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लोगों के मिनिमम बैलेंस न रख पाने से बैंकों ने कमाए ₹26000 करोड़, वसूली में ये बैंक सबसे आगे

हर अकाउंट होल्डर के लिए बैंक खाते में मिनिमम बैलेंस रखना जरूरी होता है. कई बार बैंक इस नियम में थोड़ी ढील दे देते हैं और जुर्माना नहीं वसूलते. हालांकि, RBI की रिपोर्ट के मुताबिक, 4 साल में बैकों ने जुर्माने के तौर पर ₹26000 करोड़ वसूले हैं.

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वित्त वर्ष 2026 में बैंकों ने मिनिमम बैलेंस चार्ज के जरिये ​​7,086.63 करोड़ रुपये जुटाए (फोटो क्रेडिट: Aaj Tak)

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  • वित्त वर्ष 2022-2023 से 2025-2026 के बीच बैंकों ने ग्राहकों से मिनिमम एवरेज बैलेंस न रखने पर 26,170 करोड़ रुपये से अधिक जुर्माने के रूप में वसूले हैं।
  • इस वसूली का कारण बैंकिंग नियमों के अनुसार खाताधारकों से उनके खातों में न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की शर्त का पालन न करना है।
  • प्राइवेट बैंकों ने सबसे ज्यादा मिनिमम बैलेंस चार्ज वसूला, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने चार्जेज में कुछ राहत दी है।

हर बैंक में मिनिमम बैलेंस रखने का नियम होता है. वित्त वर्ष 2022-2023 से वित्त वर्ष 2025-2026 के बीच यानी चार फाइनेंशियल इयर्स में बैंकों ने ग्राहकों से उनके खातों में मिनिमम एवरेज बैलेंस नहीं रखने पर तगड़ी वसूली की है. जुर्माने के तौर पर बैंकों ने 26,170 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की है.

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सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तरफ से जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, इन वसूली में प्राइवेट बैंकों का हिस्सा ज्यादा था. मिंट की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा राज्यसभा में दिए गए लिखित जबाव में यह जानकारी दी गई है. 

वित्त वर्ष 2026 में ही बैंकों ने मिनिमम बैलेंस चार्ज के जरिये ​​7,086.63 करोड़ रुपये जुटाए. प्राइवेट सेक्टर के बैंकों का हिस्सा 4,948.71 करोड़ रुपये था. वहीं सरकारी बैंकों ने करीब 2,138 करोड़ की कमाई की. सरकार ने यह भी कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने पिछले कुछ साल में ऐसे चार्जेज में काफी ढील दी है.

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प्राइवेट बैंकों ने सबसे ज्यादा चार्ज वसूला ?  

प्राइवेट बैंकों में एचडीएफसी ने वित्त वर्ष 2026 में न्यूनतम बैलेंस शुल्क के रूप में सबसे अधिक 1,798.14 करोड़ रुपये वसूले. एक्सिस बैंक ने 1,081.33 करोड़ की रकम जुटाई.  इन दोनों बैंकों ने मिलकर उस साल निजी क्षेत्र के बैंकों की ओर से कुल मिनिमम बैलेंस चार्ज का करीब 58% हिस्सा वसूला है. 

दूसरे प्रमुख प्राइवेट बैंकों में आईसीआईसीआई बैंक ( 353.50 करोड़), कोटक महिंद्रा बैंक ( 290.65 करोड़), यस बैंक ( 195.05 करोड़) और आईडीबीआई बैंक ( 175.15 करोड़) शामिल थे. आरबीआई ने बताया कि वित्त वर्ष 2023 से पहले के निजी बैंकों के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं. वहीं, वित्त वर्ष 2026 के आंकड़े अस्थायी हैं.

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जुर्माना लगाने में सरकारी बैंक भी पीछे नहीं 

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बात करें तो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने 477.27 करोड़ रुपये की सबसे ज्यादा वसूली दर्ज की. इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा ( 394.10 करोड़) और इंडियन बैंक ( 299.17 करोड़) रहे. हालांकि, सरकार ने साफ किया कि एसबीआई का आंकड़ा चालू खातों से संबंधित है. बैंक ने मार्च 2020 से बचत खातों पर मिनिमम बैलेंस की रकम के जुर्माने को माफ कर दिया है.

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