जब आंख खुली, तो देखा थोड़ी दूर पश्चिम में कुछ धूल उड़ रही है. इतनी सुबह-सुबह जंगल में इतनी गहमागहमी. ऐसा हर रोज तो नहीं होता. सच कहूं, तो पहले थोड़ा डर लगा. फिर खुद को समझाया. अरे, लड़की होकर इतना डरोगी तो दुनिया को क्या मुंह दिखाओगी. मैंने जी कड़ा किया. झटपट 'कराग्रे वसते लक्ष्मी' खत्म किया. फिर उधर बढ़ी, जिधर पांच पांडवों ने अपनी झोपड़ी बनाई थी. बड़े भले लोग थे. बस वक्त खराब था उनका. देखा, उनकी कुटिया के बाहर बड़ा तामझाम हो रहा है. मैं वहीं बरगद के पेड़ पर झूला झूलते हुए उनको देखने लगी. खूब सारे ऋषि-मुनि. मुखिया दुर्वासा भी साथ में थे. चेहरा चमक रहा था उनका. पांचों पांडव उनके पास ही खड़े थे. हाथ जोड़े. दुर्वासा के सबसे पास खड़ी थीं द्रौपदी. शायद चलाचली की बेला थी. दुर्वासा सबको आशीष दे रहे थे. बिना बताए इतने सारे लोग लेकर आए थे, फिर भी द्रौपदी ने सबको पेट भर खाना दिया. अभिभूत थे दुर्वासा. सो उन्होंने द्रौपदी को आशीष के साथ-साथ एक बर्तन भी दिया. चांदी का. गहरे पेट का, पेंदे वाला बर्तन. बोले, बिटिया रानी ये अक्षयपात्र है. एक आदमी का खाना मांगो या लाख आदमियों का, ये सब मैनेज कर देगा. इसकी सप्लाई कभी खत्म नहीं होगी. दुर्वासा की बात सुनकर सब मुस्कुराए. वनवास काटने को अक्षयपात्र मिल गया. जीवन में और क्या चाहिए? भीम की मुस्कुराहट थोड़ी ज्यादा गहरी थी. ये सब निपटाकर दुर्वासा और उनका लश्कर रफूचक्कर हो गया.

ये हैं श्री श्री 108 मुअज्जम खान निआजी. ये खुद को साइंटिस्ट कहते हैं. सॉरी, महान साइंटिस्ट पढ़िएगा. इनके सिवा कोई और इन्हें साइंटिस्ट नहीं कहता. ये चुनाव लड़ने वाले हैं. जीत गए, तो वादे के मुताबिक पाकिस्तान दुनिया का सबसे अमीर मुल्क बन जाएगा.
द्रौपदी से अक्षयपात्र चुराने वाला शख्स पाकिस्तान में साइंटिस्ट बन गया है! पांचों पांडव भी इधर-उधर अपने काम में लग गए. रह गईं बस द्रौपदी. हाथ में अक्षयपात्र लिए उसे निहारते हुए. ठीक इसी समय एक शख्स बदहवास दौड़ता हुआ वहां पहुंचा. गर्दन को छूते घने काले बाल, पतला शरीर. कोट-टाई पहने. दौड़ता हुआ आया और उसने द्रौपदी के हाथ से वो अक्षयपात्र खींच लिया. इससे पहले कि कोई कुछ समझता, वो शख्स हिरण हो गया. कोई पीछे नहीं जा पाया उसके, सिवा मेरे. मैं उसके पीछे दौड़ी. वो आगे, मैं पीछे. ये दौड़ चलती रही. चलती रही. चलती रही. दौड़ती जा रही थी कि किसी ने रोक लिया. कहा, ये बॉर्डर है. इसके आगे पाकिस्तान है. वीजा है, तो इस पार आओ. वर्ना लौट जाओ. मेरे पास वीजा नहीं था. मैं रुक गई. वो 'चोर' मेरे हाथ से निकल गया. आज इतने दिन बाद सोशल मीडिया की मेहरबानी से मुझे वो शख्स वापस मिला. उसका नाम है- मुअज़्ज़म खान निआज़ी. दुर्वासा का अक्षयपात्र चोरी कर अब वो उससे पेट्रोल निकालने जा रहा है. जल्द ही पाकिस्तान में पेट्रोल का समंदर बहने लगेगा. और पाकिस्तान दुनिया का सबसे अमीर देश बन जाएगा. जैसे जन्नत में दूध-अमृत की नदियां बहती हैं, वैसे वहां पेट्रोल-डीजल की नदियां बहने लगेंगी.

