अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपने दूतों के लिए नया फरमान जारी किया है. फरमान ईरान से जुड़ा है. ईरान और अमेरिका के बीच साइन हुए ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) के मुताबिक, ईरान को जंग के नुकसान से उबरने के लिए 300 बिलियन डॉलर (करीब 28.40 लाख करोड़ रुपये) का जिक्र है. अभी तक इसकी सुध नहीं ली गई. अब जब ईरान ने अमेरिका को याद दिलाया, तो ट्रंप का रुख अलग ही निकला. उल्टा उन्होंने खुद ईरान से पैसे मांग लिए और अपने दूतों को ये बात ईरान तक पहुंचाने को कह दिया.
ईरान को 28 लाख करोड़ मिलने थे, ट्रंप उल्टा तेहरान से हर्जाना मांगने लगे, वजह भी बताई
Trump rejects Iran demands: ईरान ने अमेरिका से 300 बिलियन डॉलर (लगभग 28.40 लाख करोड़ रुपये) हर्जाने की मांग की थी. जब ईरान ने अमेरिका को याद दिलाया तो डॉनल्ड ट्रंप ने उल्टा ईरान से हर्जाना लेने की मांग कर दी.

डॉनल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट किया. इसमें उन्होंने जोर दिया कि किसी मीटिंग या बातचीत में ईरान को हर्जाना देने की शर्त थी ही नहीं. आगे लिखा,
‘ये आईडिया अच्छा है! ऐसा क्यों नहीं करते कि आप (ईरान) हमें मुआवजा दे दीजिए. ईरान ने बीते 50 सालों में जितने भी प्रदर्शनकारियों को मारा है उनके परिवार को हर्जाना मिलना चाहिए. और बीते पांच महीनों में आपकी वजह से जिन 52000 लोगों की जान गई है उनके परिवार वालों को भी. मैंने अपने प्रतिनिधियों को आदेश दिया है कि अगली बातचीत में ये शर्त रखी जाए.’
प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के पूर्व मिलिट्री कमांडर कासिम सुलेमानी का भी ज़िक्र किया. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने भी जितने लोगों को मारा है उनके परिजनों को भी हर्जाना मिलना चाहिए. उन्होंने ये भी कहा कि लेबनान, यमन, सीरिया और गाजा में भी हुई मौतों का ज़िम्मेदार भी ईरान ही है.

क्या MoU में ईरान को हर्जाना देने की शर्त थी? इसका सीधा जवाब 'हां' या ‘ना’ में नहीं है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका से 300 बिलियन डॉलर (लगभग 28.40 लाख करोड़ रुपये) हर्जाने की मांग की. ये डिमांड अमेरिका-इजरायली हमले में ईरान को पहुंचे नुकसान की भरपाई के लिए की गई.
अमेरिका और ईरान के बीच साइन ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) में 300 बिलियन डॉलर का जिक्र है. लेकिन इसमें सीधे ये नहीं लिखा कि ये पैसा हर्जाने के तौर ईरान को मिलेगा. यह भी नहीं लिखा कि अमेरिकी सरकार खुद ईरान को ये रकम देगी.
MoU में अमेरिका ने सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों के साथ मिलकर ईरान के रिकंस्ट्रक्शन और इकोनॉमिक डेवलपमेंट के लिए कम से कम 300 बिलियन डॉलर का प्लान बनाने पर सहमति जताई. लेकिन ये कैसे होगा, इसका तरीका MoU साइन होने के 60 दिन के अंदर फाइनल डील में तय करने की बात कही गई. इसके अलावा ईरान के फ्रोजेन एसेट को रिलीज़ करने की भी बात हुई थी.
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ईरान ने क्या कहा था?डॉनल्ड ट्रंप का ये पोस्ट ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई के बयान के बाद आया है. उन्होंने कहा था कि ईरान स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज तब तक नहीं खुलेगा जब तक अमेरिका ईरान पर लगे इकोनॉमिक सैंक्शन नहीं हटाता, फ्रोजेन एसेट रिलीज़ नहीं करता और वादा किया हुआ हर्जाना नहीं देता.
ईरान और अमेरिका के बीच जो मेमोरेंडम साइन हुआ था, उसपर दोनों ही देशों ने अमल नहीं किया. कुछ ही दिनों बाद दोनों एक-दूसरे पर हमले करने लगे. अब होर्मुज पर फिर सवाल खड़ा हो गया है. ईरान ने साफ किया है कि जब तक उसकी शर्तें नहीं मानी जाती हैं तब तक होर्मुज बंद ही रहेगा.
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