महाराष्ट्र के मुंबई में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने एक ब्लिंकइट स्टोर (Blinkit store) पर रेड मारी और फिर उसका लाइसेंस रद्द कर दिया. बताया गया कि स्टोर में फलों और सब्जियों पर कॉकरोच घूम रहे थे. चारों तरफ गंदगी फैली थी. FDA अधिकारियों ने बताया कि स्टोर ने नियमों का उल्लंघन किया है.
Blinkit स्टोर में फलों-सब्जियों पर घूम रहे थे कॉकरोच, गंदगी का भंडार, FDA ने रद्द किया लाइसेंस
Mumbai Blinkit store: मुंबई के एक ब्लिंक इट स्टोर में FDA की रेड के दौरान पता लगा कि कुछ फूड आइटम्स एक्सपायर हो चुके थे, जबकि कुछ पैकेट डैमेज थे. अधिकारियों ने बताया कि स्टोर में फलों पर कॉकरोच लगे हुए थे. FDA ने तत्काल प्रभाव से लाइसेंस रद्द कर दिया.

मलाड-वेस्ट इलाके में इस क्विक कॉमर्स फैसिलिटी पर 7 अगस्त को रेड मारी गई थी. इंडिया टुडे से जुड़े दीपेश त्रिपाठी की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ फूड आइटम्स ऐसे ही फर्श पर पड़े थे. जिस रैक पर सामान रखा था उसमें भी जंग लगा था. ये भी बताया गया कि कोल्ड-स्टोरेज सही हालत में नहीं था और पेस्ट कंट्रोल नियम भी लागू नहीं किए गए.
दुकान से क्या-क्या मिला?रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ फूड आइटम्स एक्सपायर हो चुके थे, जबकि कुछ पैकेट डैमेज थे. अधिकारियों ने बताया कि स्टोर ने रैक में सामान को सही तरीके से नहीं रखा था. नियमों के मुताबिक फूड आइटम्स को तीन कैटेगोरी में बांटा जाता है - फर्स्ट इन, फर्स्ट आउट एंड फर्स्ट एक्सपायरी और फर्स्ट आउट.
FDA के अधिकारियों ने बताया कि स्टोर के कचरे को भी ठीक तरह से ट्रीट नहीं किया गया. उनका ये भी आरोप है कि स्टोर के कर्मचारी भी अपने पर्सनल हाइजीन का ख्याल नहीं रख रहे थे. जब उनकी मेडिकल जांच कराई गई तब उनमें कुछ अनियमितताएं भी पाई गईं. रेड के बाद फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 की धारा 32 (3) के तहत FDA ने Blinkit स्टोर का लाइसेंस रद्द कर दिया.
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मुंबई के कई आउटलेट बंदमहाराष्ट्र FDA के नए कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने पूरे महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी अभियान चलाया है. इस अभियान के तहत अब तक 3,137 होटलों और रेस्टोरेंट पर छापेमारी हुई है. रेड के बाद 764 आउटलेट को सुधार के लिए नोटिस भेजा गया है और 165 आउटलेट का लाइसेंस रद्द किया गया है.
लाइसेंस रद्द होने के बाद कुछ आउटलेट ने कोर्ट में याचिका दायर की. अब तक 103 याचिकाएं दायर हुई हैं और कुछ केस में कोर्ट ने राहत भी दी है. तुकाराम मुंढे का कहना है कि उनका मकसद खाने के दुकान बंद करना नहीं बल्कि फूड आउटलेट की क्वालिटी में सुधार लाना है.
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