20 जुलाई 2026. दिन सोमवार. जगह नई दिल्ली. देश की संसद तक अपनी मांग पहुंचाने की कोशिश कर रहे हजारों प्रदर्शनकारियों का जत्था रुकने को तैयार नहीं था. दिल्ली पुलिस ने हर कोशिश कर ली. बात आंसू गैस के गुबार छोड़ने से लेकर लाठियों के इस्तेमाल तक भी पहुंच गई. ऐसी झड़प हुई कि कई प्रदर्शनकारी भी चोटिल हुए और पुलिस के अधिकारी भी. 70 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया.
CJP का प्रोटेस्ट कब और कैसे हुआ हिंसक? IPS समेत दर्जनों पुलिसकर्मी घायल
संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने कई एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों, पाकिस्तानी अकाउंट्स की गतिविधियों और किसी संभावित साजिश या राजनीतिक भूमिका की भी पड़ताल कर रही है.


सड़क की उथल-पुथल के अलावा सोशल मीडिया पर भी एक्टिविटी जारी थी. आरोप लगे कि कुछ लोग अशांति फैलाने के मकसद से अफवाह फैलाने में लगे हैं. पाकिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट्स का भी नाम आया. अब पुलिस इसकी जांच कर रही है कि जो भी हिंसा हुई, क्या उसके पीछे कोई साजिश थी. थी तो किसकी थी? किसके इशारे पर ये सब हुआ?
28 जून से सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे. 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने उन्हें वहां से हटाकर अस्पताल में शिफ्ट कर दिया. लेकिन वांगचुक ने लोगों से अपील कर दी कि वो 20 जुलाई को मॉनसून सत्र के पहले दिन संसद तक मार्च निकालें. उनका संदेश दूर तक गया. तमाम जगहों से हजारों प्रदर्शनकारी रविवार, 19 जुलाई से ही दिल्ली की सड़कों पर जुटने लगे. पुलिस ने भी कमर कस ली.

20 जुलाई, सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी के लोग और सोनम वांगचुक के समर्थक हजारों की संख्या में संसद की ओर मार्च करने की कोशिश करने लगे. जैसे-जैसे दिन बीता ये संसद मार्च एक अखाड़े में तब्दील होता गया. एक तरफ प्रदर्शनकारी थे. दूसरी तरफ पुलिस और सुरक्षाबल के जवान. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस हिंसा में दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 50 से ज्यादा जवान घायल हो गए. इनमें 5 से ज्यादा तो आईपीएस अधिकारी भी हैं. कई प्रदर्शनकारियों के भी घायल होने की खबर है. हालांकि, उनका सटीक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है.
सोमवार, 20 जुलाई को दिन के अंत तक दिल्ली पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की. सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल फोन वीडियो की जांच की और यह पता लगाना शुरू कर दिया कि क्या हिंसा किसी गलत सूचना या किसी बड़ी साजिश से प्रेरित तो नहीं थी.

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सीजेपी की ओर से इस संसद मार्च का आह्वान किया गया था. उनकी मांगों में NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय करना और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शामिल था. भारी बारिश के बावजूद हजारों की संख्या में लोग जंतर-मंतर पर जमा हुए थे. एहतियातन पुलिस ने विरोध स्थल के आसपास और मध्य दिल्ली में सड़कों पर जगह-जगह बैरिकेडिंग लगा रखे थे. जैसे ही भीड़ संसद की ओर बढ़ने लगी, पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की. इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने गलियों से होकर दूसरे रास्ते तलाशने शुरू कर दिए.
प्रदर्शनकारी कई किलोमीटर तक पैदल चले. रास्ते में कई ग्रुप्स एक साथ जुड़ते चले गए और अलग-अलग जगहों पर रुक-रुककर बाकी लोगों के भी आने का इंतजार किया. प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश की. संसद के पास पहुंचने की कोशिश में भीड़ ने कई जगहों पर बैरिकेडिंग भी तोड़ दी.
सेंट्रल दिल्ली में हालात बेकाबूइसके बाद पुलिस ऐक्शन में आ गई. सेंट्रल दिल्ली में कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, पटेल चौक, शास्त्री भवन, आरबीआई बिल्डिंग और पार्लियामेंट स्ट्रीट के आसपास हालात बेकाबू हो गए. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाबलों ने भीड़ पर लाठी-डंडे बरसाए और आंसू गैस के गोले भी छोड़े. इलाके में कुछ जगहों पर इंटरनेट भी बंद कर दिया गया.
पुलिसिया कार्रवाई के बाद कथित तौर पर प्रदर्शनकारी भी उग्र हो गए. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ लोगों ने दिल्ली पुलिस की दो बसों पर पथराव किया. उनकी आगे की खिड़कियां तोड़ दीं. जनपथ पर कई दुकानों में कथित तौर पर तोड़फोड़ की गई. झड़प में दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 50 से ज्यादा जवान घायल हो गए. बताया गया कि इस हिंसा में पांच आईपीएस अधिकारी भी घायल हुए हैं. पुलिस ने इसके बाद 70 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है. दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों में से कई छात्र नहीं हैं.

अलग-अलग इलाकों में हिंसा की खबरें मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने शिकायतों के आधार पर कई एफआईआर दर्ज की हैं. प्रभावित इलाकों के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है. पुलिस की ओर से मोबाइल फोन में बनाए गए वीडियो की भी जांच की जा रही है ताकि पत्थरबाजी, सुरक्षाकर्मियों पर हमले और तोड़फोड़ करने वाले लोगों की पहचान की जा सके.
जांच का दायरा सोशल मीडिया तक फैला है. पुलिस अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि कहीं ये हिंसा किसी बड़ी साजिश का हिस्सा तो नहीं थी. विरोध प्रदर्शन और हिंसा के बारे में भ्रामक जानकारी और अफवाहें फैलाने के आरोप में कई सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच की जा रही है. पुलिस सूत्रों ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान के कई सोशल मीडिया अकाउंट्स से भी पोस्ट किए जा रहे थे. ऐसे ही एक वायरल पोस्ट में दावा गया था कि 7 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई. 391 घायल हो गए और 250 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया.
पुलिस ने कहा कि ये आंकड़े झूठे हैं. जहां से भी ये गलत सूचना फैलाई गई है, उसकी पड़ताल की जा रही है. हिंसा के पीछे किसी राजनीतिक दल की भूमिका होने की भी जांच की जा रही है.
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