
योगी ने मदरसों के साथ संस्कृत स्कूलों को भी आधुनिक बनाने की बात कही है.
अभी तक मदरसों पर सवाल उठाए जा रहे थे कि वहां छात्रों के लिए आधुनिक पढ़ाई के इंतजाम नहीं हैं. मदरसों में सिर्फ दिनी तालीम दी जाती है. वहीं यूपी के संस्कृत स्कूलों में भी परंपरागत तरीके से ही पढ़ाई होती है. यूपी में कुल 973 संस्कृत स्कूल हैं, जिनके पढ़ाई के स्तर की वजह से वहां छात्रों की संख्या बेहद कम है. संस्कृत स्कूलों का जो सिलेबस है, वो भी 44 साल पुराना है. 2001 में जब यूपी में बीजेपी की सरकार थी, तो माध्यमिक संस्कृत शिक्षा बोर्ड का गठन किया गया था. इसके तहत इन 973 स्कूलों को रखा गया था. इसके सदस्यों का कार्यकाल 2004 में पूरा हो गया था, जिसके बाद से नए सदस्य नहीं बनाए गए थे. यूपी में जब बीजेपी की सरकार बनी थी, तो उसके बाद संस्कृत स्कूलों में सुधार की कवायद शुरू हो गई थी.

अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की मौजूदगी में सीएम योगी ने मदरसों के आधुनिकीकरण पर जोर दिया.
मदरसों और संस्कृत स्कूलों पर ये बयान सीएम योगी ने 18 जनवरी को राजधानी लखनऊ में देश के नौ राज्यों के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रियों के साथ बैठक के दौरान दियाा था. दरअसल पिछले दिनों पूरे देश के साथ ही पूरे उत्तर प्रदेश में एक खत की चर्चा थी. ये खत शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा था. इसमें उन्होंने मदरसों में आतंकवादी बनाए जाने की बात कहते हुए मदरसा शिक्षा को खत्म करने की मांग की थी. इसके बाद से ही चर्चा शुरू हो गई थी कि क्या मदरसों को खत्म किया जाएगा. वसीम रिज़वी के खिलाफ भी कुछ लोगों ने मोर्चा खोल दिया था और उनसे माफी मांगने को कहा जा रहा था. वहीं वसीम रिज़वी ने डॉन दाऊद इब्राहिम की ओर से धमकी मिलने की भी बात कही थी.
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