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कौन हैं शिया वक्फ़ बोर्ड के चेयरमैन, जिन्हें दाऊद ने बम से उड़ाने की धमकी दी है

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शिया सेंट्रल वक्फ़ बोर्ड के चेयरमैन हैं वसीम रिज़वी. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर मदरसा शिक्षा को खत्म करने की मांग की है. बोर्ड ने यूनिफॉर्म एजुकेशन सिस्टम की वकालत करते हुए सभी मदरसों को सीबीएसई और आईसीएसई पाठ्यक्रम से जोड़ने की मांग की है. इसके अलावा वसीम रिज़वी का ये भी कहना है कि मदरसों में सही ज्ञान नहीं दिया जाता है. गलत विचारों से मदरसे में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का दिमाग कट्टरपंथ की ओर जा रहा है, जो भारतीय मुसलमानों के लिए एक अभिशाप बन गया है. वसीम रिजवी का ये भी कहना है कि ज्यादातर मदरसे जकात (इस्लाम में दिए गए दान को जकात कहा जाता है) के पैसे से चल रहे हैं जो कि भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों से आ रहे हैं. इसके अलावा कुछ आतंकवादी संगठन भी अवैध रूप से चल रहे मदरसों को फंडिंग कर रहे हैं. प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी में मुर्शिदाबाद और शामली के मदरसों का भी जिक्र है, जहां आतंकवादियों को ट्रेनिंग और गोला-बारूद एक जगह से दूसरे जगह भेजने की बात की गई है.

वसीम रिज़वी के पत्र लिखने भर की देर थी कि वो लोगों के निशाने पर आ गए. सोशल मीडिया पर वसीम रिज़वी को ट्रोल किया जाने लगा. उन्हें कौम का दुश्मन करार दिया जाने लगा. कहा गया कि वो बीजेपी के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं. वसीम रिज़वी के इस पत्र के लिखने के पीछे एक लंबी कहानी है, जिसकी वजह से लोग उन्हें ट्रोल कर रहे थे, लेकिन अब मामला एक कदम आगे बढ़ गया है. वसीम रिज़वी के मुताबिक उन्हें 13 जनवरी 2018 की शाम फोन पर जान से मारने की धमकी दी गई है और ये धमकी सीधे दाऊद इब्राहिम की ओर से मिली है.

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रिज़वी ने बताया कि धमकाने वाले शख्स ने खुद को दाऊद का आदमी बताते हुए कहा कि

“वसीम रिज़वी मौलाना से बिना शर्त माफी मांगे. अगर वो माफी नहीं मांगते हैं तो अंजाम भुगतना होगा. परिवार समेत उनको बम से उड़ा दिया जाएगा.”

वसीम रिज़वी ने धमकी की लिखित शिकायत दर्ज करवाई है और कहा है कि उनके पास बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग मौजूद है. वहीं  मदरसों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के विरोध में जमात-ए-उलमा-ए-हिंद ने वसीम रिज़वी को लीगल नोटिस भेजा है. नोटिस में 20 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा किया है. जमात-ए-उलमा-ए-हिंद ने वसीम रिजवी से देश से बिना शर्त माफी मांगने को भी कहा है.

इससे पहले भी बयान देने के बाद वसीम रिज़वी को धमकियां मिली थीं और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग हुई थी. इसके बाद वसीम रिज़वी मीडिया के सामने आए थे और कहा था-

” ये पावरफुल लोग हैं. मुझे मरवा देंगे. जैसी खबरें मुझे मिल रही हैं, उससे पूरा अंदेशा है. मैं पीछे नहीं हटूंगा. अपनी कब्र तैयार करवा चुका हूं.  कब्र ले ली है. तख्ती लगवा दी है. पत्थर तैयार करवा रहा हूं.”

वसीम रिज़वी ने कहा है कि मदरसों में आतंकवादी बनने की तालीम दी जाती है.

