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'भारत सरकार लाखों लोगों का जीवन मुश्किल बना रही', जस्टिन ट्रूडो ने ये क्यों कहा?

ट्रूडो ने कहा है कि भारत सरकार द्वारा राजनयिकों की आधिकारिक स्थिति को एकतरफा रद्द करने की धमकी के बाद उन्हें कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा.

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ट्रूडो ने ये बयान भारत से 41 राजनयिकों को वापस बुलाने की घोषणा के अगले दिन पत्रकारों से बात के दौरान दिया. (फोटो- ट्विटर)

भारत में अपने 41 राजनयिकों को वापस कनाडा बुलाने के बाद प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का बयान सामने आया है (Justin Trudeau amid diplomatic row). उन्होंने कहा है कि कनाडाई राजनयिकों पर भारत सरकार की कार्रवाई भारत और कनाडा के लाखों लोगों का सामान्य जीवन बहुत कठिन बना रही है. जस्टिन ट्रूडो ने ये बयान भारत से 41 राजनयिकों को वापस बुलाने की घोषणा के अगले दिन पत्रकारों से बात के दौरान दिया.

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रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रूडो ने कहा है कि भारत सरकार द्वारा राजनयिकों की आधिकारिक स्थिति को एकतरफा रद्द करने की धमकी के बाद उन्हें कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा. कनाडाई पीएम ने कहा,

“भारतीय सरकार अविश्वसनीय रूप से कनाडा और भारत में रहने वाले लाखों लोगों की जिंदगी को सामान्य बने रहना मुश्किल बना रही है. और वो कूटनीति के बुनियादी सिद्धांत का उल्लंघन कर ऐसा कर रही है. इसने मुझे उन लाखों कनाडाई नागरिकों की खुशी और सलामती को लेकर चिंतित कर दिया है जो अपनी जड़ें भारत से जोड़ते हैं.”

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इससे पहले आज भारत सरकार ने कनाडा द्वारा विएना समझौते का उल्लंघन करने के आरोपों का जवाब देते हुए कहा,

“भारत में कनाडाई डिप्लोमैट्स से जुड़े कनाडा सरकार के 19 अक्टूबर वाले बयान को हम सबने देखा है. दोनों देशों में मौजूद डिप्लोमैट्स की संख्या में समानता की बात की गई थी. भारत में कनाडाई डिप्लोमैट्स की संख्या ज्यादा है. जिस वजह से भारत के आंतरिक कामकाज में उनका दखल हो रहा था.”

बता दें कि कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जोली ने कनाडाई डिप्लोमैट्स की वापसी की बात बताते हुए कहा था,

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“मैं इस बात की पुष्टि कर सकती हूं कि भारत ने 21 कनाडाई डिप्लोमैट्स को छोड़कर बाकी सभी डिप्लोमैट्स की राजनयिक छूट 20 अक्टूबर के बाद खत्म करने की बात से हमें अवगत करा दिया है. सभी डिप्लोमैट्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हमने भारत से उन्हें सुरक्षित वापस बुला लिया है.”

कनाडाई विदेश मंत्री ने ये भी कहा कि भारत के इस कदम की उन्हें उम्मीद नहीं थी. इस तरह की घटना कभी नहीं हुई. किसी भी देश के डिप्लोमैट्स के विशेषाधिकारों और छूट को एकतरफा खत्म करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है. ये डिप्लोमैटिक संबंधों के लिए बने विएना समझौते का उल्लंघन है. इस तरह से छूट छीनने की धमकी देना बेवजह किसी विवाद को बढ़ावा देना है. इससे किसी भी डिप्लोमैट के लिए उस देश में काम करना कठिन हो जाता है.

इसके जवाब में भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से आगे कहा गया कि भारत सरकार इसको लेकर पिछले एक महीने से कनाडाई सरकार के साथ काम कर रही थी. उसके फैसले विएना समझौते के आर्टिकल 11.1 के तहत हैं. मंत्रालय ने ये भी कहा कि भारत समानता लागू करने के फैसले को समझौते का उल्लंघन नहीं मानता.

(ये भी पढ़ें: 41 डिप्लोमैट्स की वापसी पर कनाडा ने भारत को सुनाया था, अब पलटवार आया है)

वीडियो: Israel-Gaza Conflict के बीच जस्टिन ट्रूडो ने UAE के राष्ट्रपति से फोन पर क्या बात की?

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