39 साल के हैं डॉक्टर निआजी. ये जो फोटो है, वो उन्होंने 2015 में अपने फेसबुक पर डाला था. शादी करने के लिए कन्या की तलाश कर रहे थे. उन्हें 'पायस' यानी बड़ी पवित्र-पावन लड़की की तलाश थी. वैसे भारत में एक कन्या है, जो खुद को 'प्योर ऐंड पायस' कहती है. उसका नाम है राधे मां.
95 करोड़ का खर्चा है बस, फिर चाहे पेट्रोल का दरिया बहाओ या समंदर, अपनी मर्जी है मुअज़्ज़म खान निआज़ी. ये शख्स खुद को 'साइंटिस्ट' कहते हैं. ऐसा कहने वाले वो दुनिया के इकलौते शख्स हैं. जनाब ने एक पार्टी बनाई है. नाम है- पाकिस्तान अमन लीग. इन्होंने एक और दिव्य चीज बनाई है- एक चमत्कारी फॉर्म्युला. पानी से पेट्रोल बनाने का. जितना चाहे, उतना पेट्रोल. 90 से 95 करोड़ का खर्च है बस. उसके सहारे पाकिस्तान पेट्रोल का समंदर बना लेगा. उसकी पांचों उंगलियां 'पेट्रोल' में होंगी. पेट्रोल से लबालब दरिया. पेट्रोल की नहरें. ये सब करने के लिए उनको पावर चाहिए. पावर के लिए राजनीति से बेहतर क्या होगा? मगर राजनीति करने के लिए चुनाव लड़ना होता है. सो मुअज़्ज़म खान निआज़ी चुनाव लड़ रहे हैं. दिक्कत ये है कि उनके सिवा कोई उन्हें वोट देगा, ये लगता नहीं. (उनकी प्रतिभा से जलते हैं शायद लोग). उनका मेनिफेस्टो उठाकर देख लीजिए. उर्दू में है. आप न पढ़ सकें, तो किसी उर्दू जानने वाले दोस्त से पढ़वा लीजिए. मेनिफेस्टो का वादा है कि चुनाव जीतकर मोहम्मद मुअज़्ज़म खान निआज़ी पूरी दुनिया से भुखमरी खत्म कर देंगे. और, होगी शांति चारों ओर उस दिन. पाकिस्तान को हम और क्या दें? हमारी तरफ से उसको पूरा 'ऑल द बेस्ट' रहेगा.
सूरज से बिजली बनेगी, साथ के साथ चीनी भी निकल आएगी ये महान 'वैज्ञानिक' (डॉक्टर भी) पाकिस्तान में बिजली का संकट खत्म कर देंगे. सूरज से बिजली बनेगी. जो कि बनती है. लेकिन जलवा ये है कि सूरज से बिजली बनने के साथ-साथ चीनी भी बनेगी. जैसे धान कूटने पर उसका बाय प्रॉडक्ट भूसा निकलता है, वैसे ही. इसको उन्होंने क्रांतिकारी 'टू इन वन' फॉर्म्युला कहा है. बिजली के साथ चीनी फ्री. पानी से पेट्रोल अलग अविष्कार है इनका. दोनों का क्रेडिट अलग-अलग रखिएगा. 'साइंटिस्ट' निआजी जी-जान से चुनाव की तैयारियों में लगे हैं. उन्होंने एक गाना भी निकाला है. ऑफिशल ऐंथम. बल्ले-बल्ले टाइप की कोई लाइन है, जो बार-बार सुनाई देती है. ये अपने फेसबुक पेज पर खूब तस्वीरें डालते हैं. अमूमन सारी तस्वीरों में खुद को 'महान साइंटिस्ट' लिखते हैं. कोई और तारीफ न करे, तो बेचारा इंसान क्या करे! खुदा के इस बंदे ने फेसबुक का बहुत अच्छा इस्तेमाल किया है. खुद को प्रमोट करने की इनकी काबिलियत कहती है कि ये किसी दिन खुद को अवतार घोषित कर देंगे. माशाअल्लाह, अगर ये आदमी जीत जाए तो पाकिस्तान तर जाएगा. थोड़ा हम भी तर लेंगे. क्योंकि फैसलाबाद (जहां ये पुण्यात्मा रहते हैं) से सटा है लाहौर. लाहौर से सटा है अटारी. अटारी होते हुए अमृतसर पहुंचो. वहां से दिल्ली निकल आओ. दिल्ली से सटा है नोएडा. जिसके एक सेक्टर में हमारा दफ्तर है. जहां बैठकर मैं ये खबर लिख रही हूं. मुझे 'साइंटिस्ट' नियाजी के साथ सीधा कनेक्शन महसूस हो रहा है. अब कोई और इच्छा शेष नहीं रही. मैंने सब देख लिया है.

ये मुअज्जम निआजी का मेनिफेस्टो है. पाकिस्तानी साइट्स से ही मिला हमको. क्या बड़े दिल का आदमी है ये इंसान. लोग छोटे हुए जा रहे हैं और ये पूरी दुनिया के बारे में सोच रहे हैं.
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