भारत की नंबर वन स्क्वाश खिलाड़ी अनाहत सिंह का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया. अपने 5वें अटेंप्ट में अनाहत वर्ल्ड जूनियर स्क्वाश चैंपियनशिप जीत गईं. वह ऐसा करने वाली भारत की पहली खिलाड़ी हैं. वर्ल्ड रैंकिंग में 20वें स्थान पर काबिज अनाहत ने महिला सिंगल्स के फाइनल में इजिप्ट की रुकय्या सलेम को 11-3, 11-7, 11-9 से हराया.
अनाहत बनीं जूनियर वर्ल्ड चैंपियन, खत्म किया इजिप्ट का 16 साल का वर्चस्व
अनाहत ने खिताब जीतने के बाद कहा कि यह खिताब उनके लिए बहुत मायने रखता है. पिछले चार सालों से वह सेमीफाइनल और क्वार्टर फाइनल में हार रही थी. जूनियर सर्किट के आखिरी साल में उनका सपना पूरा हुआ.

उनसे पहले, केवल दिग्गज खिलाड़ी जोशना चिन्नापा ही इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची थींं, लेकिन खिताब नहीं जीत पाई थीं. जो काम जोशना नहीं कर पाईं, वह अनाहत ने कर दिया है. अनाहत ने अपनी इस जीत के साथ टूर्नामेंट में इजिप्ट के वर्चस्व को भी तोड़ा है. बीते 15 सालों से इस टूर्नामेंट को केवल इजिप्ट के खिलाड़ियों ने ही जीता है. अनाहत से पहले साल 2010 में अमेरिका की अमांडा शोबी ने यह खिताब जीता था. अनाहत ने पहले गेम से ही दबदबा बनाकर रखा. उन्होंने पहले गेम में 11-3 से जीत हासिल की. दूसरे गेम में वह 11-7 से जीती. तीसरे गेम में सलेम ने वापसी की और एक समय पर 8-6 की लीड भी ले ली थी, लेकिन अनाहत ने वापसी की और 11-9 से मैच जीत लिया.
अनाहत का इंतजार भी खत्मअनाहत ने खिताब जीतने के बाद कहा कि यह खिताब उनके लिए बहुत मायने रखता है. पिछले चार सालों से वह सेमीफाइनल और क्वार्टर फाइनल में हार रही थीं. बीते साल वह सेमीफाइनल हार गई थीं और फिर ब्रॉन्ज मेडल जीता था. अनाहत ने कहा कि वह इस टूर्नामेंट को अपने लिए कर्स मानती थीं क्योंकि वह यहां कभी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई थीं, लेकिन अब वह चैंपियन बन गई हैं. अनाहत की यह जीत और भी खास है क्योंकि जूनियर सर्किट में यह उनका आखिरी साल है. इसके बाद, उन्हें इस चैंपियनशिप में खेलने का मौका नहीं मिलता.
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स्क्वाश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव साइरस पोंचा ने कहा कि अनाहत की जीत देश में इस खेल के लिए ‘ऐतिहासिक पल’ है. पोंचा ने कहा कि यह भारतीय स्क्वाश के लिए ऐतिहासिक क्षण है. अनाहत में बहुत ऊंचाइयों तक पहुंचने का टैलेंट है. उन्होंने आगे कहा कि भारत ने डबल्स में यह उपलब्धि हासिल की. लेकिन, सिंगल्स में भी उसी सफलता को दोहराना उनके लिए सपने के सच होने जैसा है. अनाहत की कड़ी मेहनत और लगन के अलावा पिछले कुछ सालों में पूरे देश ने उनका और उनकी सफलताओं का समर्थन किया है और इसके लिए पोंचा ने सबको शुक्रिया कहा.
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