सुप्रीम कोर्ट की एक संवैधानिक बेंच ने 2012 में दिए एक फैसले में कहा था कि आने वाले 10 सालों के भीतर (माने 2022 तक) केंद्र हज सब्सिडी खत्म कर दे.
क्या थी हज सब्सिडी?
हज पर सब्सिडी का इतिहास बहुत पुराना है. 1932 में अंग्रेज़ सरकार ने 'द पोर्ट हज कमिटीज़ एक्ट' बनाया. इसके तहत सरकारी खर्च पर हज कमिटी बनी जो बंबई और कलकत्ता से पानी के रास्ते लोगों को हज पर भेजती थी. लोगों को हज ले जाने पर सरकार की मोनोपॉली थी और लोग सिर्फ मुगल लाइन शिप्स से सउदी अरब जा सकते थे जिन्हें ब्रिटेन की टर्नर मॉरिसन एंड कंपनी चलाती थी.

मुख्तार अब्बास नक़वी केंद्र में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री हैं. (फोटोःपीटीआई)
आज़ादी के बाद 1959 में भारत सरकार ने 1932 वाला कानून खत्म कर दिया और नया हज कमिटी एक्ट पास किया. इसके तहत हज फंड बना, जो हज पर जाने वालों को आर्थिक मदद देता था. लोग पानी के जहाज़ और जेट प्लेन, दोनों से हज पर जाते रहे. ये कुछ दिन चला. फिर तेल की कीमतें बढ़ गईं और जेट यात्रा बहुत महंगी हो गई. दूसरी तरफ पानी के रास्ते सउदी तक का सफर बहुत लंबा और थका देने वाला था, तो उस रास्ते भी लोग कम हो गए. ये देखते हुए 1973 में इंदिरा गांधी की सरकार ने सब्सिडी में बदलाव किया और जेट यात्रा पर सब्सिडी देना शुरू किया ताकि लोग प्लेन से सउदी अरब जा सकें.
1995 से सउदी तक की यात्रा अनिवार्यतः प्लेन से होने लगी. इसका सीधा फायदा मिला एयर इंडिया को, क्योंकि अंग्रेज़ सरकार की तरह ही भारत सरकार की भी हज यात्रा पर मोनोपॉली है. हज कमिटी के ज़रिए जाने वाले हाजियों को एयर इंडिया के प्लेन से ही जद्दा जाना पड़ता है. चूंकि एयर इंडिया के पास सभी हाजियों को ले जाने लायक प्लेन होते नहीं, तो वो हज यात्रियों के लिए चार्टर्ड फ्लाइट किराए पर लेता है जो जद्दा से खाली वापस आता है. नतीजतन हज यात्रा के लिए जद्दा तक का टिकट सामान्य से कहीं ज़्यादा महंगा होता है. इसी बढ़े हुए किराए पर सरकार सब्सिडी देती है.

हज सब्सिडी का बड़ा हिस्सा हवाई यात्रा पर खर्च होता है. (फोटोः पीटीआई)
इसके अलावा सब्सिडी का एक हिस्सा हाजियों को विशेष हज डिपार्चर टर्मिनल (एयरपोर्ट) तक लाने-ले जाने पर भी खर्च होता है. इसमें खाना, पीना और डॉक्टरी मदद भी शामिल होती है.
भारत सरकार का अनुमान है कि हज सब्सिडी खत्म करने से हर साल तकरीबन 700 करोड़ रुपए बचेंगे.
ये भी पढ़ेंः
उस गे इंडियन आदमी की कहानी जो चोरी-छिपे हज पर गया
राम को हज से क्या दिक्कत हो सकती है?
अकेली औरत के हज जाने वाले नियम पर ओवैसी सही निकले और PM मोदी गलत
पैगंबर मुहम्मद के वक़्त का वो दूसरा पैगंबर, जो काबे की तरफ मुंह कर के नमाज़ पढ़ने को मूर्तिपूजा कहता था










