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होम लोन वालों के सिर रेपो रेट का साया, RBI का फैसला EMI बढ़ा देगा

जानकारों का कहना है कि रिटेल महंगाई बढ़ने से RBI चिंतित है. इसके अलावा बैंकों के पास एनआरआई स्कीम के जरिये खूब निवेश आया है. इसके चलते भी महंगाई और भड़क सकती है.

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कच्चे तेल महंगा होने से महंगाई और भड़कने की आशंका है (Courtesy: Aaj Tak)

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  • रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया इस साल अक्टूबर और दिसंबर में अपनी मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठकों में रेपो रेट को कुल मिलाकर दो बार बढ़ा सकता है, जिससे यह 5.30% से लगभग 6% हो जाएगा।
  • महंगाई दर में वृद्धि और बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त पैसे के कारण RBI ने रेपो रेट बढ़ाने पर विचार कर रहा है, जिससे महंगाई को नियंत्रित करने की योजना बनाई जा रही है।
  • रेपो रेट बढ़ने से कर्ज लेना महंगा होगा, जिससे बाजार में पैसा कम होगा और महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए RBI की यह रणनीति आगे आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करेगी।

घर खरीदने की सोच रहे हैं तो आपको यह खबर पढ़कर झटका लग सकता है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) इस साल के आखिर तक अपनी रेपो रेट को दो बार बढ़ा सकता है. कहा जा रहा है कि रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठकों में रेपो रेट बढ़ाया जा सकता है. 

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द हिंदू की एक खबर में कुछ मार्केट के जानकारों का कहना है कि RBI अक्टूबर और दिसंबर में होने वाली बैठक में रेपो रेट को चौथाई-चौथाई प्रतिशत बढ़ा सकता है. अभी रेपो रेट 5.30% है. अगर RBI दो बार रेपो रेट बढ़ाता है तो इस साल के आखिर तक रेपो रेट बढ़कर 6% हो सकती है.

महंगाई ने बढ़ाई RBI की चिंता 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट में बताया गया कि रेपो रेट बढ़ाने की संभावना के पीछे दो कारण बताए गए हैं. पहला, महंगाई दर में तेजी. महंगाई RBI के लिए चिंता का मुख्य कारण बनी हुई है. इसके बढ़ने के संकेत आगे भी दिख रहे हैं. भारत में खुदरा महंगाई दर अगस्त 2026 में बढ़कर 4.82% हो गई. यह जुलाई में 4.45% थी. अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि सितंबर में महंगाई दर 5% के करीब पहुंच जाएगी.

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कच्चा तेल महंगा होने से भी महंगाई और भड़कने की आशंका है. फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी सिस्टमैटिक्स ग्रुप ने कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 90-110 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बनी रहती हैं तो महंगाई RBI के पहले के अनुमानों से अधिक हो सकती है. ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें कंपनियों की लागत को बढ़ा सकती हैं. इसका असर उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली कीमतों पर पड़ सकता है.

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बैंकिंग सिस्टम में जरूरत से ज्यादा पैसा

एक और कारण है जिसकी वजह से RBI रेपो रेट में बढ़ोतरी का फैसला ले सकता है. बैंकिंग सिस्टम में भारी मात्रा में पैसा है. बैंकिंग समूह HSBC के मुताबिक एनआरआई डिपॉजिट्स स्कीम की वजह से विदेशों से खूब निवेश आया है.

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HSBC का अनुमान है कि विदेशी मुद्रा NRIs (बैंक) खाते या एफसीएनआर (बी) में आने वाले निवेश से लगभग 15 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस फंड आया है. HSBC का कहना है कि ये अतिरिक्त पैसा महंगाई का कारण बन सकती है. इस वजह से RBI रेपो रेट बढ़ा सकता है ताकि बैंकों के पास कम पैसा (जरूरतभर का क्योंकि अभी सरप्लस है) बचे. 

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