सुप्रीम कोर्ट ने मिलते-जुलते नामों के उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर एक फैसला सुनाया है (Namesake candidates Supreme Court). उसने हमनाम उम्मीदवारों पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. शीर्ष अदालत का मानना है कि अगर किसी उम्मीदवार का नाम नेताओं के नाम पर है तो उन्हें चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता है.
'अब किसी का नाम 'राहुल गांधी' है तो...', हमनाम उम्मीदवारों के खिलाफ दायर याचिका SC ने खारिज की
दरअसल, एक जैसे नाम के उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने से जुड़ी एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी. इसमें तर्क दिया गया था कि वोटर्स को गुमराह करने के लिए हाई प्रोफाइल सीटों पर मिलते-जुलते नामों के उम्मीदवारों को खड़ा किया जाता है.
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दरअसल, एक जैसे नाम के उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने से जुड़ी एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी. एनडीटीवी में छपी रिपोर्ट की मानें तो ये याचिका सबू स्टीफन नाम के याचिकाकर्ता द्वारा दायर की गई थी. इसमें तर्क दिया गया था कि वोटर्स को गुमराह करने के लिए हाई प्रोफाइल सीटों पर मिलते-जुलते नामों के उम्मीदवारों को खड़ा किया जाता है.
याचिकाकर्ता ने ये कहा कि ऐसे उम्मीदवारों की मौजूदगी के कारण अक्सर बड़े उम्मीदवारों को मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ता है. याचिका में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के हित में इस 'प्रवृत्ति' को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की गई. इसके साथ ही इसे रोकने के लिए चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग भी की गई.
रिपोर्ट के अनुसार इस मामले की सुनवाई से इनकार करते हुए जस्टिस बीआर गवई ने कहा,
"अगर माता-पिता ने उम्मीदवारों को समान नाम दिए हैं, तो उन्हें चुनाव लड़ने से कैसे रोका जा सकता है? जैसे राहुल गांधी और लालू प्रसाद यादव."
इसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी.
चुनावों में एक जैसे नामों के उम्मीदवारों को उतारा जाता रहा है. इसे लेकर आरोप लगते हैं कि ऐसा करके दिग्गज नेताओं के नाम वाले प्रत्याशियों को चुनाव में खड़ा कर वोटर्स को भ्रमित किया जाता है, ताकि वो दूसरे उम्मीदवार को वोट करें और दिग्गज या मजबूत उम्मीदवार को नुकसान पहुंचाया जा सके.
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