वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था. इसके बाद वह लगभग 8 महीने तक एक्शन में नजर नहीं आए. अब जब वापसी की है तो बैक टू बैक टूर्नामेंट खेल रहे हैं.

नीरज चोपड़ा ने चोट के साथ पिछले साल वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था. इसके बाद वह लगभग 8 महीने तक एक्शन में नजर नहीं आए. उन्होंने दोहा डायमंड लीग के साथ वापसी की. जून में हुई इस दोहा डायमंड लीग में 85.69 मीटर के थ्रो के साथ वो चौथे स्थान पर रहे थे. इसके बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज को दूसरा स्थान मिला.
नीरज ने चोट के बाद की वापसीलुसाने डायमंड लीग कमबैक के बाद नीरज का तीसरा इवेंट होगा. लेकिन, परेशानी यह है कि नीरज चोपड़ा पिछले कुछ समय से लगातार चोटिल रहे हैं. चाहे वह पेरिस ओलंपिक हो या फिर वर्ल्ड चैंपियनशिप. ऐसे में लगातार टूर्नामेंट खेलना उनके लिए कितना सही फैसला है, यह तय तौर पर नहीं कहा जा सकता. लुसाने के बाद नीरज को एशियन गेम्स में हिस्सा लेना है, जो सितंबर के आखिर में होगा. इस तरह लगभग तीन महीने में नीरज को तीन टूर्नामेंट खेलने होंगे. यह किसी भी एथलीट के लिए काफी थकाऊ होता है. वह भी तब, जब हर इवेंट में प्रतियोगिता का स्तर बहुत ज्यादा होता है. यहां खिलाड़ी को खुद को पुश करना पड़ता है और कई बार य़ह खिलाड़ी के लिए परेशानी का सबब बन जाता है.
यह भी पढ़ें- टीम इंडिया में टेस्ट क्रिकेट का कैरेक्टर नहीं? अजिंक्य रहाणे की बात ध्यान खींचती है
लगातार टूर्नामेंट खेलने में नुकसान?लगातार टूर्नामेंट खेलने से खिलाड़ियों को सिर्फ थकान ही नहीं होती, बल्कि कई तरह की शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. रिकवरी अगर ठीक तरह न हो तो छोटी चोट भी बड़ी इंजरी में बदल जाती है. नीरज के लिए एशियन गेम्स में खुद को इंजरी फ्री रखना काफी अहम है. इसके अलावा, लगातार टूर्नामेंट में हिस्सा लेने से खिलाड़ियों का रिएक्शन टाइम कम हो जाता है. नीरज को एशियन गेम्स से पहले खुद को रिफ्रेश रखना होगा. यहां उनका खिताब दांव पर होगा.
लुसाने में डायमंड लीग के बाद एशियन गेम्स जापान में है. यहां कंडीशंस में बहुत फर्क है. नीरज को इस दौरान लगातार ट्रेवल भी करना होगा. लगातार ट्रैवल से इंसान मानसिक तौर पर भी थक जाता है. खिलाड़ियों का रिएक्शन टाइम भी स्लो हो जाता है. कई बार वह बर्नआउट हो जाते हैं.
इसके साथ ही सबसे बड़ी चुनौती होती है, खिलाड़ियों का सही समय पर पीक हासिल करना. पीक करने का मतलब होता है, वह समय जब खिलाड़ी शारीरिक औऱ मानसिक तौर पर बेस्ट फॉर्म में होता है. तीन महीने में तीन बार पीक (Peak Performance) करना किसी भी एलीट खिलाड़ी के लिए बेहद मुश्किल माना जाता है. स्पोर्ट्स साइंस के अनुसार, खिलाड़ी कोशिश करते हैं कि साल के कुछ इवेंट्स को अहम इवेंट मानते हैं. और अपना शेड्यूल इसी तरह तैयार करते हैं कि वह वहीं पीक करें. नीरज को यह परेशानी हो सकती है. तीन महीने में तीन बार पीक करना शरीर और दिमाग, दोनों पर भारी पड़ सकता है. नीरज के पास एक पूरी टीम मौजूद है, लेकिन आखिरकार ट्रैक पर नीरज को ही उतरना है. फैंस तो उन्हें हर इवेंट में देखना चाहते हैं, लेकिन यह नीरज को तय करना होगा कि उनके लिए कौन सा इवेंट कितना अहम है.
वीडियो: टीम इंडिया में बड़ा बदलाव, Ajit Agarkar की जगह क्या VVS Laxman लेंगे?









