ट्रंप प्रशासन ने TCS, इंफोसिस, विप्रो, HCLTech, माइक्रोसॉफ्ट, एडोब, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी जैसी आठ बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए PERM फाइलिंग रोक दी है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कंपनियों पर अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन वाले विदेशी प्रोफेशनल्स को रखने का आरोप लगाया है, जिस पर भारतीय सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. लेकिन ट्रंप के इस फैसले से भारत के 315 अरब डॉलर के IT उद्योग को असल में कितना नुकसान होगा? 'खर्चा पानी' के इस एपिसोड में हम PERM और H-1B वीजा के बीच का अंतर बताएंगे, साथ ही यह भी समझेंगे कि ग्रीन कार्ड से जुड़ी पाबंदियों का अमेरिका में काम कर रहे भारतीय प्रोफेशनल्स पर क्या असर पड़ेगा और TCS व इंफोसिस जैसी कंपनियों ने अमेरिकी इमिग्रेशन प्रोग्राम्स पर अपनी निर्भरता कैसे कम की है.
खर्चा-पानी: TCS, Infosys पर Trump का शिकंजा, भारतीय IT इंडस्ट्री को कितना नुकसान?
ट्रंप प्रशासन ने TCS, इंफोसिस, विप्रो, HCLTech, माइक्रोसॉफ्ट, एडोब, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी जैसी आठ बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए PERM फाइलिंग रोक दी है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कंपनियों पर अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन वाले विदेशी प्रोफेशनल्स को रखने का आरोप लगाया है, जिस पर भारतीय सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
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हम यह भी देखेंगे कि क्या अमेरिका के सख्त इमिग्रेशन नियमों से भारत में ऑफशोरिंग और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे भारतीय टेक टैलेंट के लिए नए मौके बन सकें. क्या ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' पॉलिसी से अमेरिका के बाहर और ज़्यादा मौके पैदा हो सकते हैं? जानने के लिए देखें खर्चा-पानी का ये एपिसोड.
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