क्या होता है वक्फ़ बोर्ड

वक्फ़ बोर्ड एक कानूनी निकाय होता है, जिसका गठन साल 1964 में भारत सरकार ने वक्फ़ कानून 1954 के तहत किया था. इसका मकसद भारत में इस्लामिक इमारतों, संस्थानों और जमीनों के सही रखरखाव और इस्तेमाल को देखना था. वक्फ़ में चल और अचल दोनों ही संपत्तियां शामिल होती हैं. इसमें कंपनियों के शेयर, अचल संपत्तियों के सामान, किताबें और पैसा भी शामिल होता है. इस्लाम मुख्य तौर पर दो भागों में बंटा है शिया और सुन्नी. देश में और देश के हर राज्य में शिया और सुन्नी के लिए अलग-अलग वक्फ़ बोर्ड है. यूपी के लिए शिया वक्फ़ बोर्ड का मुख्यालय राजधानी लखनऊ में है, जिसके चेयरमैन सैयद वसीम रिज़वी हैं.

वक्फ़ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी और शिया धर्म गुरु कल्बे जवाब के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है.

पत्र के पीछे है लंबी कहानी

सैयद वसीम रिज़वी ने प्रधानमंत्री को जो पत्र लिखा है, वो अनायास नहीं है. इसकी कहानी शुरू होती है मई 2015 से, जब सैयद वसीम रिज़वी को शिया वक्फ़ बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया था. उस वक्त प्रदेश में सपा की सरकार थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे. 2015 में जब शिया वक्फ़ बोर्ड के चुनाव होने थे, तो दो गुट आमने-सामने थे. एक गुट सपा के कद्दावर नेता और कैबिनेट मंत्री आजम खां का था, जिसकी ओर से सैयद वसीम रिज़वी को उम्मीदवार बनाया गया था. दूसरा गुट शिया धर्मगुरु कल्बे जवाद का था. 2015 के चुनाव में शिया वक्फ़ बोर्ड के पुराने चेयरमैन रहे बुक्कल नवाब ने वसीम रिज़वी का नाम प्रस्तावित किया था. वहीं कल्बे जवाद की ओर से कोई प्रत्याशी नहीं उतारा गया था. इसके बाद 26 मई को वसीम रिज़वी को शिया वक्फ बोर्ड का चेयरमैन चुन लिया गया. हालांकि मुस्लिम महिला जागरूक मंच की महिलाओं ने इसका विरोध किया और अनशन किया, लेकिन वसीम रिज़वी चेयरमैन पद पर बने रहे. हालांकि बाद में वसीम रिज़वी और आजम खां के बीच तल्खी भी आ गई थी, लेकिन कुछ दिनों के बाद स्थिति सामान्य हो गई.

जब रिज़वी बोर्ड के चेयरमैन बने थे, तो कल्बे जवाद ने इसका विरोध किया था और कई दिनों तक लखनऊ में प्रदर्शन हुए थे.

योगी बने मुख्यमंत्री, फिर तो सब बदल गया

दो साल तक तो सब ठीक चलता रहा. मार्च में जब यूपी में चुनाव हुए, तो सत्ता बीजेपी के हाथ में आ गई. बीजेपी जब यूपी में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार कर रही थी, तो उसके एजेंडे में उत्तर प्रदेश के शिया और सुन्नी वक्फ़ बोर्ड में हुए घोटालों की जांच करना भी था. मार्च में जब बीजेपी सत्ता में आ गई और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने, तो प्रदेश सरकार में मोहसिन रजा को इकलौता मुस्लिम मुख्यमंत्री बनाया गया. एक मुस्लिम चेहरे को कैबिनेट में शामिल करने के लिए विधानपरिषद का सहारा लेना पड़ा. जब योगी आदित्यनाथ ने काम संभाल लिया, तो 29 मार्च 2017 को खनऊ के हज़रतगंज कोतवाली में वक्‍फ़ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी, गुलाम सैयदैन, इंस्पेक्टर बाक़र रज़ा और दो और लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और धमकी देने का मामला दर्ज कर लिया. ये मामला कानपुर देहात के सिकंदरा में शिया वक्फ़ बोर्ड में दर्ज 2704 की ज़मीनों के रिकॉर्डों में घपलेबाजी और मुतवल्ली तौसिफुल को धमकाने का था.

