ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसी - CIA - के कुछ ठिकानों पर हमला किया था. अब यही हमला अमेरिका के लिए जांच का विषय बन गया है. हालांकि ये हमला पांच महीने पहले यानी मार्च के महीने में हुआ था, लेकिन CIA अब ये पता करने में जुटी है कि ईरान ने इतना सटीक हमला कैसे किया? आशंका है कि रूस ने ईरान की टेक्निकल मदद की थी.
CIA के ठिकानों पर इतने सटीक हमले से बिलबिला उठा अमेरिका, रूस ने ईरान का काम कर दिया!
Iran strikes CIA facilities: ईरान ने CIA के दो ठिकानों पर हमला किया. अमेरिका हैरान रह गया, तभी से ये जांच शुरू हो गई कि आखिर ईरान को इतनी सेंसटिव इन्फॉर्मेशन कहां से मिल रही है. अब इस मामले में नई जानकारी सामने आई है.


रॉयटर्स ने चार लोगों से बात की, जो अमेरिकी इंटेलिजेंस के जानकार हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, नाम न लेने की शर्त पर उन्होंने बताया कि अमेरिकी इंटेलिजेंस अभी इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है कि इस हमले में रूस का हाथ था या नहीं. मगर उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ईरान का ये हमला सटीक और ज़ोरदार था. साथ ही इस बात का ज़िक्र किया कि रूस ईरान की टेक्निकल मदद करता रहा है.
CIA ठिकानों पर हमलारिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 में ईरान ने CIA के दो ठिकानों को निशाना बनाया था. CIA की एक फैसिलिटी सऊदी अरब के रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास में है. एक दूसरी फैसिलिटी पूर्वी इराक में है. इन दोनों ठिकानों पर बम बरसाए गए. अनुमान है कि इसके अलावा कुछ अन्य CIA ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई.
दो अधिकारियों ने बताया कि एनालिस्ट मानते हैं कि रियाद में अमेरिकी एम्बेसी पर ईरान ने शाहेद ड्रोन से हमला किया था. ये ईरान द्वारा ही बनाया गया आत्मघाती ड्रोन है जिसकी ताकत में रूस इजाफ़ा करता है. आशंका है कि इसी ताकतवर ड्रोन का हमले में इस्तेमाल किया गया. सूत्रों ने बताया कि मॉस्को ने ईरान के शाहेद-136 की ताकत बढ़ाने के लिए Kometa-M सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम दिया था. द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सबसे पहले ये खबर छापी थी, जिसे रूस ने ‘फेक न्यूज़’ बताकर टाल दिया था.
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डेटा का क्या खेल चल रहा?रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बात की भी जांच की जा रही है कि कहीं ईरान हमलों के लिए रूसी डेटा पर तो निर्भर नहीं है? CIA ने इस बात की पॉसिबिलिटी ख़त्म कर दी है कि ईरान ने ये हमला इत्तेफाक से किया हो. बताया गया कि केवल कुछ ही देश हैं जो अमेरिकी इंटेलिजेंस के खिलाफ डेटा शेयर करने की ताकत और हिम्मत रखते हैं. रूस के पास ये दोनों हैं.
अब रूस की भूमिका की आशंका होने से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है. दोनों ही देश एक-दूसरे पर बम मार रहे हैं. सोचने वाली बात ये है कि अगर रूस ईरान की मदद कर रहा है तो ईरान जंग क्या और भड़क सकती है?
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