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क्यों एक लड़की की शादी के कार्ड पर लिखा गया - हमारी भूल, कमल का फूल

इस लाइन का मतलब है कि बीजेपी को वोट देना हमारी गलती थी.

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शादी के इस कार्ड में दुल्हन की जगह रागिनी का नाम लिखा है. रागिनी अनुराग जैन की बहन हैं. अनुराग एक सरकारी विभाग में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते थे. जून 2017 में उन्हें काम से निकाल दिया गया. नौकरी गंवाने वाले वो अकेले नहीं थे. उनके साथ 700 से ज्यादा कर्मचारियों की नौकरी गई. इसी बात से नाराज होकर अनुराग जैन ने बहन की शादी के कार्ड पर 'कमल का फूल हमारी भूल' छपवा दिया है.
नौकरी चली जाए, तो गुस्सा आएगा. बहुत गुस्सा आएगा. मगर किसके ऊपर? जिसकी वजह से नौकरी जाएगी, उसके ऊपर. और इस नाराजगी को जताएंगे कैसे? औरों का पता नहीं, लेकिन अनुराग जैन का तरीका बड़ा दिलचस्प है. उन्होंने अपनी बहन की शादी के कार्ड पर एक लाइन लिखवाकर सारा गुस्सा उतार दिया. लिखवाया:
हमारी भूल, कमल का फूल
एकसाथ 773 कर्मचारियों की नौकरी चली गई कमल का फूल से मतलब है, बीजेपी. यानी, बीजेपी को वोट देकर गलती कर दी. अनुराग मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं. वहां सागर जिले के देवरी शहर में. पिछले सात सालों से केंद्र सरकार के कर्मचारी थे. कॉन्ट्रेक्ट जॉब थी, परमानेंट नहीं हुए थे. उनका विभाग मलेरिया की रोकथाम का इंतजाम देखता था. जून 2017 में उन्हें एकाएक नौकरी से निकाल दिया गया. नौकरी खोने वाले अनुराग अकेले नहीं थे. उनके मुताबिक, विभाग के कुल 773 अस्थायी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया. इन सबों को 2010 में नौकरी पर रखा गया था. अब चूंकि विभाग का काम खत्म हो गया, तो राज्य सरकार ने इन सबों को निकाल दिया.
 सबसे ज्यादा बुरा हाल है आदिवासी बहुल इलाकों में. देश की कुल आबादी में आदिवासियों की जनसंख्या मुश्किल से तीन फीसद होगी, लेकिन मलेरिया के कुल मामलों में 14 फीसद का हिस्सा बैठता है इनका. देशभर में मलेरिया के कारण होने वाली मौतों में से करीब 29 फीसद मामले ट्रायबल्स के साथ जुड़े होते हैं.

सबसे ज्यादा बुरा हाल है आदिवासी बहुल इलाकों में. देश की कुल आबादी में आदिवासियों की जनसंख्या मुश्किल से तीन फीसद होगी, लेकिन मलेरिया के कुल मामलों में 14 फीसद का हिस्सा बैठता है इनका. देशभर में मलेरिया के कारण होने वाली मौतों में से करीब 29 फीसद मामले ट्रायबल्स के साथ जुड़े होते हैं.

नोटबंदी और जीएसटी से बाद भी बहुत जगह सुनाई दी थी ये लाइन अनुराग का कहना है कि केंद्र सरकार का ये मलेरिया बचाव विभाग अकेले मध्य प्रदेश में नहीं था. बाकी कई राज्यों में भी काम कर रहा था. काम खत्म हो जाने के बाद बाकी राज्यों ने इस विभाग के कर्मचारियों को अलग-अलग विभागों में नौकरी दे दी. मगर मध्य प्रदेश ने ऐसा नहीं किया. अनुराग को राज्य सरकार के इस रवैये से शिकायत है. उनका कहना है कि सारे कर्मचारी मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से भी मिले, लेकिन आश्वासन के सिवा उन्हें कुछ नहीं मिला. इसी सब की वजह से अनुराग नाराज है. बीजेपी को कोस रहे हैं. अभी बहन की शादी के कार्ड पर 'हमारी भूल, कमल का फूल' लिखवाया है. अब कह रहे हैं कि जहां-जहां मुमकिन होगा, वहां-वहां ये लाइन लिखकर और बोलकर विरोध जताएंगे. वैसे ये लाइन इस्तेमाल करने वाले पहले शख्स नहीं हैं अनुराग. नोटबंदी और जीएसटी के बाद कई सारे व्यापारियों ने अपने बिल बुक पर ये लाइन छपवाई थी. विरोध जताने के लिए. कई खबरें आई थीं ऐसी. खूब चर्चा हुआ था इसका.
कर्मचारियों की छंटनी भले हुई हो, मलेरिया की छंटनी नहीं हुई मलेरिया विभाग को बंद कर लोगों की छंटनी करने का मतलब ये नहीं कि भारत से मलेरिया खत्म हो गया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, पूरे दक्षिण एशियाई देशों में जितने मलेरिया के मामले होते हैं, उसमें करीब 80 फीसद योगदान भारत का है. इन देशों में मलेरिया से होने वाली कुल मौतों में से लगभग 41 फीसद मौतें भारत में होती हैं. कबीलाई और ग्रामीण इलाकों में बहुत बुरा हाल है. नैशनल वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (NVBDCP) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के करीब 16 राज्य ऐसे हैं जहां मलेरिया बहुत बड़ी चुनौती है.


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