बीजेपी सरकार आने पर रिज़वी के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हुए थे.

कई आरोपों में घिरते गए रिज़वी

अभी वसीम रिज़वी इससे बचने की काट खोज ही रहे थे कि मेरठ के डीएम ने शिया वक्फ़ बोर्ड चेयरमैन के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दे दिया. इसमें आरोप था कि वसीम रिज़वी ने मेरठ में वक्‍फ़ बोर्ड की 50 करोड़ रुपये की जमीन को सिर्फ 15 करोड़ रुपए में ही बेच दिया. इस मामले में वसीम रिज़वी और सब रजिस्‍ट्रार समेत कुल 13 लोगों के खिलाफ कंकरखेड़ा थाने में केस दर्ज कर लिया गया. बरेली में भी रिज़वी पर आरोप लगे कि उन्होंने वक्फ़ की ज़मीन पर बनी कुछ दुकानों को 1 करोड़ 20 लाख रुपये की पगड़ी लेकर दुकानों को 5000 रुपये हर महीने के किराए पर दे दिया था. पगड़ी का जो पैसा मिला था, उसे न तो वक्फ़ बोर्ड की प्रॉपर्टी के अकाउंट में जमा किया गया और न ही वक्फ़ बोर्ड के अकाउंट में कहीं इसका जिक्र किया गया.

इसके बाद मई में एक दिन मोहसिन रज़ा ने कहा कि बीजेपी ने चुनाव के दौरान जिस सीबीआई जांच का वादा किया था, वो जल्दी ही शुरू हो जाएगी. इस बयान के बाद से ही पूरे प्रदेश के वक्फ़ बोर्ड के सदस्यों और खास तौर पर मुतवल्लियों ( मुतवल्ली वक्फ बोर्ड के वो अधिकारी होते हैं, जो अलग-अलग जिलों या जगहों पर वक्फ संपत्ति की देखभाल करते हैं) में हड़कंप मच गया. इसमें सबसे ज्यादा परेशान होने वालों में वक्फ़ बोर्ड के चेयरमैन सैयद वसीम रिज़वी थे.

कैबिनेट मंत्री मोहसिन रज़ा ने सीबीआई जांच के लिए कहा था, जिसके बाद यूपी में हंगामा हो गया था.

बर्खास्त कर दिए गए थे रिज़वी

अभी सीबीआई जांच शुरू होती या फिर प्रदेश सरकार केंद्र सरकार से इस बात के लिए आग्रह करती, उससे पहले ही जून 2017 में योगी सरकार ने वक्फ़ चेयरमैन वसीम रिज़वी समेत नामित सदस्यों अख्तर हसन रिज़वी, सैयद वली हैदर, अफशां जैदी, मौलाना आजिम हुसैन जैदी, आलिम जैदी और नजमुल हसन रिजवी को उनके पद से बर्खास्त कर दिया. वहीं दो और सदस्यों सैयद साजिद अली और शादाब फातिमा ने पहले ही इस्तीफा दे दिया था.

वसीम रिज़वी बर्खास्त हुए तो उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया. इसके अलावा उनके सुर भी बदलने शुरू हो गए. एक दिन उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि शिया वक्फ़ बोर्ड सीबीआई जांच के लिए तैयार है. लेकिन यूपी सरकार ये जांच नहीं करवाएगी, क्योंकि उसके मंत्री मोहसिन रज़ा ने भी मुतवल्ली रहते हुए करोड़ों का घोटाला किया है. अगर जांच होती है, तो वो खुद भी फंसेंगे. इसके अलावा वसीम रिज़वी ने बीजेपी के बड़े नेता मुख्तार अब्बास नकवी पर भी आरोप लगाते हुए कहा था कि जांच में नकवी भी घेरे में आएंगे.

