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ईरान को 28 लाख करोड़ रुपये दिए जाएंगे, अब पता चला ट्रंप ये पैसा कहां से लाएंगे

Iran deal 300 billion dollers: Iran-US डील में ईरान को 300 बिलियन डॉलर (लगभग 28.40 लाख करोड़ रुपये) की रकम मुआवजे के तौर पर दी जाएगी. लेकिन अमेरिका का कहना है कि ये पैसे ईरान को तभी दिए जाएंगे, जब वो सारी शर्तें मान लेगा. पर सवाल ये कि डॉनल्ड ट्रंप इतना पैसा लाएंगे कहां से? अगर अपनी जेब से देंगे तो उनके देश में बवाल मचेगा, इसलिए ये पैसा कहीं और से आ रहा है.

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17 जून 2026 (अपडेटेड: 18 जून 2026, 10:16 AM IST)
iran deal 300 billion problem:
डील में ईरान को 300 बिलियन डॉलर डेवलपमेंट के लिए दिए जाएंगे. (फोटो- इंडिया टुडे)
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अमेरिका और ईरान के बीच पीस डील 19 जून को साइन हो जाएगी. 14 पॉइंट के मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर बात बन गई है. स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज खुल जाएगा और जंग हमेशा के लिए रुक जाएगी. यानी सब कुछ सेट है. लेकिन क्या वाकई सब कुछ सेट है? क्या अमेरिका ईरान को इकोनॉमिक डेवलपमेंट के लिए सच में 300 बिलियन डॉलर (लगभग 28.40 लाख करोड़ रुपये) देगा? और अगर हां तो क्या ट्रंप अपनी जेब से ईरान को मुआवज़ा देंगे? ईरान को एक्चुअल में इस डील से क्या फायदा होगा? इन्हीं सवालों के जवाब तलाशेंगे. 

मेमोरेंडम में ईरान के लिए तीन बड़े ऐलान किए गए हैं. ईरान अपना तेल खुलकर बेच पाएगा, उसके फ्रोजेन एसेट रिलीज़ कर दिए जाएंगे और उसे भुगतान के तौर पर अमेरिका 300 बिलियन डॉलर देगा. लेकिन एक्सिओस की रिपोर्ट के मुताबिक यहां एक लूपहोल है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान गलत जानकारी फैला रहा है. असल में ईरान को ये पैसे तभी मिलेंगे, जब वो सारी शर्तें मानेगा. जिसमें सबसे अहम शर्त है ‘न्यूक्लियर हथियार’ पर रोक लगाना. इसे ‘पे फॉर परफॉरमेंस’ (Pay for Performance) स्ट्रक्चर कहा जाता है. 

मेमोरेंडम में फाइनेंस की शर्तें

एग्रीमेंट साइन होने के बाद दोनों देशों के बीच 60 दिन तक बातचीत चलेगी. जिसमें ‘न्यूक्लियर मुद्दे’ पर डिटेल डिस्कशन होगा. मौजूदा ड्राफ्ट के मुताबिक अमेरिका और ईरान अपने पार्टनर देशों के साथ एक प्लान तैयार करेंगे. जिसमें ईरान के पुनर्वास और आर्थिक विकास के लिए 300 बिलियन डॉलर देने का प्रस्ताव है. साथ ही जैसे-जैसे डील आगे बढ़ेगी वैसे-वैसे अमेरिका ईरान के फ्रोजेन फंड और एसेट रिलीज़ करता जाएगा. यानी ये ईरान के परफॉरमेंस के हिसाब से रिलीज़ होगा. 

ड्राफ्ट अभी तक पब्लिक स्पेस में नहीं आया है. लेकिन ईरानी मीडिया का दावा है कि ईरान के कुछ फ्रोजेन फंड बातचीत के शुरुआती फेज में ही रिलीज़ कर दिए जाएंगे. इसके अलावा ईरान पर ‘तेल बेचने’ पर लगे सैंक्शन भी हटाए जाएंगे. फाइनल एग्रीमेंट तक आते आते सैंक्शन पूरी तरह हटाए जा सकते हैं.  

ट्रंप 300 बिलियन डॉलर कहां से लाएंगे?   

डॉनल्ड ट्रंप मंगलवार को UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद और क़तर के अमीर शेख तमीम बिन हमद से मिले. रिपोर्ट के मुताबिक, ये दोनों देश ट्रंप के साथ मिलकर भुगतान राशि का इंतजाम करेंगे. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका और भी देशों की ताक में हैं जो ये पैसे जमा करने में उनकी मदद कर सकें. ईरान का दावा है कि अमेरिका के खिलाफ जंग में उसे करीब 250 बिलियन डॉलर का नुकसान पहुंचा है. 

रिपोर्ट के मुताबिक, ये आईडिया क़तर ने दिया था. कई हफ़्तों की बातचीत के बाद इसपर सहमति बनी है. लेकिन शर्त यही है कि ईरान को सभी शर्तें माननी होंगी. अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD वांस ने फॉक्स न्यूज़ को बताया कि ये पैसे अमेरिकी नागरिकों से नहीं लिए जाएंगे. और ये तभी होगा जब ईरान न्यूक्लियर हथियार बनाने की ज़िद छोड़ देगा. ईरान को अपना एनरिच्ड यूरेनियम त्यागना होगा और न्यूक्लियर इंस्पेक्शन पर सहमति जतानी होगी. 

ये भी पढ़ें: PM मोदी ने अमेरिकी हमले में भारतीयों की मौत का मुद्दा उठाया, G7 समिट में ट्रंप को गले नहीं लगाया

परफॉरमेंस बेस्ड डील? 

रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट का मानना है कि ट्रंप ने 2015 में ओबामा सरकार की ईरान डील की निंदा की है. लेकिन वे वही पुरानी रणनीति अपना रहे हैं. ईरान के साथ डील के बदले उसके फ्रोजेन एसेट को रिलीज़ करना. बताया गया कि दुनिया भर में ईरान के फ्रोजेन एसेट 24 से 100 बिलियन डॉलर तक हो सकते हैं. इसमें से 12 बिलियन डॉलर 1979 में फ्रीज कर लिए गए थे जब ईरान में शाह का तख्तापलट हुआ था. 

एक अमेरिकी अधिकारी का दावा है कि ये डील पूरी तरह से ईरान की परफॉरमेंस पर निर्भर करती है. ईरान ने अगर शर्त मानी तो उसपर लगे सैंक्शन हट जाएंगे, फ्रोजेन एसेट पूरे रिलीज़ कर दिए जाएंगे और 300 बिलियन डॉलर का भुगतान प्लान भी पूरा हो जाएगा. ऐसे में देखना होगा कि क्या ईरान शर्तें मानकर मुआवज़े के पैसे ले लेगा या फिर न्यूक्लियर हथियार बनाने की ज़िद पर टिका रहेगा.

वीडियो: ईरान अमेरिका तनाव के बीच भारतीय नाविकों की मौत, International Maritime Law क्या है?

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