साल 1971 के पहले बांलादेश, पाकिस्तान का वो हिस्सा था, जो 'पूर्वी पाकिस्तान' कहलाता था. और मौजूदा पाकिस्तान को पश्चिमी पाकिस्तान के तौर पर जाना जाता था. कई सालों का संघर्ष और पाकिस्तानी आर्मी का ज़ुल्म. बांग्लाभाषियों के दमन के खिलाफ पूर्वी पाकिस्तान के लोग सड़कों पर उतर आए थे. इन लोगों के आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी आर्मी ने और अत्याचार किए. लाखों लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया. औरतों का रेप किया गया. भारत ने पूर्वी पाकिस्तान से हमदर्दी दिखाई और फिर भारत-पाकिस्तान युद्ध छिड़ गया. इस जंग में भारत ने 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया. और 16 दिसंबर 1971 को बांग्लादेश बन गया.
'पाकिस्तान में एक और बांग्लादेश पनप रहा है'
ये खबर पाकिस्तान से ही है. और उम्मीद फिर भारत से है.
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फोटो - thelallantop
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नसीम का कहना है, 'कराची के लोगों ने जिस पार्टी को वोट दिया, उसी ने इस शहर को बर्बाद कर दिया. यह मुजरिमों का स्वर्ग और कचरा डालने की जगह बन गया है.'पाकिस्तान की एक राजनीतिक पार्टी ने बांग्लादेश बनने जैसी आशंका ज़ाहिर की है. इस पार्टी का कहना है. पाकिस्तान के लिए बलूचिस्तान दूसरा बांग्लादेश बन सकता है. पाकिस्तान की 'इस्लामिक पार्टी जमात ए इस्लामी' के मुताबिक बलूचिस्तान में उसी तरह हालात हैं जिस तरह की पूर्वी पाकिस्तान में थे. और फिर उससे बांग्लादेश बन गया. जमात ए इस्लामी के डिप्टी चीफ राशिद नसीम का कहना है कि जो भी संविधान की धारा 62 और 63 के बारे में जानते हैं वे कानून या संविधान के शासन के बजाय तानाशाही चाहते हैं. द डेली टाइम्स के मुताबिक, 12 जनवरी को बलूचिस्तान के स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए नसीम ने कहा, 'शासकों के असंवैधानिक बर्ताव के चलते पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बन गया. दुर्भाग्य की बात है कि अब बलूचिस्तान के सामने भी यही स्थिति आ खड़ी हुई है. राष्ट्रीय संसाधनों को बांटने में लगातार बलूचिस्तान की अनदेखी की जा रही है और अवाम में सरकार के खिलाफ नकारात्मक ख्यालात पनप रहे हैं.' बलूचिस्तान, पाकिस्तान का सबसे बड़ा राज्य है लेकिन यह काफी पिछड़ा हुआ है. यहां की आबादी डेढ़ करोड़ है. बलूच लोग बाकी के पाकिस्तान से अलग हैं न सिर्फ कास्ट की वजह से बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक तौर पर भी. बलूचिस्तान में रहने वालों का कहना है कि पंजाब के लोग उनका शोषण कर रहे हैं. बलूचिस्तान के एक्टिविस्ट पाकिस्तानी सिक्यूरिटी फोर्सेज के ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाते हैं तो उन आवाज़ों को दबाने की पूरी कोशिश की जाती है. पिछले साल जब पाकिस्तानी आर्मी ने बलूचिस्तान में कुछ कार्रवाई की तो उसका ख़ूब विरोध हुआ. भारत से भी मदद मांगी गई. कुछ बलूच एक्टिविस्ट ने भारत से नागरिकता की मांग भी की. और जिस तरह से भारत ने पाकिस्तान को बलूचिस्तान की तरफ ध्यान दिलाया उसकी बलूचिस्तान के लोगों ने बहुत तारीफ भी की.
पाकिस्तान की बजबजाती गंदगी का ये एक नमूना है
जिन्ना होते तो इस मौलवी की तकरीर सुनकर अपना सर पीट लेते
पाकिस्तान इस कानून को खत्म करके कट्टरपंथियों को जन्नत का टिकट दिलाना चाहता है?
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