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गिरफ्तारी का डर है, इसीलिए रूस से नहीं निकल रहे पुतिन?

दक्षिण अफ्रीका में मांग उठ रही है कि पुतिन को आते ही गिरफ्तार किया जाए. लेकिन क्या किसी देश के राष्ट्रपति को इस तरह गिरफ्तार किया जा सकता है?

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इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने पुतिन के ख़िलाफ़ अरेस्ट वारेंट जारी किया हुआ है.

ब्रिक्स सम्मलेन अगले महीने माने अगस्त में हो रहा है. कहां? साउथ अफ्रीका में. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी इसमें दावत दी गई है. पर अब ख़बर आई है कि वो इस सम्मलेन में हिस्सा लेने नहीं जाएंगे. वजह? शायद उन्हें गिरफ्तारी का डर है. कम से कम उनके आलोचक तो यही कह रहे हैं. पुतिन इसके बदले वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए सम्मलेन में जुड़ेंगे. दरअसल इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ अरेस्ट वारेंट निकाला हुआ है. उनके युद्ध अपराधों को लेकर. इसलिए उनपर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. वहां का विपक्ष भी मांग कर रहा था कि जैसे ही वो मीटिंग के लिए हमारे देश आएं, उन्हें गिरफ्तार कर लेना चाहिए.  

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ब्रिक्स, दुनिया की पांच सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है. पांच अंग्रेज़ी अक्षर हैं - B R I C S - जिनमें हर अक्षर एक देश का प्रतिनिधित्व करता है. ये देश हैं ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका. साउथ अफ्रीका 15वें ब्रिक्स सम्मलेन की मेज़बानी कर रहा है, जोहानेसबर्ग में. ये 22 से 24 अगस्त तक चलेगा. इसी सम्मलेन में पुतिन को दावत दी गई है. 

गिरफ्तारी वॉरंट के पीछे वजह क्या है?

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फरवरी 2022 में पुतिन ने यूक्रेन पर आक्रमण कर दिया. उनपर युद्ध अपराध के आरोप लगे हैं. मार्च 2023 में ICC, माने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ अरेस्ट वॉरंट जारी कर दिया. ICC ने कहा कि पुतिन पर यूक्रेन में युद्ध अपराधों के संबंध में मामला चलाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं. कहा गया अगर पुतिन देश के बाहर गए, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए. साउथ अफ्रीका ICC का हस्ताक्षरकर्ता है. इसलिए कहा जा रहा था कि जब पुतिन ब्रिक्स सम्मलेन के लिए वहां जाएं तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाना चाहिए. सनद रहे कि अरेस्ट वॉरंट निकलने के बाद पुतिन किसी भी विदेश यात्रा पर नहीं गए हैं.  

पुतिन को गिरफ़्तार करने के लिए सबसे ज़्यादा मांग साउथ अफ्रीका की विपक्षी पार्टी - डेमोक्रैटिक अलायंस कर रही थी. पार्टी के कई नेता अदालत जाकर अधिकारियों पर दबाव बना रहे थे कि जैसे ही पुतिन देश में कदम रखें उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए. राष्ट्रपति रामाफोसा इसके ख़िलाफ़ बयान दे चुके हैं. एक हलफ़नामे में भी उन्होंने कहा है कि पुतिन को गिरफ्तार करना और उन्हें आत्मसमर्पण के लिए कहना साउथ अफ्रीका के लिए समस्या पैदा कर देगा. 

वॉरंट पर रूस का क्या कहना है?

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व्लादिमीर पुतिन रूस के राष्ट्रपति हैं. इसीलिए इस मामले पर रूस की लाइन वही है, जो किसी भी देश की होती. रूस साफ-साफ कह चुका है कि पुतिन की गिरफ्तारी को वो युद्ध की घोषणा मानेगा. वैसे भी रूस ICC के रोम समझौते का हिस्सा नहीं है. माने वो ICC के ज्यूरिस्डिक्शन को नहीं मानता. 

रूस की लाइन तो क्रिस्टल क्लीयर है. लेकिन ये स्थिति दक्षिण अफ्रीका के लिए असहज करने वाली है. संभवतः इसीलिए अब रूस ने कहा है कि पुतिन इस सम्मलेन में हिस्सा लेने के लिए साउथ अफ्रीका नहीं जाएंगे. बल्कि वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए इससे जुड़ेंगे और उनके बदले रूस को रिप्रेजेंट करने विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को भेजा जाएगा. पुतिन के साउथ अफ्रीका न जाने की वजह रूस ने अभी तक सार्वजनिक नहीं की है. इसको लेकर इंडिया टुडे की फॉरेन अफेयर्स एडिटर गीता मोहन ने ट्विटर में भी जानकारी साझा की है.

क्या किसी देश के राष्ट्रपति को दूसरे देश में गिरफ्तार किया जा सकता है? 

इस सवाल के जवाब के लिए 3 बिंदुओं पर गौर कीजिए -

पहला - मार्च में जब ICC ने ये अरेस्ट वारेंट जारी किया था तब क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने इसे अमान्य बता दिया था. उन्होंने कहा था कि रूस ICC का मेंबर नहीं है इसलिए पुतिन को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता. 

दूसरा -  न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अगर पुतिन किसी ऐसे देश में यात्रा करते हैं जो ICC का मेंबर हैं तो वहां से पुतिन को गिरफ्तार किया जा सकता है. हालांकि ये बात भी सही है कि अब तक किसी भी हेड ऑफ़ स्टेट को ICC गिरफ्तार कर पाने में कामियाब नहीं हुई है. 

तीसरा - डिप्लोमैटिक इम्यूनिटी. इस विषय को विस्तार से समझने के लिेए दी लल्लनटॉप ने बात की प्रोफ़ेसर अमिताभ से, जो JNU में रशियन स्टडीज़ पढ़ाते हैं. उन्होंने बताया,

‘’जिनीवा कन्वेंशन के तहत किसी भी एक्टिंग हेड ऑफ़ द स्टेट को अरेस्ट नहीं किया जा सकता. उन्हें डिप्लोमेटिक इम्यूनिटी दी गई है. दूसरे डिप्लोमैट, जैसे राजदूत वगैरह, अगर ये ट्रैफिक लाइट भी वायलेट करते हैं तो उनपर कार्रवाई नहीं होती. न ही उनसे फाइन लिया जाता है. बस उनको एक नोटिस भेजा जाता है. अगर मामला संगीन हो तो उस संबंधित देश को नोटिस दिया जाएगा. या उनकी डिप्लोमेटिक इम्यूनिटी वापस ले ली जाएगी.'' 

तो कुल जमा बात ये है कि पुतिन को दक्षिण अफ्रीका में गिरफ्तार तो नहीं ही किया जा सकता. लेकिन फिर भी वो साउथ अफ्रीका नहीं जा रहे हैं. अब इसे चाहे जैसे देखा जाए.


 

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