पद से बर्खास्तगी के बाद शिया सेंट्रल वक्फ़ बोर्ड अध्यक्ष सैयद वसीम रिज़वी और सदस्यों ने योगी सरकार के खिलाफ कोर्ट जाने का फैसला लिया. कोर्ट ने भी सरकार के फैसले पर रोक लगा दी. कोर्ट के आदेश पर वसीम रिज़वी समेत और लोग बहाल कर दिए गए, लेकिन उसके बाद से ही वसीम रिजवी के सुर पूरी तरह बदल गए.

वसीम रिज़वी ने अयोध्या में मंदिर बनवाने के लिए चांदी के तीर देने का ऐलान किया था. उन्होंने अयोध्या जाकर साधु-संतों से मुलाकात भी की थी.

बदलने लगे सुर

जब अक्टूबर 2017 में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले में मध्यस्थता की बात की, तो रिज़वी ने कहा कि अयोध्या में कोई मस्जिद नहीं थी, सिर्फ राम मंदिर ही था. इसके अलावा सैयद वसीम रिज़वी ने कहा कि शिया वक्फ़ बोर्ड राम मूर्ति के लिए चांदी के 10 तीर देगा. उस वक्त भी शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने के संस्थापक और महासचिव मौलाना सैय्यद अली हुसैन रिजवी कुम्मी ने कहा था कि वसीम रिज़वी शिया कौम को बदनाम कर रहे हैं. वह खुद को कानूनी गिरफ्त से बचाने के लिए आरएसएस की भाषा बोल रहे हैं. उन्होंने कहा था कि शिया वक्फ़ बोर्ड की करोड़ों की प्रॉपर्टी पर अवैध कब्जा कर जमानत पर छूटने वाला कौम का नेता बनना चाह रहा है. इससे पहले भी वसीम रिज़वी ने मंदिर के हिन्दू पक्षकार महंत सुरेश दास से बात की थी और कहा था कि अयोध्या में मंदिर ही बनना चाहिए.

रिज़वी ने श्री श्री रविशंकर से मुलाकात कर अयोध्या में मंदिर होने की बात कही थी.

तीन तलाक पर जब पूरे देश में बहस चल रही थी और केंद्र की बीजेपी सरकार एक बिल लाने की तैयारी कर रही थी, तो उस वक्त भी वसीम रिज़वी ने बीजेपी के स्टैंड का समर्थन किया था. बतौर शिया वक्फ बोर्ड चैयरमैन उन्होंने कहा था कि तीन तलाक देने वालों के खिलाफ रेप का केस दर्ज होना चाहिए. जब लोकसभा में बिल पेश किया गया और उसमें तीन तलाक देने वालों के लिए तीन साल की सजा का प्रावधान किया गया, तो उस वक्त भी वसीम रिज़वी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था. इसमें मांग की गई थी कि जो तीन तलाक दे रहा है, उसे 10 साल की सजा दी जाए.

अब जब योगी सरकार ने मदरसों पर निगाह रखने की बात कही है. मदरसों की छुट्टियों में कटौती कर दी है और रक्षाबंधन, महानवमी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों पर छुट्टी घोषित कर दी, तो वसीम रिज़वी ने मदरसों पर ही सवाल उठा दिए. योगी सरकार ने मदरसों के लिए पोर्टल बनाकर रजिस्ट्रेशन जरूरी करने और 15 अगस्त-26 जनवरी को झंडा फहराने के दौरान वीडियोग्राफी करवाने का आदेश दिया, तो वसीम रिज़वी उससे भी एक कदम आगे निकल गए. उन्होंने मदरसों पर ही सवालिया निशान लगा दिया और कहा कि मदरसों की तालीम से बच्चे इंजीनियर, डॉक्टर या फिर आईएएसस नहीं, आतंकवादी बन रहे हैं. उन्हें बम बनाने की तालीम दी जा रही है.


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