गुजरात (Gujarat) में लगभग 9 साल पुराने एक मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 19 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने CID क्राइम बॉर्डर रेंज को 1 IPS, 1 सेवानिवृत IPS, 3 DSP और 1 SI सहित 19 लोगों पर मामला दर्ज करने का आदेश दिया है. आरोपियों की लिस्ट में कच्छ के इलेक्ट्रोथर्म (ET) कंपनी के निदेशकों और कर्मचारियों का नाम भी शामिल है. कंपनी के मालिक के खिलाफ साल 2015 में शिकायत दर्ज कराई गई थी.
अपहरण हुआ, पुलिस ने FIR नहीं लिखी, बंदा सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया, अब 2 IPS, 3 DSP सहित 19 पर केस
Gujarat के इस शिकायतकर्ता के मुताबिक बंदूक की नोंक पर उनका अपहरण कर लिया गया था. वो थाने और अफसरों के चक्कर लगाते रहे, पर किसी ने न सुनी, अब 9 साल बाद केस दर्ज हुआ है. क्या है ये मामला?

इंडिया टुडे से जुड़े कौशिक कांठेचा की रिपोर्ट के अनुसार, CID ने इन 19 लोगों पर मामला दर्ज कर लिया है-
- इलेक्ट्रोथर्म कंपनी के मालिक शैलेश भंडारी
- तत्कालीन SP जी.वी. बारोट, IPS
- तत्कालीन SP भावनाबेन पटेल, IPS
- तत्कालीन DySP वी. जे. गढ़वी
- तत्कालीन DySP डी.एस. वाघेला
- तत्कालीन DySP आर.डी.देसाई
- तत्कालीन SI एन.के.चौहान
- भंडारी इलेक्ट्रोथर्म कंपनी के मालिक अनुराग मुकेश
- संजय जोशी, मानव संसाधन महाप्रबंधक
- बलदेव रावल, सुरक्षा प्रभारी, अहमदाबाद
- अमित पटवारिका, अहमदाबाद
- हितेश सोनी, अहमदाबाद
- श्रीधर मूलचंदानी, अहमदाबाद
- अनिल द्विवेदी, वडोदरा
- बैंकट सोमानी, अहमदाबाद
- महेंद्र पतीरा, दक्षिण भोपाल
- पवनगौर, दक्षिण भोपाल
- शिवम पोद्दार, गांधीधाम
- सिक्योरिटी आईटी कंपनी, अहमदाबाद
CID के एडिशनल DGP राजकुमार पांडियन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार शिकायतकर्ता ने शिकायत दर्ज कराई है. CID क्राइम राजकोट जोन मामले की जांच करेगा.
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क्या है पूरा मामला?शिकायतकर्ता का नाम परमानंद शिरवानी है. परमानंद 2011 में इलेक्ट्रोथर्म कंपनी में काम करते थे. फिर उन्होंने नौकरी छोड़ने का मन बनाया और इस्तीफा दे दिया. शिकायत के अनुसार, कंपनी नहीं चाहती थी कि वो नौकरी छोड़ें. इसलिए कंपनी मालिकों ने उन्हें भरोसे में लिया और डायरेक्टर बनाने की बात की. इसके बाद उन्हें अपने नाम पर एक फर्म खोलने के लिए अहमदाबाद बुलाया गया.
आरोप के मुताबिक, इस दौरान कंपनी के लोगों ने बंदूक की नोक पर पीड़ित का अपहरण कर लिया. इसके बाद उन्हें कंपनी के बंगले, ऑफिस और फार्म हाउस में रखा गया. आरोप ये भी लगा कि शिकायतकर्ता और एक महिला से जबरदस्ती सादे कागजों पर हस्ताक्षर करा लिया गया और संपत्ति भी लिखवा ली गई.
पीड़ित की शिकायत के अनुसार, उनके मां के घर से 20 लाख नकद और 10 लाख के सोने के आभूषण भी जबरदस्ती जब्त कर लिए गए. उन्होंने जाने से मारने की धमकी देने और जबरन 10 लाख रुपए नकद लेने का भी आरोप लगाया है.
2019 में हाई कोर्ट ने दिया था आदेशइससे पहले 10 अक्टूबर 2019 को गुजरात हाई कोर्ट ने इस मामले में FIR दर्ज करने का आदेश दिया था. शिकायतकर्ता ने हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं. लेकिन आरोपी तब सुप्रीम कोर्ट से इस आदेश से स्टे ऑर्डर ले आए थे.
मामले में शिकायत दर्ज नहीं करने के आरोप में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज हुई है.
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