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'जमुई घटना' में इन 120 लोगों पर भी FIR दर्ज, बिहार पुलिस ने क्यों लिया ऐसा एक्शन?

बिहार पुलिस ने जमुई वाली घटना का वीडियो पोस्ट करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ FIR दर्ज किया है. पुलिस ने बताया कि घटना का वीडियो या फोटो शेयर करना POCSO एक्ट के तहत दंडनीय अपराध है.

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बिहार पुलिस ने जमुई वाली घटना का वीडियो पोस्ट करने वाले 120 सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ FIR दर्ज किया है. (प्रतीकात्मक)

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  • बिहार के जमुई जिले में नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न और नाबालिग छात्र से मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने ऑनलाइन वीडियो शेयर करने वाले करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल के खिलाफ FIR दर्ज की।
  • यह घटना तब सामने आई जब नाबालिग छात्रा और छात्र के साथ मारपीट एवं यौन उत्पीड़न का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके चलते पुलिस ने POCSO एक्ट, IT एक्ट और JJ एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू की।
  • पुलिस ने अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और सात से आठ अन्य की पहचान की है, साथ ही घटना की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम गठित की गई है जो आगे की कार्रवाई करेगी।

बिहार के जमुई जिले में नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न और नाबालिग छात्र से मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. अब पुलिस ने घटना का वीडियो शेयर या पोस्ट करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी कार्रवाई शुरू कर दी है. पुलिस के मुताबिक, करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल के खिलाफ साइबर थाने में FIR दर्ज की गई है.

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21 सितंबर की रात बिहार पुलिस ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर लोगों से एक अपील की है. पोस्ट में कहा गया,

‘नाबालिग पीड़िता से जुड़ा वीडियो बेहद संवेदनशील है. इसलिए इस वीडियो को सोशल मीडिया या किसी दूसरे माध्यम पर शेयर या रीपोस्ट न करें. साथ ही नाबालिग की पहचान भी उजागर न करें. पुलिस के मुताबिक, ऐसा करना POCSO एक्ट, IT एक्ट और JJ एक्ट के तहत दंडनीय अपराध है.’

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पुलिस ने क्या बताया?

इसी कड़ी में पुलिस अब ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स पर नज़र रख रही है जो इस घटना के वीडियो शेयर रहे हैं. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 13 फेसबुक अकाउंट, 12 इंस्टाग्राम अकाउंट और 7 X अकाउंट की पहचान की गई है. इन अकाउंट्स के खिलाफ वीडियो हटाने की कार्रवाई की जा रही है.

साथ ही, जमुई जिला के एसपी विश्वजीत दयाल ने देर रात मीडिया से बात की. उन्होंने कहा कि नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करके वीडियो वायरल करना संगीन अपराध है. एसपी विश्वजीत दयाल के मुताबिक, करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल चलाने वाले लोगों के खिलाफ साइबर थाने में FIR दर्ज की गई है.

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अब तक इस मामले में पुलिस तीन नाबालिग आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. पुलिस के मुताबिक, इस मामले में सात से आठ लोगों की पहचान हुई है.

बिहार पुलिस की एडीजी लॉ एंड ऑर्डर के. सुहिता अनुपम ने बताया कि इस मामले में FIR भी दर्ज कर ली है. पुलिस ने BNS की धारा 74, धारा 76 और POCSO एक्ट की धारा 8 और 12 के तहत केस दर्ज किया है. इन धाराओं में महिला की गरिमा भंग करने, कपड़े उतारने के लिए मजबूर करने और बच्चों के यौन उत्पीड़न से जुड़े अपराध शामिल हैं.

घटना पर आई राजनीतिक प्रक्रिया 

बिहार में नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इस घटना को दुखद और शर्मनाक बताया है.

वहीं, बिहार सरकार में मंत्री और जमुई की विधायक श्रेयसी सिंह ने कहा है कि, जिन दूसरे लोगों की पहचान की जा रही है, उनके खिलाफ भी जल्द कार्रवाई होगी. साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसी घटना पर राजनीति या अनावश्यक टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है.

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घटना पर जमुई से LJP (रामविलास) सांसद अरुण भारती ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है. अरुण भारती ने बताया कि उन्होंने जमुई के एसपी से बात की और पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज की. अरुण भारती के मुताबिक, पुलिस ने मामले में 7 आरोपियों की पहचान की है. इनमें से 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि बाकी 4 आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है.

मामले की जांच के लिए SIT यानी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम भी बनाई गई है. इसकी निगरानी जमुई के SDPO करेंगे.

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