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बस होर्मुज खुल जाए तो युद्ध से पीछे हट जाएंगे! ईरान पर ढीले पड़े ट्रंप के तेवर

Donald Trump ने यहां तक इशारा किया की Iran अगर Strait of Hormuz खोल दे, तो वे तेहरान के साथ नया न्यूक्लियर एग्रीमेंट किए बिना ही पीछे हट सकते हैं. यह अमेरिकी नजरिए में एक बड़ा बदलाव होगा.

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डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ न्यूक्लियर डील से पीछे हटने का संकेत दिया. (PTI)

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  • अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि वे ईरान पर और घातक हमले करने के मूड में नहीं हैं और इसके बजाय आर्थिक दबाव का इस्तेमाल करेंगे ताकि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से खुल सके।
  • ट्रम्प प्रशासन ने यह निर्णय लिया क्योंकि वह मानता है कि ईरान पर सैन्य हमले करना फायदे का सौदा नहीं है और आर्थिक दबाव देने से ईरान को डील के लिए मजबूर किया जा सकता है।
  • ट्रम्प के फैसले से युद्ध से बचने की संभावना बढ़ी है और अमेरिका ईरान को न्यूक्लियर डील से छूट देने पर विचार कर रहा है, यदि ईरान होर्मुज में शिपिंग बहाल करता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि वे ईरान पर और घातक हमले करने के मूड में नहीं हैं. उनके एडमिनिस्ट्रेशन ने उन्हें समझाया कि ईरान पर और हमले करना फायदा का सौदा नहीं है. ट्रंप चाहते हैं कि ईरान जल्द से जल्द स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोल दे. अमेरिकी प्रेसिडेंट इसके लिए जंग के बजाय इकोनॉमिक प्रेशर का इस्तेमाल करेंगे. ट्रंप सरकार का मानना ​​है कि जंग के मुकाबले आर्थिक दबाव ईरान को डील करने के लिए ज्यादा मजबूर कर सकता है.

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अमेरिकी न्यूज पोर्टल Axios से बात करते हुए डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जंग लड़ने से इतर कुछ अलग करने का रुख अपनाया. रविवार, 9 अगस्त को ट्रंप ने कहा कि वे ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की इजाजत देने के लिए तैयार हैं. ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका इस समय ईरान को ज्यादा तूल नहीं दे रहा है.

क्या बोले डॉनल्ड ट्रंप?

राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा,

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हम उन्हें (ईरान को) कम तवज्जो दे रहे हैं. हम उनके साथ बस थोड़ी-बहुत बातचीत कर रहे हैं. हम बस ईरान की भारी महंगाई और इस बात पर नजर रख रहे हैं कि उनके पास पैसे नहीं हैं."

उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान आर्थिक रूप से 'बहुत बुरे हाल में' है. उसके पास अपने सैनिकों की सैलरी देने के लिए पैसे नहीं हैं. ट्रंप ने कहा कि होर्मुज पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी ने ईरानी सरकार के आर्थिक संकट को और बढ़ा दिया है.

'शतरंज के खेल जैसा'

डॉनल्ड ट्रंप के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत 75 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से थोड़ी ज्यादा है, जिससे अमेरिकियों को युद्ध से होने वाली दिक्कत कम हो रही है. ईरान के साथ चल रही इस खींचतान पर ट्रंप ने कहा,

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"सब ठीक हो जाएगा. हमेशा सब ठीक हो जाता है. यह शतरंज के खेल जैसा है."

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर आवाजाही कंट्रोल करने वाले एक समझौते पर ईरान, ओमान और अमेरिका के बीच बातचीत हुई थी. कुछ दिनों से बातचीत पेंडिंग है. अमेरिका का मानना है कि होर्मुज पर उसके नेवेल ब्लॉकेड से ईरान अपना तेल-गैस नहीं बेच पा रहा है. इससे उसकी कमाई कम हो गई है.

ईरान को न्यूक्लियर छूट?

युद्ध से पीछे हटना तो छोड़िए, डॉनल्ड ट्रंप तो ईरान के साथ न्यूक्लियर डील करने से भी पीछे हटते दिखाई दे रहे हैं. अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की खबर में दावा किया गया कि होर्मुज खोलने के बदले ट्रंप ईरान को न्यूक्लियर डील से छूट दे सकते हैं.

रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रंप ने अपने सीनियर सहयोगियों को इशारा दिया कि अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग पूरी तरह से बहाल कर देता है, तो वह तेहरान के साथ नया न्यूक्लियर एग्रीमेंट किए बिना ही पीछे हट सकते हैं. यह अमेरिकी नजरिए में एक बड़ा बदलाव होगा.

अमेरिका का न्यूक्लियर डील से पीछे हटने का मतलब होगा ईरान को परमाणु बम बनाने की छूट देना. लेकिन, ट्रंप प्रशासन मानता है कि उसने ईरान की न्यूक्लियर कैपिसिटी को तहस-नहस कर दिया है. अगर तेहरान परमाणु बम बनाने की जरा भी कोशिश करेगा, तो अमेरिकी इंटेलिजेंस को खबर हो जाएगी.

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सवाल खड़ा हो गया है कि क्या ईरान के सामने अमेरिका झुक गया है? क्योंकि युद्ध में ठोस बढ़त हासिल किए बिना ही ट्रंप जंग लड़ने से पीछे हट रहे हैं. मात्र आर्थिक दबाव इस्तेमाल करने की बात कह रहे हैं. इसके अलावा, ईरान को न्यूक्लियर डील से मुक्ति देते भी नजर आ रहे हैं.

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