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'वर्दी उतारकर आइए', फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को किस पाकिस्तानी नेता ने खुली चुनौती दे दी?

Pakistan में Jamiat-Ulema-e-Islam के प्रमुख Maulana Fazlur Rehman ने पाकिस्तानी सेना के Field Marshal Asim Munir को खुली चुनौती दे दी है.

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मौलाना फजलुर रहमान (बाएं) ने आसिम मुनीर (दाएं) को चुनौती दे दी. (फोटो- इंडिया टुडे)

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  • मौलाना फजलुर रहमान ने फील्ड मार्शल और सेना के प्रमुख आसिम मुनीर को खुले तौर पर चुनौती देते हुए कहा कि अगर राजनीति करना है तो चुनाव लड़कर दिखाएं, वर्दी उतारकर राजनीति करें।
  • यह बयान पाकिस्तान की सियासी पृष्‍ठभूमि में सेना के राजनीतिक हस्तक्षेप और बलूचिस्तान में नियंत्रण खोने के मुद्दे के कारण आया, जहां रहमान ने सेना की नीतियों की आलोचना की है।
  • रहमान की इस चुनौती से सेना और राजनीतिक दलों के बीच तनाव बढ़ सकता है, जिससे पाकिस्तान में सिविल-सेना संबंधों पर असर पड़ने और भविष्य में नई राजनीतिक गतिरोध की संभावना उत्पन्न हो सकती है।

‘अगर राजनीति करनी है तो वर्दी उतारकर आइए. चुनाव लड़िए, तब पता चलेगा की वर्दी वालों को कितने वोट मिलते हैं.’ यह खुली चुनौती दी है पाकिस्तान के सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियों में से एक जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम (JUI-F) के मुखिया मौलाना फजलुर रहमान ने. जिसको दी है, वह उन्हीं के देश के फील्ड मार्शल और सेना के मुखिया हैं. इस बयान के साथ ही रहमान का नाम भी पाकिस्तान के उन कद्दावर नेताओं में शामिल हो गया है, जो पाकिस्तानी पॉलिटिक्स में सेना के वर्चस्व और खासतौर पर फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के ‘सीधे दखल’ की मुखालिफत करते हैं.  

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मौलाना फजलुर रहमान जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम के संस्थापक और खैबर पख्तूनख्वा (पूर्व में नॉर्थ-वेस्ट फ्रंटियर) के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती महमूद के बेटे हैं. उनका नाम पाकिस्तान के उन नेताओं की लिस्ट में भी शामिल है, जो देश में शरिया कानून लागू करने की वकालत करते हैं. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार, 12 जुलाई को एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए सेना पर राजनीतिक मामलों हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान बलूचिस्तान के अशांत इलाकों पर अपना कंट्रोल खो रहा है. उन्होंने कहा,

बलूचिस्तान के बलूच इलाकों में विद्रोह हुआ था. पूरा बलूच क्षेत्र पाकिस्तान के नियंत्रण से बाहर हो गया था. आज भी पाकिस्तानी सरकार का आदेश वहां मौजूद नहीं है.

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रहमान लंबे समय से अफगान-तालिबान से जुड़े रहे. नेता बनने से पहले भी रहमान का नाम उन आम नागरिकों की लिस्ट में शामिल था, जो देश की राजनीति में सेना के दबदबे की खुलकर आलोचना करते रहे हैं. एक समय पाकिस्तान के पूर्व सेना अध्यक्ष जिया-उल-हक की सैन्य तानाशाही के विरोध में कई पार्टियों के गठबंधन में शामिल हुए और अपनी राजनीतिक करियर की शुरुआत किया.

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पाकिस्तान के पूर्व सेना अध्यक्ष जिया-उल-हक .
मुनीर की निंदा की

ऐसा पहली बार नहीं है, जब रहमान खुलकर आसिम मुनीर के सामने आए हों. इससे पहले दिसंबर 2025 में उन्होंने रहमान ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे चरमपमंथी समूहों को खिलाफ अफगानिस्तान के भीतर हमला करने के लिए पाकिस्तान सरकार और मुनीर की कड़ी निंदा की थी.

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आसिम मुनीर

अब पहले जानिए की ये मौलाना फजलुर रहमान हैं कौन?

