रिस्ट स्पिन जिसे लेग स्पिन भी कहते हैं. इस तरह की स्पिन के ऑल टाइम ग्रेट्स की बात करेंगे तो लिस्ट शेन वॉर्न से शुरू होती है. और फिर इसमें अनिल कुंबले और शाहिद अफ़रीदी जैसे नाम आते हैं. मौजूदा दुनिया की बात करें तो ऐसी लिस्टें राशिद खान, आदिल रशीद, शादाब खान, वानिंदु हसरंगा जैसे नामों से गुलजार होती है.
इस प्लेयर के लिए टीम इंडिया को बर्बाद कर रही है BCCI?
इंडिया की ये समस्या कब दूर होगी?
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कभी इस लिस्ट में भारत के युज़वेंद्र चहल भी हुआ करते थे. लेकिन बीते कुछ बरस में उनकी फॉर्म ऐसी गिरी है कि अब वो इस लिस्ट के आसपास भी नहीं हैं. आज हम चहल की फॉर्म और इससे टीम इंडिया पर पड़ रहे असर की चर्चा करेंगे.
# Yuzvendra Chahal Statsतो चलिए, स्टैट्स से शुरू करते हैं. साल 2019 से अब तक चहल ने 45 T20I मैच खेले हैं. इन मैचेज की 45 पारियों में उनके नाम कुल 43 विकेट्स हैं. यानी वह प्रति मैच एक से भी कम विकेट निकाल रहे हैं. इस दौरान चहल की इकॉनमी 8.40, जबकि ऐवरेज 31.55 और स्ट्राइक रेट 22.5 का रहा है. यानी चहल ना तो रन बचा पा रहे और ना ही विकेट निकाल पा रहे हैं.
अब शुरुआती लिस्ट पर लौटें तो इस दौरान राशिद खान ने 39 इनिंग्स में 58 विकेट लिए हैं. इन विकेट्स के लिए उनकी इकॉनमी 6.47, ऐवरेज 16.55 और स्ट्राइक रेट 15.3 का रहा है. लिस्ट के दूसरे नाम आदिल रशीद ने इस दौरान 7.38 की इकॉनमी, 25.16 के ऐवरेज और 20.4 की स्ट्राइक रेट से 57 पारियों में 62 विकेट निकाले हैं.
जबकि वानिंदु हसरंगा ने इस दौरान 51 पारियों में 6.65 की इकॉनमी, 14.57 की ऐवरेज और 13.1 की स्ट्राइक रेट से 87 विकेट झटके हैं. बात शादाब खान की करें तो इस दौरान शादाब ने 51 पारियों में 7.29 की इकॉनमी, 24.71 की ऐवरेज और 20.3 की स्ट्राइक रेट से 56 विकेट निकाले हैं.
यानी चहल बीते तीन बरस दुनिया के टॉप लेग स्पिनर्स की लिस्ट से कोसों दूर रहे हैं. इतना ही नहीं, अभी और सुनिए. चहल से हम जिन प्लेयर्स की तुलना कर रहे हैं, उनमें से कोई भी एक डायमेंशनल नहीं है. यानी ये प्लेयर्स कम से कम दो काम के मास्टर हैं. फिर चाहे वो बोलिंग और फील्डिंग हो, या फिर बोलिंग और बैटिंग. राशिद जैसे कुछ दिग्गज तो थ्री डी भी काम करते हैं. यानी ना सिर्फ बोलिंग बल्कि ये बैटिंग और फील्डिंग के भी मास्टर हैं.
दूसरी ओर हमारे चहल जी. सिर्फ और सिर्फ बोलिंग करते हैं. और बीते तीन बरस से उसमें भी फिसड्डी ही हैं. और इस समस्या पर कहीं चर्चा होती भी नहीं दिख रही. एक जमाना था जब भारत देश अपने स्पिनर्स के लिए जाना जाता था. और एक आज का जमाना है जब T20I में हमारे पास एक भी कायदे का स्पिनर नहीं है.
रविंद्र जडेजा और अक्षर पटेल के रूप में हमारे पास दो लेफ्ट आर्म स्पिनर्स हैं, लेकिन इनके अंदर वो क्वॉलिटी नहीं है जो इस फॉर्मेट के लिए जरूरी है. आप बीते तीन बरस के इनके आंकड़े देखेंगे, तो खुद ही समझ जाएंगे कि कमी कहां है. जड्डू और अक्षर बल्ले से मैच बना सकते हैं, लेकिन ये उस लेवल के विकेट लेने वाले बोलर्स नहीं हैं, जिनकी हमें जरूरत है.
क्रिकेट के इस फॉर्मेट में फिंगर स्पिनर से ज्यादा लेग स्पिनर्स कामयाब हैं, और हमारे पास लेग स्पिनर्स की भारी कमी है. चहल का वक्त खत्म होता दिख रहा है. तो बाकी लेग स्पिनर्स में राहुल चाहर, रवि बिश्नोई जैसे नाम हैं. ये लोग मिले मौकों को कायदे से भुना नहीं पाए. और इसमें सेलेक्शन कमिटी की कमी भी रही ही है. ये लोग प्लेयर्स को प्रॉपर सपोर्ट देने से बचते आए हैं.
इनके अलावा श्रेयस गोपाल, प्रवीण दुबे और राहुल तेवतिया जैसे कुछ नाम भी हैं. डोमेस्टिक क्रिकेट में अच्छा कर रहे इन प्लेयर्स पर भी दांव लगाया जा सकता है. आंकड़ों की मानें तो ये लोग बल्ले से भी बेहतर प्रदर्शन करने का दम रखते हैं. खासतौर से तेवतिया बीते कुछ वक्त से IPL में धमाका करते ही आए हैं.
और इनके साथ रियान पराग भी हैं ही. पराग हाल में बेहतरीन फॉर्म में रहे हैं. उन्होंने गेंद और बल्ले दोनों से असम के लिए कमाल किया है. और उनकी फील्डिंग के बारे में तो सभी जानते हैं. ऐसे में BCCI और हमारी सेलेक्शन कमिटी चहल या उनके जैसे सिर्फ बोलर्स से आगे क्यों नहीं देख रही? क्यों किसी ऐसे लेग स्पिनर को नहीं आजमाया जा रहा जो बैटिंग भी कर लेता हो? तमाम चीजों में प्रयोग कर रही हमारी सेलेक्शन कमिटी का ध्यान इस ओर कब जाएगा?
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