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खरगोन में रामनवमी के जुलूस के दौरान हुई थी हिंसा, 12 साल के लड़के को 3 लाख का नोटिस आ गया!

लड़के के पिता कालू खान को 4 लाख 80 हजार रुपये नुकसान भरपाई का नोटिस आया है.

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खरगोन हिंसा के बाद प्रशासन ने दुकानों और घरों को गिराया था. (फाइल फोटो- आजतक)

मध्य प्रदेश के खरगोन (Khargone Violence) में इस साल रामनवमी के मौके पर हिंसा भड़की थी. कई घरों और संपत्तियों को नुकसान पहुंचा था. अब उसी इलाके में रहने वाले एक 12 साल के लड़के को 2 लाख 90 हजार रुपये हर्जाना भरने का नोटिस भेजा गया है. वहीं लड़के के पिता कालू खान को 4 लाख 80 हजार रुपये की नुकसान भरपाई का नोटिस आया है. आनंद नगर इलाके में रहने वाले कालू खान और उनके बेटे के खिलाफ नुकसान भरपाई का ये दावा उनके पड़ोसियों ने किया है.

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खरगोन हिंसा में 270 लोग आरोपी

दरअसल, 10 अप्रैल को रामनवमी के जुलूस के दौरान इस इलाके में सांप्रदायिक हिंसा हुई थी. दो दिन बाद हिंसा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने एक क्लेम ट्रिब्यूनल का गठन कर दिया था. 'द रिपोर्टर्स कलेक्टिव' की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रिब्यूनल ने अगस्त महीने में मामलों की सुनवाई शुरू की. कालू खान ने द रिपोर्टर्स कलेक्टिव को बताया, 

"मुझे बताया गया कि मेरे पड़ोसियों ने मेरे और मेरे बेटे के खिलाफ याचिका दायर की थी. पुलिसवालों ने मुझसे कहा कि हमें ट्रिब्यूनल का सामना करना होगा और केस लड़ना होगा. हिंसा वाली रात हम दोनों अपने घर पर ही थे."

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रिपोर्ट में बताया गया है कि खरगोन हिंसा के लिए 270 लोगों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है, जिनमें 177 मुस्लिम समुदाय से और 93 हिंदू समुदाय से हैं. इनमें कालू खान का 12 साल का बेटा भी शामिल है. हिंसा के बाद राकेश गंगले नाम के व्यक्ति ने एक FIR दर्ज कराई थी. राकेश ने बताया था कि जब वो रात 9 बजे घर की तरफ जा रहे थे तो उन्होंने अपने मोहल्ले में 50-60 मुस्लिम लोगों को तलवार, लाठी, पत्थर और कांच की बोतलों के साथ देखा था. गंगले ने आरोप लगाया कि भीड़ घरों पर पत्थर और पेट्रोल बम फेंक रही थी. FIR में 36 मुस्लिम लोगों के नाम थे. हालांकि, FIR में कालू खान के बेटे का नाम नहीं था.

कालू खान के बेटे के खिलाफ ट्रायल जारी

रिपोर्ट के मुताबिक, 4 महीने बाद ट्रिब्यूनल के आयुक्त ने 25 अगस्त को 12 साल के उस लड़के को नुकसान वसूली का नोटिस भेजा. ये नोटिस सूरुजबाई गंगले की शिकायत पर भेजा गया. शिकायत में 12 साल के लड़के का नाम शामिल है. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उनके घर से दंगाइयों ने जूलरी और एक लाख रुपये कैश लूट लिए थे. इस शिकायत के बाद कालू खान के बेटे के खिलाफ ट्रायल जारी है.

इस नोटिस को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी. 12 सितंबर को हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और कहा कि आपत्ति ट्रिब्यूनल में ही फाइल करनी चाहिए. रिपोर्ट में बताया गया है कि हिंसा के बाद ट्रिब्यूनल के पास कुल 343 शिकायतें आईं. जिनमें 34 को स्वीकार किया गया. अबतक, ट्रिब्यूनल ने 6 दावों का निपटारा किया है. जिनमें 50 लोगों से करीब 7 लाख 46 हजार रुपये की भरपाई की गई है.

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इस ट्रिब्यूनल का गठन 'मध्य प्रदेश लोक एवं निजी संपत्ति को नुकसान का निवारण एवं नुकसान की वसूली अधिनियम, 2021' के तहत किया गया. उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बाद इस तरह का कानून बनाने वाला मध्य प्रदेश तीसरा राज्य है. ट्रिब्यूनल के पास सिविल कोर्ट की तरह शक्तियां हैं. इसके पास हिंसा या दंगों के दौरान सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान करने के दोषियों से भरपाई वसूलने का अधिकार है.

हिंसा के बाद बुलडोजर चलाया गया

इससे पहले 10 अप्रैल को खरगोन के तालाब चौक और तवड़ी इलाके में रामनवमी के जुलूस के दौरान हिंसा भड़क गई थी. एक पक्ष का आरोप है कि हिंसा तब भड़की, जब जुलूस पर पत्थरबाजी हुई. वहीं दूसरे पक्ष ने कहा कि हिंसा जुलूस में लगाए गए भड़काऊ नारों और गानों की वजह से हुई. कथित तौर पर कुछ लोगों ने पथराव किया था. इस हिंसा के दौरान कुछ आम लोगों के अलावा जिले के SP सिद्धार्थ चौधरी समेत 5 पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे. हिंसा में एक व्यक्ति की मौत भी हुई थी. इस घटना के ठीक अगले दिन प्रशासन ने बुलडोजर के जरिए घरों को ढहा दिया. कहा गया कि ये हिंसा आरोपियों के घर हैं.

राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने चेतावनी देते हुए तब कहा था कि जिस घर से पत्थर आए हैं, उस घर को ही पत्थरों का ढेर बनाएंगे. इंडिया टुडे से बातचीत के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने कहा था कि घरों और दुकानों को अतिक्रमण के कारण ढहाया गया है और ये कानूनी दायरे में हो रहा है.

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