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19 जून 1955 को जन्मे रहमान की शुरुआती पढ़ाई धार्मिक शिक्षा के रूप में स्थानीय मदरसों में हुई. बाद में वो अकोरा खट्टक में दारुल उलूम हक्कानिया जैसे संस्थानों से पढ़ने गए. साल 1980 में उनके पिता खैबर पख्तूनख्वा के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती महमूद की मौत हो गई. इसके बाद रहमान के हाथों में उनकी पार्टी ‘JUI’ की कमान आ गई. इस दौरान पार्टी दो गुटों में भी बंट गई. कारण, जनरल जिया-उल-हक के सैन्य शासन को लेकर आपसी मतभेद. रहमान का गुट जिया के सैन्य तानाशाह का खुलकर विरोध करने वाले गुटों से जुड़ गया, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी भी हुई.

मदरसों और धार्मिक संस्थानों में पकड़

साल 1988 में रहमान को पहली बार डेरा इस्माइल खान से पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के लिए चुना गया. तब से अब तक उन्हें कम से कम 6 बार संसदीय चुनावों में जीत हासिल की है. रहमान की पार्टी JUI-F को खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान राज्यों के पश्तून-बहुल इलाकों से काफी समर्थन मिलाता है. इन इलाकों में मदरसों और धार्मिक संस्थानों का उनका नेटवर्क काफी अच्छा है. साल 2024 में नेशनल असेंबली के चुनावों में रहमान की पार्टी ने 11 सीटों पर जीत हासिल की जबकि, रहमान ने बलूचिस्तान में नई बनी सीट पर भी जीत हासिल की. रहमान अब सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना के फील्ड मार्शल को चुनौती दे रहे हैं.

हालांकि, उनका यह विरोध भी विडंबनाओं से भरा हुआ है. दरअसल, साल 2022 में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और तहरीक-ए-इंसाफ के नेता इमरान खान के हाथों से सत्ता की कमान छिनने में रहमान ने अहम भूमिका निभाई थी. इसके बाद से ही पाकिस्तान की राजनीति में आसिम मुनीर के दबदबे को पनपने को मौका मिला.

इमरान को हटाने में योगदान

साल 2019 में आसिम मुनीर ने 8 महीने तक इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के प्रमुख के पद पर रह, लेकिन उन्हें अचानक उन्हें एक दिन पद से बर्खास्त कर दिया गया. इसके बाद साल 2020 में इमरान खान के खिलाफ पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (PDM) का गठन हुआ. रहमान ने अपनी पार्टी के साथ इस आंदोलन से जुड़े और इसके अध्यक्ष चुने गए. बाद में उनके प्रयासों के बाद साल 2022 में इमरान खान को सत्ता छोड़नी पड़ी.

इसके कुछ समय के बाद रहमान और PDM के रिश्तों में खटास आ गई. पाकिस्तान में शहबाज शरीफ के गठबंधन की सरकार बनी. जिसके बाद रहमान और शहबाज के पार्टी के बीच नीति, सत्ता और शासन को लेकर काफी मतभेद हुए.

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इमरान खान.

साल 2023 की शुरुआत तक रहमान ने सत्ताधारियों से दूरी बना ली और सरकार की आलोचना करने लगे. साथ ही निष्पक्ष विपक्ष की भूमिका में नजर आने लगे. इन मतभेदों को बीच ही साल 2022 में मुनीर को पाकिस्तानी सेना का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. इसके बाद मौजूदा सरकार ने मुनीर के कार्यकाल को  2027 तक बढ़ा दिया. बीते साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद मुनीर को पाकिस्तानी सेना का फील्ड मार्शल नियुक्त कर दिया गया.

पाकिस्तानी सेना की आलोचना

अब बात रहमान के पाकिस्तान की सेना के वर्चस्व की आलोचना की. दिसंबर 2025 में भी रहमान ने पाकिस्तानी सेना के नेतृत्व की आलोचना की थी. खासकर मुनीर और पाकिस्तान के अफगानिस्तान में हमलों और पाकिस्तानी क्षेत्र में भारत के ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई पर विरोधाभासी रुख की आलोचना की थी.

रहमान लगातार अफगानिस्तान को समर्थन करने वाले नेताओं में शामिल रहे हैं. हालांकि,पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच आज हालात सामान्य नहीं है, लेकिन फिर भी रहमान दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने की बात करते रहे हैं. मौजूदा समय में रहमान फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के प्रभुत्व के खिलाफ खड़े होने वाले पाकिस्तानी नेताओं में से एक बने हुए हैं. अब देखना यह होगा कि उनका यह स्टैंड कब तक बना रहेगा.

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