अजिंक्य रहाने. जनता उन्हें वापस लेने को आतुर थी. पूछा जा रहा था कि उन्हें टीम में क्यूं नहीं खिलाया जा रहा था. बहुत सारे सवाल उठे. धवन की जगह उन्हें खिलाये जाने को कहा. उनका पिछले मैचों का रिकॉर्ड भी अच्छा था. असल में किसी की भी समझ में ये नहीं आ रहा था कि आखिर अजिंक्य रहाने अंतिम ग्यारह का हिस्सा क्यूं नहीं बन पा रहे थे. तीसरे मैच की शुरुआत से ठीक पहले मालूम चला कि रहाने को इस मैच में मौका मिलेगा. मॉरल विक्ट्री के लिए इंडिया को आख़िरी मैच जीतना ही जीतना था. रहाने इस काम के लिए बुलाये जा रहे थे. मैच शुरू हुआ. इंडिया की शुरुआत ऐसी हुई जैसे पहले सेमेस्टर का पहला इग्ज़ाम मैथ्स का पड़ गया हो. बैक लगनी तय ही थी. सो लगी. कोहली जब आउट हुए तो इंडिया का स्कोर था 97 रन पर 3 विकेट. फिर आए रहाने. उन्होंने ने थोड़ी देर बॉलिंग झेलने की कोशिश की. फिर 19वीं गेंद पर उन्होंने बाहर जाती गेंद पर खोंचा लगा दिया और गेंद कीपर डिकॉक के हाथों में जा बैठी. अम्पायर ने उंगली उठा दी. लेकिन साथ ही उन्होंने थर्ड अम्पायर से नो बॉल चेक करने के लिए भी कहा. टीवी रीप्ले में मालूम चला कि फिलेंडर ने लाइन क्रॉस कर के गेंद फेंकी थी. उनके जूते का कोई भी हिस्सा लाइन के पीछे नहीं था. इसलिए गेंद इल्लीगल थी. नो बॉल डिक्लेयर कर दी गई. रहाने को जीवनदान मिला.
लेकिन फिर इसके बाद रहाने बहुत देर तक टिक नहीं पाए. 9 गेंद बाद ही रहाने ने एक गलत शॉट खेला. वो गेंद की स्विंग को पढ़ नहीं पाए और बल्ला गेंद की लाइन में नहीं आया. गेंद लेग स्टंप की लाइन में जा रही थी. एलबीडब्लू की अपील को अम्पायर ने आउट दे दिया. आउट लग रहा था लेकिन चूंकि रहाने एक अहम विकेट थे, लिहाज़ा उन्होंने रिव्यू लिया. मालूम चला कि गेंद लेग स्टंप को छूती हुई निकल रही थी और इसलिए अम्पायर्स कॉल के दम पर फ़ैसला बॉलर के पक्ष में ही चला गया. बहुप्रतीक्षित रहाने कुछ ख़ास नहीं कर पाए और 27 गेंद, 44 मिनट खर्च करने के बाद 9 रन बनाकर चलते बने. इंडिया का स्कोर था 113 रन पर 4 विकेट.
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